लखनऊ

Women Reservation Debate: महिला आरक्षण सत्र पर कांग्रेस का हमला, समय बढ़ाने की मांग, सरकार पर सवाल

Women's Reservation: लखनऊ में महिला आरक्षण विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए। नेता आराधना मिश्रा मोना ने चर्चा का समय बढ़ाने की मांग करते हुए सरकार की नीयत पर गंभीर आरोप लगाए।

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Apr 30, 2026
महिला आरक्षण विशेष सत्र पर कांग्रेस का विरोध (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Women Reservation Congress Reaction: राजधानी लखनऊ में महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर बुलाए गए विशेष सत्र पर सियासी घमासान तेज हो गया है। जहां एक ओर सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इस सत्र की अवधि को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर केवल पांच घंटे की चर्चा पर्याप्त नहीं है।

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“पांच घंटे काफी नहीं” - कांग्रेस की मांग

आराधना मिश्रा मोना ने विशेष सत्र के निर्धारित समय पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह विषय देश की आधी आबादी से जुड़ा है, ऐसे में इस पर सीमित समय में चर्चा करना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि सत्र का समय बढ़ाया जाए ताकि सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिल सके। उनका कहना है कि महिला आरक्षण कोई सामान्य राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और लोकतांत्रिक संतुलन से जुड़ा विषय है। ऐसे में इसे जल्दबाजी में निपटाना महिलाओं के अधिकारों के साथ न्याय नहीं होगा।

 “नारी शक्ति के हित में लंबी चर्चा जरूरी”

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि विशेष सत्र में पूरे दिन से भी अधिक समय तक चर्चा होनी चाहिए। उनका तर्क है कि जब बात नारी शक्ति के अधिकारों और भागीदारी की हो, तो उस पर गहराई से विचार-विमर्श होना जरूरी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि ठोस और प्रभावी निर्णयों की आवश्यकता है। इसके लिए सभी दलों को मिलकर गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए।

भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि केंद्र और राज्य की सरकारें नारी शक्ति के आरक्षण को लेकर गंभीर नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण को केवल राजनीतिक मुद्दा बनाकर पेश किया जा रहा है, जबकि इसके वास्तविक क्रियान्वयन की दिशा में ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है, तो उसे इस मुद्दे पर व्यापक और पारदर्शी चर्चा सुनिश्चित करनी चाहिए।

विशेष सत्र बना सियासी रणभूमि

महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर बुलाया गया यह विशेष सत्र अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी इसे अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे अधूरा और दिखावटी कदम बता रहा है। कांग्रेस के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि सदन के भीतर तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर देखने को मिलेगा। अन्य विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।

महिला आरक्षण: मुद्दा या राजनीति

महिला आरक्षण का विषय लंबे समय से देश की राजनीति में चर्चा का केंद्र रहा है। यह मुद्दा केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समानता और न्याय से भी जुड़ा हुआ है। कांग्रेस का मानना है कि इस मुद्दे पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय व्यापक सहमति बनाना जरूरी है। वहीं सरकार इसे ऐतिहासिक पहल के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

जनता और महिला वर्ग की उम्मीदें

इस पूरे घटनाक्रम के बीच आम जनता, खासकर महिलाओं की नजरें इस विशेष सत्र पर टिकी हुई हैं। महिलाएं यह जानना चाहती हैं कि क्या इस बार उनके अधिकारों को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा या फिर यह मुद्दा केवल बहस तक ही सीमित रह जाएगा। कांग्रेस की ओर से समय बढ़ाने की मांग ने इस बहस को और भी गंभीर बना दिया है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा हो सकती है।

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