लखनऊ

KGMU लव-कन्वर्जन कांड में विस्फोटक खुलासा, डॉक्टर गैंग पर शोषण, फर्जी निकाह, ब्लैकमेल वीडियो और साजिश के आरोप

KGMU Conversion : लखनऊ के केजीएमयू से जुड़े कथित यौन शोषण, जबरन मतांतरण और फर्जी दस्तावेज प्रकरण में पुलिस ने मुख्य आरोपी के सहयोगी शारिक को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में निकाह, ब्लैकमेलिंग, संदिग्ध कागजात और फरारी नेटवर्क से जुड़े कई अहम खुलासे सामने आए, जबकि आरोपियों की तलाश जारी बताई गई है।

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Jan 31, 2026
साथी शारिक गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेज, निकाह और ब्लैकमेलिंग के आरोपों की जांच तेज (फोटो सोर्स : फाइल WhatsApp News Group)

KGMC Conversion & Exploitation Case: केजीएमयू (किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी) से जुड़े कथित यौन शोषण, जबरन मतांतरण और आपराधिक साजिश के मामले में पुलिस जांच ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में फरार चल रहे आरोपी डॉ. रमीजुद्दीन नायक के करीबी सहयोगी शारिक को चौक पुलिस ने गुरुवार को पीलीभीत जिले के न्योरिया क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस टीम उसे कड़ी सुरक्षा में लखनऊ लाई, जहां उससे करीब छह घंटे तक गहन पूछताछ की गई। पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है।

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बचपन की दोस्ती और कथित साजिश का जाल

पुलिस सूत्रों के अनुसार, शारिक ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह डॉ. रमीजुद्दीन को बचपन से जानता है। उनके साथ होम्योपैथिक चिकित्सक जाहिद भी लंबे समय से घनिष्ठ मित्र हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह तिकड़ी सुनियोजित तरीके से युवतियों से संपर्क करती थी। पुलिस का कहना है कि शारिक संभावित युवतियों की पहचान कर उनके बारे में जानकारी जुटाता था, जिसके बाद डॉ. रमीजुद्दीन उनसे संपर्क बढ़ाता था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इन गतिविधियों की जानकारी रमीजुद्दीन के परिजनों को भी थी। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

निकाह में काजी बना दोस्त, खुद बना गवाह

पूछताछ में सामने आया कि एक कथित निकाह के दौरान होम्योपैथिक चिकित्सक जाहिद ने स्वयं को काजी की भूमिका में प्रस्तुत किया। पुलिस के अनुसार, उसी ने निकाह पढ़ाया, जबकि शारिक इस निकाह में गवाह बना। जांच में यह भी सामने आया है कि इस प्रक्रिया से जुड़े कई दस्तावेजों की वैधता संदिग्ध है। पुलिस अब कूटरचित दस्तावेज (फर्जी कागजात) तैयार करने की धाराएं भी शारिक के खिलाफ जोड़ने की तैयारी में है।

फर्जी दस्तावेज और विदेश भागने की योजना

चौक पुलिस का कहना है कि शारिक ने पासपोर्ट बनवा लिया था और विदेश भागने की फिराक में था। जांचकर्ताओं का दावा है कि यदि उसे समय रहते गिरफ्तार न किया जाता, तो वह देश छोड़ सकता था। पुलिस ने यह भी बताया कि शारिक ने उत्तराखंड के खटीमा स्थित रमीजुद्दीन के घर पर भी लंबा समय बिताया था और वहीं से कई कथित दस्तावेज तैयार कराए गए।

ब्लैकमेलिंग का भी आरोप

पूछताछ में शारिक ने कथित रूप से यह भी बताया कि गिरोह के सदस्य युवतियों के साथ आपत्तिजनक वीडियो बना लेते थे। पुलिस का आरोप है कि यदि कोई युवती मतांतरण या संबंधों का विरोध करती, तो वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर उसे चुप कराया जाता था। यह पहलू जांच का बेहद संवेदनशील हिस्सा माना जा रहा है और साइबर सेल को भी इसमें शामिल किया गया है।

मुख्य मामला क्या है

यह पूरा प्रकरण तब उजागर हुआ जब केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग में कार्यरत एक महिला डॉक्टर ने डॉ. रमीजुद्दीन पर शादी का झांसा देकर यौन शोषण, गर्भपात और मतांतरण का दबाव बनाने का आरोप लगाया। महिला डॉक्टर, जो पश्चिम बंगाल के हावड़ा की निवासी बताई जा रही हैं, ने शिकायत में कहा कि मतांतरण से इनकार करने पर आरोपी ने विवाह से इंकार कर दिया। इससे आहत होकर उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया। शिकायत में यह भी आरोप है कि रमीजुद्दीन ने आगरा की एक अन्य महिला डॉक्टर को भी प्रेमजाल में फंसाया और फरवरी 2025 में कथित रूप से मतांतरण के बाद निकाह किया।

फरारी के दौरान कई शहरों में ठिकाने

मुकदमा दर्ज होने के बाद डॉ. रमीजुद्दीन गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गया था। पुलिस जांच में सामने आया है कि वह खटीमा, देवबंद, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और दिल्ली में छिपता रहा। शारिक ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने इन स्थानों पर रमीजुद्दीन को ठहराने में मदद की थी।

जांच में सहयोग नहीं कर रहा था शारिक

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शारिक कई सवालों के अधूरे जवाब देकर चुप हो जाता था। विशेष रूप से लैपटॉप और मोबाइल फोन से जुड़े सवालों पर उसने पूरी तरह चुप्पी साध ली। पुलिस अब डिजिटल साक्ष्य जुटाने में लगी है।

जाहिद अभी फरार

इस पूरे मामले में नाम आने के बाद होम्योपैथिक चिकित्सक जाहिद फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

पुलिस का बयान

इंस्पेक्टर चौक ने बताया कि मामले की जांच बहुस्तरीय है। फर्जी दस्तावेज, साजिश, यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और मतांतरण से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे और धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं। यह मामला कई सामाजिक और कानूनी पहलुओं से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील है। पुलिस ने अपील की है कि अफवाहों से बचें और आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।

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