लखनऊ

बुढ़ाना में RLD का पुराना वोट बैंक कितना मजबूत, जाट-मुस्लिम समीकरण बदला तो BJP गठबंधन को कितना फायदा?

Budhana Assembly Election 2027: बुढ़ाना विधानसभा सीट पर 2027 में RLD के पुराने जाट वोट बैंक और मुस्लिम वोट का रुख अहम होगा। RLD के BJP के साथ आने से बदले समीकरण में सपा 2024 की बढ़त को दोहराने की कोशिश करेगी।
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Sep 05, 2026
Akhilesh Yadav Jayant Chaudhary Jat Gurjar Politics
अखिलेश यादव और जयंत चौधरी।

Uttar Pradesh Election: मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना विधानसभा सीट पर 2027 का चुनाव दिलचस्प होने वाला है। यहां RLD के पुराने वोट बैंक के साथ जाट और मुस्लिम वोट का रुख नतीजे पर बड़ा असर डाल सकता है। साल 2022 में सपा-RLD गठबंधन के सहारे RLD के राजपाल सिंह बालियान ने भाजपा को 28,310 वोटों से हराया था। लेकिन अब RLD भाजपा के साथ NDA में है। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में बुढ़ाना से सपा को 16,076 वोटों की बढ़त मिली थी। ऐसे में सवाल है कि इस बार जाट-मुस्लिम वोट बंटा तो चुनावी खेल किस तरफ जाएगा।

जाट-मुस्लिम वोट पर नजर

बुढ़ाना को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान और जाट राजनीति की अहम सीट माना जाता है। इसी इलाके में सिसौली है, जिसे किसान राजनीति की राजधानी कहा जाता है और जो टिकैत परिवार का पैतृक गांव है। अब बड़ा सवाल यह है कि RLD का पारंपरिक जाट वोट इस बार उसके साथ कितना मजबूती से खड़ा रहता है। दूसरी तरफ मुस्लिम मतदाता किस तरफ जाते हैं, यह भी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है। अगर जाट वोट RLD-BJP गठबंधन के साथ रहता है और मुस्लिम वोट सपा के पक्ष में एकजुट होता है, तो मुकाबला सीधा हो सकता है।

2022 में RLD की बड़ी जीत

साल 2022 का चुनाव इस सीट के लिए सबसे अहम उदाहरण है। उस समय सपा और RLD साथ थे। RLD के राजपाल सिंह बालियान ने भाजपा के उमेश मलिक को 28,310 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। राजपाल सिंह बालियान को 1,31,093 वोट मिले थे, जबकि उमेश मलिक को 1,02,783 वोट मिले। RLD को 51.28 फीसदी वोट मिले थे।

यही वजह है कि अब सपा और RLD के अलग-अलग रास्ते पर जाने के बाद 2022 के नतीजे को लेकर दोनों दल अपनी-अपनी गणना कर रहे हैं। सपा का दावा है कि 2022 में राजपाल बालियान को मिले 1.28 लाख वोटों में से 1 लाख से अधिक वोट समाजवादी पार्टी के थे। पार्टी को उम्मीद है कि इस बार वह अकेले चुनाव लड़कर मुस्लिम वोट के साथ दूसरे वर्गों को भी अपने पक्ष में ला सकती है।

बुढ़ाना में किसका कितना आधार?

बुढ़ाना में करीब 3.77 लाख से अधिक मतदाता हैं। 2024 की मतदाता सूची में यह संख्या करीब 3.97 लाख तक पहुंच गई थी। अनुमानित सामाजिक आंकड़ों में

  • मुस्लिम मतदाता करीब 70 हजार
  • जाट करीब 32 हजार
  • गुर्जर और जाटव करीब 30 से 35 हजार
  • ब्राह्मण करीब 25 हजार
  • ठाकुर करीब 20 हजार और त्यागी करीब 10 हजार बताए जाते हैं। इसके अलावा सैनी, वैश्य, पाल और वाल्मीकि जैसे अन्य वर्गों के भी 5 से 7 हजार के आसपास मतदाता बताए जाते हैं।

लोकसभा में सपा आगे, अब 2027 में RLD के सामने चुनौती

2024 के लोकसभा चुनाव में बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र में सपा ने भाजपा को पीछे छोड़ दिया। सपा के हरेंद्र सिंह मलिक को 1,16,151 वोट मिले, जबकि भाजपा के संजीव बालियान को 1,00,075 वोट मिले। यानी सपा यहां 16,076 वोट से आगे रही। इससे सपा को विधानसभा चुनाव से पहले नई उम्मीद मिली है।

वहीं RLD विधायक राजपाल बालियान को भरोसा है कि NDA की ताकत और योगी सरकार के काम का फायदा गठबंधन को मिलेगा। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेहतरीन कानून-व्यवस्था और एनडीए गठबंधन की ताकत के दम पर जनता एक बार फिर उन पर भरोसा जताएगी।

उम्मीदवार से भी बदलेगा खेल

फिलहाल मुकाबला सपा और NDA के बीच माना जा रहा है, लेकिन उम्मीदवार का चयन भी नतीजे पर बड़ा असर डाल सकता है। सपा अगर मजबूत जनाधार वाले चेहरे, जैसे प्रमोद त्यागी या किसी बड़े स्थानीय नेता को मैदान में उतारती है तो मुकाबला कड़ा हो सकता है। अब देखना यहा होगा कि RLD अपने पुराने वोट बैंक को भाजपा के साथ कितना जोड़ पाती है और सपा 2024 की बढ़त को विधानसभा चुनाव में कितना आगे ले जाती है।

Updated on:
05 Sept 2026 08:59 am
Published on:
05 Sept 2026 08:59 am