लखनऊ

CM योगी का बड़ा फैसला; UP के सभी जिला पंचायत अध्यक्ष बने प्रशासक, आदेश जारी

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने बड़ा फैसला किया है। CM योगी ने उत्तर प्रदेश के सभी जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है।
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Jul 10, 2026
CM Yogi
सीएम योगी आदित्यनाथ (File Photo- ANI)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों के जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बना दिया है। सरकार जल्द ही ब्लॉक प्रमुखों पर भी यह व्यवस्था लागू कर सकती है। शासन ने इस संबंध में शुक्रवार रात आदेश जारी कर दिया है। दरअसल, UP के सभी 75 जिला पंचायत अध्यक्षों का 5 वर्षीय कार्यकाल शनिवार को समाप्त हो रहा है।

कार्यकाल समाप्त होने के पहले ही सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त कर दिया है। अब नई व्यवस्था बनने तक संबंधित जिला पंचायतों के अध्यक्ष प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बताया कि जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त हो रहा था। इससे पहले सरकार ने उन्हें प्रशासक बना दिया है।

नीतिगत या महत्वपूर्ण निर्णय नहीं ले सकेंगे प्रशासक

सरकार ने तकनीकी और कानूनी मामलों से बचने के लिए जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करने के साथ ही कुछ सीमाएं भी तय की हैं। प्रशासक के रूप में कार्यभार संभालने वाले पंचायत अध्यक्ष कोई बड़ा नीतिगत या महत्वपूर्ण निर्णय नहीं ले सकेंगे। हालांकि, जिला पंचायत के रोजमर्रा के सभी विकास कार्य, प्रशासनिक संचालन, विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन और दैनिक प्रशासनिक गतिविधियां पहले की तरह उनके हस्ताक्षर से ही जारी रहेंगी।

पंचायत अध्यक्षों को क्यों बनाया गया प्रशासक?

सामान्य तौर पर कार्यकाल खत्म होने के बाद जिलाधिकारी को प्रशासक बनाया जाता है, लेकिन सरकार के इस फैसले से अब ये अध्यक्ष आगामी पंचायत चुनाव होने तक अपनी कुर्सी पर बने रहेंगे। उत्तर प्रदेश की कुल 75 जिला पंचायतों में से 68 सीटों पर वर्तमान में भाजपा समर्थित पंचायत अध्यक्ष हैं।

योगी सरकार के इस तरह भाजपा की पकड़ बनी रहेगी। अगर इन पदों पर DM बैठते तो जनप्रतिनिधियों का दखल शून्य हो जाता। अब बीजेपी के 68 दिग्गज अपने-अपने जिलों में 'पावर सेंटर' बने रहेंगे। आगामी विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर सरकार का यह निर्णय मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।