लखनऊ

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर यूपी में मंथन, अनुराग ठाकुर बोले- हर पक्ष की राय होगी अहम

लखनऊ पहुंचे 'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर गठित संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य अनुराग ठाकुर ने बताया कि समिति अधिकारियों और राजनीतिक दलों से राय लेकर व्यापक रिपोर्ट तैयार करेगी।
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Jul 13, 2026
अनुराग ठाकुर की अगुवाई में जेपीसी जुटाएगी सभी पक्षों की राय  (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group) 
अनुराग ठाकुर की अगुवाई में जेपीसी जुटाएगी सभी पक्षों की राय  (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group) 

JPC Begins Uttar Pradesh Visit to Gather Views on One Nation, One Election Proposal:  देश में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' (एक राष्ट्र, एक चुनाव) की संभावनाओं और उससे जुड़े विभिन्न प्रशासनिक, संवैधानिक तथा चुनावी पहलुओं पर विचार-विमर्श के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) सोमवार को उत्तर प्रदेश के दौरे पर पहुंची।

समिति के सदस्य एवं भारतीय जनता पार्टी के सांसद अनुराग ठाकुर ने इस दौरान बताया कि समिति प्रदेश में विभिन्न सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर इस महत्वपूर्ण विषय पर उनके सुझाव और राय प्राप्त करेगी। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य सभी पक्षों को सुनकर व्यापक और संतुलित रिपोर्ट तैयार करना है।

आज प्रशासनिक अधिकारियों के साथ होगी विस्तृत बैठक

लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति का उत्तर प्रदेश दौरा बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि सोमवार को समिति की बैठक प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ होगी।

इन बैठकों में प्रशासनिक तैयारियों, चुनाव प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता और एक साथ चुनाव कराने से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां चुनाव कराना एक बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया होती है। ऐसे में राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुभव और सुझाव समिति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।

राजनीतिक दलों से भी मांगे जाएंगे सुझाव

अनुराग ठाकुर ने बताया कि समिति का कार्यक्रम केवल सरकारी अधिकारियों तक सीमित नहीं है। मंगलवार को समिति विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से भी मुलाकात करेगी और 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के मुद्दे पर उनके विचार जानेगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी राजनीतिक दलों की राय महत्वपूर्ण होती है और समिति का प्रयास है कि हर पक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिले।

उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति किसी पूर्व निर्धारित निष्कर्ष के साथ काम नहीं कर रही है, बल्कि सभी संबंधित पक्षों की राय, सुझाव और चिंताओं को सुनने के बाद ही अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इससे भविष्य में किसी भी निर्णय के लिए व्यापक आधार तैयार होगा।

क्या है 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की अवधारणा

'वन नेशन, वन इलेक्शन' का अर्थ है कि देश में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं। वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं, जिसके कारण पूरे वर्ष किसी न किसी राज्य में चुनावी गतिविधियां चलती रहती हैं।

इस प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे तो चुनावी खर्च में कमी आएगी, प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू होने से विकास कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होंगी और शासन-प्रशासन अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और संवैधानिक विशेषज्ञों की अलग-अलग राय भी है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इसे लागू करने के लिए संविधान में कई महत्वपूर्ण संशोधन करने होंगे तथा राज्यों के कार्यकाल और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े कई जटिल प्रश्नों का समाधान भी आवश्यक होगा।

व्यापक सहमति बनाने की दिशा में प्रयास

संयुक्त संसदीय समिति का उद्देश्य केवल प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन करना ही नहीं, बल्कि विभिन्न हितधारकों के विचारों को भी समझना है। समिति विभिन्न राज्यों का दौरा कर अधिकारियों, विधि विशेषज्ञों, चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों तथा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से लगातार संवाद कर रही है।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी बड़े सुधार के लिए व्यापक चर्चा और सभी पक्षों की भागीदारी आवश्यक होती है। इसलिए समिति हर वर्ग से सुझाव लेकर एक समग्र रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे आगे संसद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश की भूमिका मानी जा रही अहम

देश की सबसे अधिक लोकसभा सीटों वाला राज्य होने के कारण उत्तर प्रदेश इस पूरी प्रक्रिया में विशेष महत्व रखता है। यहां चुनाव कराने की प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक होती हैं। यही कारण है कि संयुक्त संसदीय समिति प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और चुनावी तंत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुभवों को विशेष महत्व दे रही है।

मुख्य सचिव, डीजीपी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के साथ होने वाली बैठकों में चुनावी संसाधनों, सुरक्षा बलों की उपलब्धता, मतदान केंद्रों की व्यवस्था, ईवीएम और वीवीपैट प्रबंधन सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श होने की संभावना है।

रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

संयुक्त संसदीय समिति देशभर से प्राप्त सुझावों, विशेषज्ञों की राय, राजनीतिक दलों के विचार और प्रशासनिक अनुभवों का अध्ययन करने के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' से संबंधित प्रस्तावों और आवश्यक कानूनी एवं संवैधानिक प्रक्रियाओं पर आगे निर्णय लिया जाएगा।