लाइफस्टाइल

Personality Traits: धीरे नहीं, तेज चलते हैं? साइंस के मुताबिक आपकी पर्सनैलिटी ऐसे संकेत देती है- स्टडी

Personality Traits: कुछ लोग हमेशा तेज कदमों से चलते हैं, मानो समय उनसे आगे निकल जाए। जबकि दूसरों की चाल धीमी होती है, जो उनकी सोच और पर्सनैलिटी के बारे में बहुत कुछ बताती है।

2 min read
Jan 10, 2026
Behavioral Science Walking|फोटो सोर्स – Chatgpt

Personality Traits: कभी आपने देखा है ऐसे लोग जो हमेशा तेज कदमों से चलते हैं, चाहे सड़क हो या ऑफिस का कॉरिडोर? लैपटॉप बैग कंधे पर झूल रहा हो, आंखें सामने टिकी हों और हर हाल में अपना रास्ता बनाते जाएं। साइंस के मुताबिक, सिर्फ फिटनेस या टाइमिंग नहीं, इनकी तेज चाल उनके स्वभाव और पर्सनैलिटी के बारे में भी कई संकेत देती है। यह छोटी-छोटी आदतें हमें बता सकती हैं कि कोई व्यक्ति अपने जीवन और भविष्य को कैसे देखता है।

ये भी पढ़ें

वर्कप्लेस का साइलेंट गेम, बिना निकाले नौकरी से बाहर? जानिए क्या होता है Quiet Firing

वैज्ञानिक क्या देखते हैं आपकी चाल में?

रिसर्च लैब्स से लेकर भीड़-भरी सड़कों तक, वैज्ञानिक लोगों की चाल को टाइम करते हैं। वे देखते हैं कि कोई व्यक्ति तय दूरी कितने सेकंड में तय करता है और फिर उसकी तुलना उसी उम्र और जेंडर के औसत से करते हैं। सवाल सीधा होता है कौन लोग हैं जो भीड़ से तेज चलते हैं? न्यूयॉर्क, लंदन और 29 अन्य शहरों में हुई एक मशहूर फील्ड स्टडी में पैदल चलने वालों को गुप्त स्टॉपवॉच से टाइम किया गया। नतीजा यह निकला कि जिन शहरों में लोग तेज़ चलते थे, वहां आर्थिक गतिविधि और समय का दबाव ज्यादा था।

तेज चाल और बेहतर सेहत का कनेक्शन-JAMA स्टडी

Journal of the American Medical Association (JAMA) में प्रकाशित एक बड़ी स्टडी में वैज्ञानिकों ने हजारों लोगों को कई सालों तक फॉलो किया। इसमें पाया गया कि औसत से तेज चलने वाले लोग ज्यादा एक्स्ट्रोवर्ट, आगे की योजना बनाने वाले और खुद को हेल्दी मानने वाले थे। चौंकाने वाली बात यह थी कि उनमें ऑल-कॉज मॉर्टेलिटी यानी किसी भी वजह से मृत्यु का जोखिम भी कम था।

पर्सनैलिटी और “इंटरनल क्लॉक”

एक अन्य प्रयोग में प्रतिभागियों को एक्सेलेरोमीटर पहनाया गया, जिससे उनके हर कदम की रफ्तार रिकॉर्ड हुई। जब इस डेटा को पर्सनैलिटी क्वेश्चनायर से मिलाया गया, तो साफ दिखा कि तेज चलने वाले लोग ज्यादा महत्वाकांक्षी, भरोसेमंद और “कांशियस” थे। वे अक्सर कहते थे कि उन्हें समय बर्बाद करना बिल्कुल पसंद नहीं।वैज्ञानिक मानते हैं कि इसका संबंध हमारे “इंटरनल क्लॉक” से है। जिन लोगों का समय-बोध तेज होता है, उन्हें इंतजार और खाली समय बेचैन करता है। यही बेचैनी उनकी चाल, फैसलों और रोजमर्रा की आदतों में झलकती है।

क्या चाल बदलने से सोच बदल सकती है?

दिलचस्प बात यह है कि चाल सिर्फ पर्सनैलिटी दिखाती नहीं, बल्कि उसे प्रभावित भी कर सकती है। कुछ एक्सपेरिमेंट्स में लोगों को जानबूझकर थोड़ी तेज चाल से चलने को कहा गया। कुछ ही मिनटों बाद उन्होंने खुद को ज्यादा अलर्ट, निर्णायक और आत्मविश्वासी महसूस किया। इसे कुछ रिसर्चर्स “टेम्पो ट्रेनिंग” कहते हैं मतलब शरीर की रफ्तार से दिमाग को हल्का सा संकेत देना।

ये भी पढ़ें

Dating Trends 2026: मंडे को सोना, सैटरडे को मोना, भारत में प्यार सिर्फ ‘बैकअप प्लान’? जानिए क्या है रोस्टर डेटिंग

Published on:
10 Jan 2026 03:57 pm
Also Read
View All

अगली खबर