लखनऊ

BJP West UP: पश्चिमी यूपी भाजपा में पदों को लेकर खींचतान, नेताओं पर परिवार को आगे बढ़ाने के आरोप

Family Politics Row in BJP:  पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा संगठन के पुनर्गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। नेताओं द्वारा परिवार के सदस्यों को पद दिलाने के दबाव से नई जिला और महानगर कमेटियों की सूची अटक गई है।

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Mar 05, 2026
पश्चिमी यूपी में भाजपा संगठन के पुनर्गठन पर सियासी घमासान, परिवारवाद के आरोपों से अटकी नई कमेटियां    (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group) 

BJP West UP Latest Update: छह साल बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जिला और महानगर संगठन के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन बड़े नेताओं की सिफारिशों और अपने परिवार के सदस्यों को पद दिलाने की कोशिशों के कारण नई कमेटियों की घोषणा अटक गई है। पार्टी के अंदर चल रही इस खींचतान ने संगठनात्मक बदलाव को फिलहाल मुश्किल बना दिया है और सियासी गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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छह साल बाद शुरू हुई संगठनात्मक कवायद

सूत्रों के अनुसार, भाजपा में आखिरी बार जिला और महानगर स्तर पर संगठन का व्यापक पुनर्गठन वर्ष 2019 के आसपास हुआ था। उसके बाद कई जिलों में वही पुरानी टीमें काम कर रही हैं। हालांकि इस दौरान पार्टी ने प्रदेश स्तर पर कई बदलाव किए, लेकिन जिला और महानगर कमेटियों में बड़े पैमाने पर बदलाव नहीं हो सका। पार्टी नेतृत्व ने अब संगठन को सक्रिय और मजबूत बनाने के उद्देश्य से पश्चिमी यूपी के जिलों में नई कमेटियों के गठन की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए स्थानीय नेताओं से फीडबैक लिया गया, कार्यकर्ताओं से सुझाव मांगे गए और संभावित नामों की सूची भी तैयार की गई। लेकिन अंतिम सूची जारी होने से पहले ही कई जिलों में विवाद खड़ा हो गया।

नेताओं का दबाव बना बड़ी चुनौती

भाजपा सूत्र बताते हैं कि कई बड़े नेता अपने परिवार के सदस्यों को संगठन में जगह दिलाने के लिए दबाव बना रहे हैं। कुछ नेता अपनी पत्नी, बहू और बेटों को जिला या महानगर कमेटियों में महत्वपूर्ण पद दिलाना चाहते हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, इस तरह की सिफारिशों की वजह से जिलाध्यक्षों और क्षेत्रीय नेताओं के सामने संतुलन बनाना मुश्किल हो गया है। यदि वे एक नेता के परिवार को जगह देते हैं, तो दूसरे नेता भी ऐसी ही मांग करने लगते हैं। इसी वजह से कई जिलों में नई सूची तैयार होने के बावजूद उसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।

मुरादाबाद में बहू को राजनीति में लाने की चर्चा

पश्चिमी यूपी के राजनीतिक हलकों में मुरादाबाद का मामला खासा चर्चा में है। यहां के मेयर Vinod Agarwal के बारे में चर्चा है कि वह अपनी बहू को सक्रिय राजनीति में लाना चाहते हैं और संगठन में उन्हें जिम्मेदारी दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि इस पर आधिकारिक रूप से कोई बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी के अंदर इस तरह की सिफारिशों की चर्चा तेज है। मुरादाबाद के अलावा मेरठ, बरेली, सहारनपुर और अन्य जिलों में भी इसी तरह की मांगों की बात सामने आ रही है।

2022 और 2025 में अध्यक्ष बदले, पर ढांचा वही

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा ने पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश स्तर पर नेतृत्व में बदलाव जरूर किए हैं। वर्ष 2022 और फिर 2025 में प्रदेश अध्यक्ष बदले गए, लेकिन जिला और महानगर स्तर पर संगठनात्मक ढांचा लगभग वही बना रहा। इस कारण कई जिलों में पुराने पदाधिकारी ही लंबे समय से जिम्मेदारी निभा रहे हैं। अब पार्टी नेतृत्व नए चेहरों को मौका देना चाहता है, ताकि संगठन में नई ऊर्जा लाई जा सके।लेकिन परिवारवाद के आरोपों और आंतरिक खींचतान ने इस प्रक्रिया को धीमा कर दिया है।

कार्यकर्ताओं में भी बढ़ रही नाराजगी

संगठन के अंदर कई पुराने कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि पद केवल नेताओं के परिवार के लोगों को दिए जाएंगे तो मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी हमेशा से परिवारवाद के खिलाफ राजनीति करने का दावा करती रही है, इसलिए संगठन में भी योग्यता और मेहनत के आधार पर ही जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि नई कमेटियों में युवा और सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका मिलेगा तो संगठन और मजबूत होगा।

अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला

इस पूरे मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा से परिवारवाद के खिलाफ बोलती रही है, लेकिन अब खुद उसी रास्ते पर चल रही है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा का जनाधार कमजोर हो रहा है और इसलिए नेता अपने परिवार के लोगों को राजनीति में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार कई अहम मुद्दों पर जनता को भ्रम में रख रही है।

नागरिकता और वोटर नोटिस पर भी घेरा

अखिलेश यादव ने नागरिकता और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर भी भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि आम लोग अपने अधिकारों को लेकर असमंजस में हैं और सरकार स्पष्टता नहीं दे पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर ऐसे नोटिस दिए जा रहे हैं जिनसे लोगों में डर और भ्रम का माहौल बन रहा है। हालांकि भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि विपक्ष बेवजह मुद्दों को राजनीतिक रंग दे रहा है।

भाजपा नेतृत्व की रणनीति

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व इस बात को लेकर सतर्क है कि संगठन में संतुलन बना रहे और किसी भी तरह का विवाद सार्वजनिक रूप से न बढ़े। इसलिए जिला और महानगर कमेटियों की घोषणा करने से पहले सभी पक्षों से बातचीत की जा रही है। पार्टी चाहती है कि नई टीम में अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा कार्यकर्ताओं को भी मौका मिले। कई जिलों में नामों की सूची लगभग तैयार है और माना जा रहा है कि जल्द ही चरणबद्ध तरीके से नई कमेटियों की घोषणा की जा सकती है।

2027 चुनाव को देखते हुए अहम फैसला

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के लिए यह पुनर्गठन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई अहम चुनाव होने वाले हैं। संगठन को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा है। यदि जिला और महानगर स्तर पर मजबूत टीमें बनती हैं तो पार्टी को चुनावी तैयारी में भी फायदा मिल सकता है।

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