लखनऊ

डिंपल के लिए आया हीरे का हार… अखिलेश ने लौटाया; बोले- उनको शौक नहीं

Dimple Yadav 48th Birthday : आज डिंपल यादव का 48वां जन्मदिन है। डिंपल यादव सादगी से रहना पसंद करती हैं। उनकी सादगी का एक किस्सा 2021 का है आइए जानते हैं...।

3 min read
Jan 15, 2026
डिंपल यादव।

लखनऊ : संसद से एक तस्वीर लगातार सामने आती है। एक सिंपल सादी महिला की, जो दिखावे से एकदम दूर रहती हैं। सिंपल साड़ी कोई मेकअप नहीं … माथे पर सिर्फ एक बिंदी और चेहरा हमेशा मुस्कुराते हुए। हां यह मुस्कुराहट तब थोड़ी जरूर बढ़ जाती है…जब अखिलेश यादव संसद में कोई बयान दे रहे होते हैं या सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे होते हैं। हम बात कर रहे हैं सांसद डिंपल यादव की, जो आज अपना 48वां जन्मदिन मना रही हैं।

ये भी पढ़ें

ताजमहल में शाहजहां-मुमताज की असली कब्र पर उर्स की शुरुआत, 30 फीट नीचे उतरे ASI अफसर

अखिलेश ने लौटा दिया था हीरे का हार

डिंपल यादव को गहनों का कोई खास शौक नहीं है। साल 2021 की बात है, जब एक वरिष्ठ नेता उनसे मिलने पहुंचे और डिंपल के लिए हीरे का हार लेकर आए। अखिलेश यादव ने उपहार देखकर पूछा- यह क्या है? नेता ने जवाब दिया, मैडम के लिए छोटा-सा तोहफा है। अखिलेश ने दोबारा पूछा- है क्या? जब डिब्बा खोला गया, तो उसमें इम्पोर्टेड हीरे का हार था। अखिलेश यादव ने कहा-क्या आपने कभी उन्हें गहने पहने देखा है? उनकी आदत मत बिगाड़िए। उन्हें इन चीजों का कोई शौक नहीं है। इसे वापस ले जाइए।

हमेशा विवादों से दूर रहीं डिंपल

डिंपल यादव ने अपने सार्वजनिक जीवन में हमेशा विवादों से दूरी बनाए रखी। बड़े से बड़े संवेदनशील सवालों पर भी उन्होंने संयम और सादगी के साथ प्रतिक्रिया दी या फिर चुप रहना बेहतर समझा।

जुलाई 2025 में जब संसद की मस्जिद के इमाम समाजवादी पार्टी के नेताओं को लेकर पहुंचे, उस दौरान डिंपल भी वहां मौजूद थीं। उनकी मौजूदगी को लेकर कुछ मौलवियों ने सवाल उठाए, जिसके बाद बहस शुरू हो गई। लेकिन डिंपल ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और खुद को विवाद से अलग रखा।

सेना परिवार में पली-बढ़ीं डिंपल

डिंपल यादव का जन्म 1978 में पुणे में हुआ। वे एक अनुशासित भारतीय सेना परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता रिटायर्ड कर्नल रामचंद्र सिंह रावत और मां चंपा रावत हैं। मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से आने वाले इस परिवार की वजह से उनका बचपन पुणे, बठिंडा, अंडमान-निकोबार और लखनऊ जैसे अलग-अलग शहरों में बीता।

उन्होंने आर्मी पब्लिक स्कूल, लखनऊ से स्कूली शिक्षा पूरी की और इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया। सेना के माहौल ने उनमें अनुशासन, आत्मनिर्भरता और सादगी की मजबूत नींव रखी।

डिंपल को बचपन से ही घुड़सवारी का शौक रहा है। लखनऊ के रेसकोर्स और कैवेलरी क्लब में वे नियमित रूप से ट्रेनिंग लेती रहीं। यह जुनून उनके व्यक्तित्व में आत्मविश्वास और संतुलन का प्रतीक रहा।

फिल्मी कहानी जैसी डिंपल-अखिलेश की लव स्टोरी

डिंपल और अखिलेश यादव की प्रेम कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं है। दोनों की पहली मुलाकात लखनऊ में एक कॉमन दोस्त के घर हुई थी। उस वक्त डिंपल को यह तक नहीं पता था कि अखिलेश, मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं।
दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदली और चार साल तक रिश्ता चला। अखिलेश जब पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया गए, तब भी यह रिश्ता और मजबूत होता गया।

शुरुआत में दोनों परिवार इस शादी के लिए तैयार नहीं थे। इसकी एक वजह यह भी थी कि डिंपल राजपूत परिवार से आती थीं। मुलायम सिंह यादव को अंतरजातीय विवाह और उत्तराखंड आंदोलन से जुड़ी आपत्तियां थीं। अखिलेश ने अपनी दादी मूर्ति देवी को पूरी बात बताई। दादी की सहमति के बाद परिवार मान गया।

आखिरकार 24 नवंबर 1999 को लखनऊ में दोनों की शादी हुई, जिसमें अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना जैसे बड़े सितारे भी शामिल हुए।

राजनीति से दूरी और पारिवारिक जीवन

शादी के बाद डिंपल यादव ने लंबे समय तक राजनीति से दूरी बनाए रखी। करीब एक दशक तक उन्होंने घर और बच्चों पर पूरा ध्यान दिया। उनके तीन बच्चे हैं- दो बेटियां अदिति और टीना, और एक बेटा अर्जुन। परिवार के साथ समय बिताना उनका सबसे बड़ा शौक है। इसके अलावा उन्हें बागवानी भी बेहद पसंद है।

जब उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी, तब डिंपल की रुचि से लखनऊ की सड़कों के किनारे कई विदेशी प्रजातियों के पेड़ लगाए गए, जो अलग-अलग मौसम में रंग-बिरंगे फूलों से शहर को सजाते हैं।

हार से लेकर ऐतिहासिक जीत तक

2009 में डिंपल यादव ने फिरोजाबाद से पहला लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस के राजबब्बर से हार गईं। 2012 में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने कन्नौज सीट से इस्तीफा दिया। वहां हुए उपचुनाव में डिंपल यादव निर्विरोध सांसद चुनी गईं। वे उत्तर प्रदेश की पहली महिला और देश की 44वीं ऐसी शख्सियत बनीं, जिन्हें निर्विरोध चुना गया।

2014 में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की। 2019 में कन्नौज से भाजपा के सुब्रत पाठक ने उन्हें हराया। 2022 में मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी में उपचुनाव हुआ, जहां डिंपल यादव ने बड़े अंतर से जीत हासिल की। 2024 में भी उन्होंने यह सीट बरकरार रखी।

ये भी पढ़ें

जेल से छूटा तलवार बांटने वाल, समर्थक बोले- शेर आया शेर आया, आतिशबाजी के साथ निकाला जुलूस

Published on:
15 Jan 2026 09:37 pm
Also Read
View All

अगली खबर