
Rainy Season Food Chart:देश में मानसून आ चुका है। कई राज्यों में बारिश होने लगी है। आज आयुष मंत्रालय ने बारिश के मौसम के हिसाब से डाइट को लेकर जानकारी साझा की है। मानसून में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? क्या बारिश के मौसम में दूध पी सकते हैं? क्या बारिश के मौसम में चावल खा सकते हैं? इन सभी सवालों के जवाब आप नीचे दिए गए शोध के आधार पर पढ़ सकते हैं।
मंत्रालय ने लिखा है कि मौसम के हिसाब से अपनी डाइट चुनिए। आयुर्वेद बारिश के मौसम में साधारण, गर्म और आसानी से पचने वाले भोजन का सेवन करने की सलाह देता है। आयुर्वेद ऐसी चीजों से दूरी बनाने के लिए कहता है जिनसे शरीर में असंतुलन पैदा हो। इसलिए, बारिश के मौसम में ऋतुचर्या का पालन करना चाहिए।
शोध (PMC3361919 - Ritucharya: Answer to the lifestyle disorders) में आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार बताया गया है कि वर्षा ऋतु 'विसर्ग काल' (Dakshinayana) की शुरुआत होती है। इस मौसम में इंसान की शारीरिक शक्ति (Strength) सबसे कम होती है और शरीर में वात दोष बढ़ने लगता है। इसके अलावा, वातावरण में नमी और ठंडक के कारण हमारी पाचन अग्नि बहुत कमजोर हो जाती है।
बारिश में खाएं ये चीजें: मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक, पुराने दाल-चावल और जौ जैसी चीजों को डाइट में शामिल करें। मूंग दाल और उबली हुई सब्जियां खाएं। खट्टी, नमकीन और हल्की मसालेदार चीजें खाएं ताकि वात का संतुलन बना रहे। पीएमसी के शोध में भी इस बात का जिक्र मिलता है।
बारिश में ना खाएं ये चीजें: पत्तेदार सब्जियां ना खाएं। बारिश में जल प्रदूषण बढ़ जाता है, इसलिए संक्रमण का खतरा रहता है। इसके अलावा डेयरी प्रोडक्ट्स (दही, पनीर आदि) का सेवन कम से कम करें।
पीएमसी के शोध में कहा गया है कि बहुत अधिक भारी और ठंडे खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। फ्रिज का ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक्स और जमे हुए (Frozen) या प्रिजर्व्ड (Preserved) खाने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए क्योंकि ये वात को बढ़ाते हैं। साथ ही ज्यादा तीखे (Pungent), कड़वे (Bitter) और कसैले (Astringent) स्वाद वाले भोजन से भी बचना चाहिए।
बारिश के मौसम में पाचन तंत्र कमजोर रहता है। ऐसे में अगर आप दूध का सेवन ना करें तो बेहतर है। यदि आप दूध पीना ही चाहते हैं, तो आयुर्वेद के अनुसार, रात की बजाय सुबह नाश्ते के समय गर्म दूध पीना सबसे अच्छा होता है।
Bioresscientia की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून में भारी बारिश, बढ़ती नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव फंगस, बैक्टीरिया (जैसे ई. कोलाई और साल्मोनेला) और वायरस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाते हैं। इसलिए, ऐसे मौसम में आपको खान-पान में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।