
Filmmaking Behind The Scenes Tricks: फिल्म या टीवी सीरियल देखते समय कभी न कभी आपके दिमाग में ये सवाल तो जरूर आया होगा कि आखिर फिल्ममेकर्स सीन के हिसाब से सही लोकेशन कैसे ढूंढते होंगे और उनके लिए ये कितना मुश्किल होता होगा? अगर आपको भी ऐसा लगता है, तो आपको जानकर हैरानी होगी कि हर सीन के लिए असली लोकेशन ढूंढने के बजाय अक्सर नकली सेट तैयार किए जाते हैं। जैसे फिल्मों में फाइटिंग सीन के लिए नकली मेज, खिड़की और दीवार, वैसे ही डरावने या सस्पेंस वाले सीन्स के लिए मकड़ी के जालों (Spider Webs) से भरा एक अंधेरा और डरावना कमरा तैयार किया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि ये सब फिल्ममेकर्स एक खास जुगाड़ से तैयार करते हैं।
आइए, आज की स्टोरी में जानते हैं कि शूटिंग के लिए ये नकली मकड़ी के जाले कैसे बनाए जाते हैं।
फिल्मों में जो मकड़ी के जाले आपको पुरानी हवेलियों या गुफाओं में दिखते हैं, वो असली नहीं होते। इन्हें तैयार करने के लिए फिल्ममेकर्स एक खास मशीन का इस्तेमाल करते हैं। जैसा कि आप इंस्टाग्राम चैनल directorabhaychhabra पर शेयर किए गए वीडियो में देख सकते हैं, यह पूरी तरह से एक क्रिएटिव जुगाड़ वाली मशीन है।
इस मशीन को बनाने के लिए फिल्ममेकर्स एक ड्रिल मशीन का इस्तेमाल करते हैं। इसके आगे एक छोटे पंखे की पंखुड़ियों को जोड़ दिया जाता है और सामने की तरफ एक डिब्बा लगा दिया जाता है, जिसमें बारीक छेद होते हैं। इन छेदों के जरिए ही लिक्विड बाहर आता है।
इस सेटअप के अंदर एक खास रबर जैसा लिक्विड या केमिकल डाला जाता है। जब ड्रिल मशीन को चालू किया जाता है, तो इसके तेजी से घूमने के कारण वो लिक्विड पतले-पतले धागों के रूप में हवा में बिखरने लगता है। ये धागे हवा में तैरते हुए दीवारों, कोनों या फर्नीचर पर जाकर चिपक जाते हैं, जिससे बिल्कुल असली मकड़ी के जाले जैसा लुक तैयार हो जाता है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सेट पर बहुत जल्दी और बिना किसी झंझट के मनचाहे जाले बनाए जा सकते हैं, जिससे शूटिंग का काम काफी आसान हो जाता है।