World Sparrow Day 2023 : आज, मार्च 20 को है वर्ल्ड स्पैरो डे। कभी सुबह उठ कर 'ची-ची' करती चिड़या का गान सुना है ? कभी सोचा है क्यों यह नन्ही सी जान अब दिखाई नहीं देती है, क्यों इसकी आवाज अब कम सुनाई देती है? हम बात कर रहे हैं सफेद धारियों से सजी, हलके भूरे रंग की चिड़िया 'गोरैया' की जो लुप्त सी होने लगी है। आइए जानते हैं कहां छुप गयी गोरैया । इस साल वर्ल्ड स्पैरो डे का थीम है 'आई लव स्पैरोज'।
The chirping delight called House Sparrow : हमारे घर के आस पास, पेड़ों पर कीड़े ढूँढ़ते, छत्त के ऊपर, आँगन में दाना चुगते अक्सर हमने गौरेया को देखा है। इसे हम 'हाउस स्पैरो' के नाम से भी जानते है। चौकन्नी, चतुर पर बिलकुल भी चालाक नहीं है यह नन्ही सी चिड़िया। काश के चालाक होती तो आज इसे अपना अस्तित्व खोने का डर नहीं रहता। अनाज दाना, बीज, फल फूल और कीड़े मकोड़े खाने वाली गौरेया जो कई सालों पहले चारों और दिखाइ देती थी वो आज मुश्किल से नजर आती है। हमारे देश में कई ऐसे प्रान्त हैं जहां से ये लगभग लुप्त ही हो चुकी है। ऐसा क्यों हुआ है, ऐसा होने से क्या सिर्फ इस नन्ही सी चिड़िया के अस्तित्व को खतरा है या फिर हमारे जीवन पर भी इसके ना होने का असर पड़ रहा है। करीब आते 'वर्ल्ड स्पैरो डे' के मौके पर आइए जानते हैं किन कारणो से इस पक्षी की तादात कम हो रही है और कैसे हम इसे बचा सकते हैं। आज, मार्च 20 को है वर्ल्ड स्पैरो डे।
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क्या महत्त्व है हाउस स्पैरो का : इस साल वर्ल्ड स्पैरो डे का थीम है 'आई लव स्पैरोज'। हाउस स्पैरो हमेशा से इंसान के जीवन का हिस्सा रहीं हैं। इनके होने से सुबह और शाम होने की खबर मिल जाया करती थी। जिस तरह हर जीव जंतु का अपना महत्व है उसी तरह ही हाउस स्पैरो का भी महत्व हैं। बड़े-बड़े घरों के आँगन में देखे जाने वाली यह नन्ही चिड़या हमें डेंगू, मलेरिआ और मछरों से होने वाली दूसरी बिमारियों से बचाती है। यह बिमारी पैदा करने वाले मच्छरों और कीड़ों के लार्वा को खाती है और हमें इनके हमले से बचाती है। साथ ही कई जानलेवा बीमारियों से भी हमारी रक्षा करती है।
क्यों लुप्त हो रही है हाउस स्पैरो : हाउस स्पैरो का इंसानों से गहरा रिश्ता है। यह जंगलों, पहाड़ों की बजाये वहां ज़्यादा पायी जाती है जहां लोग हों। इसलिए यह अपने रहने और खाने पीने के लिए हम पर निर्भर है। बदलते समय ने घरों के आँगन को सिकुड़ा कर फ्लैट में बदल दिया, पेड़ पौधे कटने लगे और बड़ी इमारतों के बीच गौरेया ने अपना घर खो दिया। अब कोई इन्हे अनाज के दाने नहीं देता। इमारतों के बंद दरवाजे और मॉल में तब्दील होती दुकानें, सबने इनका खाना छिन लिया। इसके अलावा पेस्टिसाइड, पोलूशन, एयर कंडीशनर की गर्मी और मोबाइल फोन का रेडिएशन भी इनके लुप्त होने का कारण है। यही वजह है की हाउस स्पैरो को बचाने के लिए, इसके बारे में अवेयरनेस फैलाने के लिए पूरी दुनिया में मार्च 20 को वर्ल्ड स्पैरो डे मनाया जाता है।
इस तरह बढ़ाएं अवेयरनेस : हाउस स्पैरो और अन्य पक्षियों को लुप्त होने से बचने के लिए जरुरी है की इसके बारे में अवेयरनेस फैलाइए जाए। हम सोशल मीडिया पर सपररजव्स से रिलेटेड पोस्ट शेयर कर सकते हैं, बर्ड्स की फोटोग्राफ और मैसेज शेयर कर सकते हैं। इसके अलावा स्पैरो और अन्य बर्ड्स को लेकर फोटो एग्जीबिशन, कांटेस्ट, वर्कशॉप, सेमीनार, जैसे अवेयरनेस प्रोग्राम रख सकते हैं।
कैसे बचाएँ हाउस स्पैरो को : अपने खाने पीने और रहने के लिए यह बर्ड्स अक्सर हम इंसानों पर निर्भर रहतीं हैं। उनकी सहायता करने के लिए घर की छत, दीवार या बालकनी पर बर्ड नेस्ट, बर्ड फीडर, पानी से भरा प्याला रखें।
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