Akhilesh Yadav PDA formula : UP चुनाव 2027 को लेकर अखिलेश यादव का कांग्रेस को कड़ा संदेश। जानिए क्या है सपा का 'जीत नहीं सीट' का नारा और अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी के मायने।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां राजनीतिक दल तैयारी में लगे हुए हैं। ऐसे में अखिलेश यादव ने एक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सपा ने प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने कार्यकर्ताओं और बूथ स्तर के संगठन को पूरी तरह मुस्तैद कर लिया है। 'बात सीट की नहीं, जीत की है'- यह नारा देकर अखिलेश ने सहयोगी दलों, खासकर कांग्रेस को साफ इशारा दिया है कि गठबंधन सीट बंटवारे पर नहीं, बल्कि जीत हासिल करने पर आधारित होना चाहिए।
अखिलेश यादव ने हाल ही में पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान PDA (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) को एक बड़े सामाजिक आंदोलन के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने कहा, 'PDA किसी एक दल का नहीं, बल्कि देश की 95 प्रतिशत आबादी का है- जो आज पीड़ित, दुखी और अपमानित महसूस कर रही है।' यह 'नई आजादी का आंदोलन' है, जिसका मकसद संविधान की रक्षा, आरक्षण की सुरक्षा और सामाजिक न्याय (समता व अवसरों की समानता) स्थापित करना है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस के कुछ दलित नेताओं (जैसे तनुज पुनिया और राजेंद्र पाल गौतम) ने हाल ही में बसपा सुप्रीमो मायावती के आवास पर बिना अपॉइंटमेंट पहुंचकर मुलाकात की कोशिश की, लेकिन मायावती ने उन्हें मिलने से इनकार कर दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश का 'सभी 403 सीटों पर तैयारी' वाला बयान कांग्रेस को चेतावनी है कि सपा को कमजोर न समझा जाए। यदि कांग्रेस बसपा के साथ अलग रास्ता अपनाने की कोशिश करती है, तो सपा अकेले भी मजबूती से लड़ने के लिए तैयार है। अखिलेश ने गठबंधन का फॉर्मूला लोकसभा चुनाव वाला बताया- 'जीत की गारंटी' वाली सीटें, न कि सिर्फ बंटवारा।
2024 लोकसभा चुनाव में PDA फॉर्मूला ने सपा को 37 सीटें दिलाई थीं, जिसमें OBC, दलित और अल्पसंख्यक वोटों का बड़ा योगदान था। अब अखिलेश इसे 2027 तक और मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने आरक्षण पर BJP सरकार पर हमला बोलते हुए 'PDA Audit' दस्तावेज भी जारी किया है।
सपा ने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और विपक्षी एकता को बनाए रखने पर फोकस किया है। अखिलेश ने संकेत दिया कि INDIA ब्लॉक के तहत कांग्रेस के साथ गठबंधन जारी रहेगा, लेकिन शर्त यह है कि सहयोगी सपा के मजबूत संगठन का लाभ उठाएं और जीत सुनिश्चित करें।
यह बयान सपा की रणनीति का हिस्सा है। मजबूत संगठन पर भरोसा रखते हुए सहयोगियों को 'जीत केंद्रित' गठबंधन का संदेश। अगर कांग्रेस सीटों पर ज्यादा दबाव बनाती है या बसपा की ओर रुख करती है, तो सपा स्वतंत्र लड़ाई का विकल्प खुला रखना चाहती है। 2027 का UP चुनाव BJP बनाम PDA + गठबंधन का बड़ा मुकाबला होगा। अखिलेश यादव का यह कड़ा और नपा-तुला बयान दिखाता है कि सपा न तो सीटों के लिए समझौता करने को तैयार है और न ही अपनी तैयारी में कोई कमी छोड़ रही है।