सियासी गलियारों में अटकलें हैं कि अमित शाह और अमर सिंह मिलकर समाजवादी पार्टी को कमजोर करने की तैयारियों में जुटे हैं...
लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी सपा-बसपा गठबंधन से निपटने की तैयारियों में जुटी है। सियासी गलियारों में अटकलें हैं कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और राज्यसभा सांसद अमर सिंह मिलकर समाजवादी पार्टी को कमजोर करने की तैयारियों में जुटे हैं। पार्टी आलाकमान का मानना है कि 2019 से पहले सपा के कमजोर होने का सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा। रक्षाबंधन पर शिवपाल यादव के बयान को इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। रविवार को पूर्व सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने कहा कि अगर उन्हें पार्टी में सम्मानजनक ओहदा न मिला तो वह नई पार्टी का गठन करेंगे। इससे पहले भी शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन ने दूर रहकर नाराजगी जता चुके हैं।
चर्चा है कि पूर्व सपा प्रदेश अध्यक्ष की रिक्वेस्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिवपाल यादव के आईएएस दामाद से जुड़ी एक फाइल को तुरंत आगे बढ़ा दिया। बीते दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शिवपाल यादव की मुलाकात ने इनकी नजदीकियों को और हवा दे दी। इससे पहले भी शिवपाल यादव कई मौकों पर योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते रहे हैं, जबकि सपा आलाकमान योगी सरकार को हर मौके पर फेल बता रहा है। यूपी की सियासी गलियारों में चर्चा है कि इन दोनों नेताओं के बीच सियासी डील लगभग फाइनल हो चुकी है। इसके तहत शिवपाल यादव 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव को बड़ा झटका दे सकते हैं। हालांकि, सपा नेता ऐसी किसी भी संभावनाओं से इनकार कर रहे हैं।
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अमर सिंह तैयार कर रहे प्लानिंग
शिवपाल यादव और अमर सिंह की गहरी दोस्ती जग-जाहिर है। सियासी गलियारों में इसकी भी चर्चा तेज है कि सपा से निकाले गये अमर सिंह देर-सवेर शिवपाल यादव को भी सपा से बाहर निकाल ही लेंगे। बीते दिनों योगी आदित्यनाथ और शिवपाल यादव की मुलाकात व 26 अगस्त को शिवपाल यादव का नई पार्टी के गठन का बयान से भी ऐसी अटकलों और बल मिला है। इससे पहले शिवपाल यादव सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से नदारद रहने पर भी ऐसी ही अटकलों का दौर गर्म हो गया था।
शिवपाल क्या कर सकते हैं
यादव परिवार की रार के बीच शिवपाल यादव समर्थक 'शिवपाल फैंस एसोसिएशन' का पूरे यूपी में विस्तार कर रहा है। उत्तर प्रदेश के 75 में से 50 जिलों में संगठन के पदाधिकारी नियुक्त हो चुके हैं। शिवपाल के इस संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं की संख्या करीब एक लाख के आसपास बताई जा रही है। गौरतलब है कि ये सभी वही कार्यकर्ता हैं जो अभी तक समाजवादी पार्टी को जिताने का काम करते रहे हैं। ऐसे में अगर शिवपाल यादव 2019 से पहले अलग हो जाते हैं, निश्चित ही अखिलेश यादव के लिये यह किसी झटके से कम नहीं होगा।