
Kakori Train Action 101st Anniversary: स्वतंत्रता दिवस से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। इस ऐतिहासिक मौके पर उन्होंने भारत माता के महान सपूतों को याद करते हुए उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि काकोरी ट्रेन एक्शन देश के स्वाभिमान, वीरता और देशभक्ति का गौरवशाली अध्याय है।
समारोह के दौरान वंदे मातरम और काकोरी ट्रेन एक्शन नाम की दो विशेष पुस्तिकाएं भी जारी की गईं। वंदे मातरम पुस्तिका बच्चों की पेंटिंग पर आधारित है जबकि काकोरी ट्रेन एक्शन पुस्तिका आधिकारिक रिकॉर्ड और काकोरी के अमर शहीदों की जानकारी पर आधारित है। इस खास मौके पर देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले महान क्रांतिकारियों और वीर सैनिकों के परिवारों को भी सम्मानित किया गया।
सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों ने युवाओं को उनके क्रांतिकारियों और नायकों के इतिहास से दूर रखा उन्होंने भारत की युवा पीढ़ी के साथ सबसे बड़ा अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि अंग्रेज इस घटना को डकैती कहते थे लेकिन दुर्भाग्य से स्वतंत्र भारत में सत्ता में आने वालों ने भी इसे 'काकोरी डकैती कांड' का नाम देकर क्रांतिकारियों का घोर अपमान किया। योगी ने दावा किया कि लखनऊ के ही 2 कांग्रेस नेताओं ने वकालत करते हुए हमारे कई क्रांतिकारियों को आजीवन कारावास की सजा दिलवाई थी।
काकोरी ट्रेन एक्शन 9 अगस्त, 1925 को लखनऊ के पास अंजाम दिया गया था। हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत से लड़ने के लिए हथियार खरीदने के लिए यह योजना बनाई थी। राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और ठाकुर रोशन सिंह जैसे प्रमुख नेताओं के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने शाहजहांपुर से लखनऊ जा रही ट्रेन को रोककर करीब 8 हजार रुपये का सरकारी खजाना अपने कब्जे में ले लिया था। काकोरी एक्शन के बाद शाहजहांपुर के तीनों महानायक राम प्रसाद बिस्मिल अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह को ब्रिटिश हुकूमत ने गिरफ्तार कर और जेल में डाल दिया। इसके बाद दिसंबर 1927 में अलग-अलग जेलों में तीनों महानायकों को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया था।