
लखनऊ. बसों की पॉलिटिक्स में अब यूपी सरकार व राजस्थान सरकार आमने-सामने आ गई हैं, हालांकि अब पूरा केंद्र श्रमिकों की बसों से हट कर अप्रैल में कोटा से छात्रों को लेकर चलाई गई बसों पर चला गया है। गुरुवार को सोशल मीडिया पर 5 मई का राजस्थान सरकार द्वारा यूपी सरकार को लिखा गया पत्र वायरल हुआ, छात्रों के लिए चलाई गई बसों की एवज में 36,36,664 रुपए के बकाए बिल भरने की मांग की गई थी। हालांकि यूपी परिवहन के अधिकारियों की मानें तो पूरा बकाया बिल जमा कर दिया गया, लेकिन पत्र सामने आने के बाद बसों को लेकर सियासत फिर से गरमा गई। भाजपा ने आरोप लगाया कि प्रियंका गांधी वाड्रा का यही सेवा धर्म है। बच्चों को घर पहुंचाने के बदले कांग्रेस की सरकार अब किराया वसूलने में लगी है। इसके जवाब में कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि यूपी सरकार और राजस्थान सरकार में पहले ही बिल को लेकर बात हो गई थी, फिर आखिर विवाद किस बात का। शुक्रवार को तो दोनों राज्यों की सरकारें आमने-सामने आ गई। शुक्रवार को यूपी के डिप्टी सीएम डॉ दिनेश शर्मा और परिवहन मंत्री अशोक कटारिया ने जवाबी हमला किया। दिनेश शर्मा ने कहा कि कोटा में फंसे बच्चों को यूपी बॉर्डर तक छोड़ने का किराया 36 लाख रुपये वसूल रहे हैं और दूसरी तरफ संवेदना दिखाते हैं कि हमने बच्चों को यूपी बॉर्डर तक भेजा है। यह दोहरी मानसिकता है। तो राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास यूपी सरकार पर पलटवार करते दिखे। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं को इस पूरे मामले पर माफी मांगनी चाहिए। राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट भी उनके सुर में सुर मिलाते नजर आए। इस मामले में बसपा प्रमुख मायावती भी कांग्रेस को घेरने में पीछे नहीं रहीं। भाजपा नेता संबित पात्रा ने भी ट्वीट करते हुए लिखा कि कोटा से यूपी के छात्रों को वापस लाते समय यूपी की कुछ बसों को डीजल की आवश्यकता पड़ गई ..दया छोड़िए ..आधी रात को दफ्तर खुलवा कर प्रियंका वाड्रा की राजस्थान सरकार ने यूपी सरकार से पहले 19 लाख रुपए लिए और उसके बाद बसों को रवाना होने दिया, वाह रे मदद।
क्या था पत्र में-
पांच मई को जारी पत्र में लिखा गया था कि राजस्थान परिवहन निगम की बसों द्वारा 17 से 19 अप्रैल के बीच कोटा के छात्रों को यूपी के फतेहपुर सीकरी (आगरा) और झांसी तक पहुंचाया गया था। इसका किराया 36,36,664 रुपए अभी तक नहीं दिया गया है। पत्र में RTGS के माध्यम से भुगतान करने का आग्रह किया गया है। साथ ही बैंक की डीटेल भी संलग्न हैं। इस पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक राज शेखर ने कहा कि कोटा में फंसे छात्रों को वापस लाने का फैसला लिए जाने के बाद यूपी रोडवेज की बसें उन्हें लाने के लिए लगायी गयीं, लेकिन वह कम पड़ गईं। ऐसे में कोटा में उपलब्ध राजस्थान रोडवेज की बसों को छात्रों को आगरा और मथुरा छोड़ने के लिए लिया गया था। राजस्थान रोडवेज ने इसका बिल दिया, जिसका भुगतान उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने कर दिया है।
यूपी डिप्टी सीएम ने कहा-
डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने कांग्रेस की महासचिव प्रियंका वाड्रा और राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि है कि कोटा में फंसे बच्चों को यूपी बॉर्डर तक छोड़ने का किराया 36 लाख रुपये वसूल रहे हैं और दूसरी तरफ संवेदना दिखाते हैं कि हमने बच्चों को यूपी बॉर्डर तक भेजा है। ऐसी दोहरी मानसिकता कांग्रेस को शोभा नहीं देती है। राजस्थान सरकार के डिप्टी सीएम सचिन पायलट के सवालों का जवाब देते हुए शुक्रवार को डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि कोटा से बच्चों को वापस लाने के लिए राजस्थान सरकार ने बसों के लिए डीजल उपलब्ध करवाया था, जिसके एवज में उन्हें 5 मई को ही 19 लाख रुपये का भुगतान करवा दिया गया था। उन्होंने आगे बताया कि फंसे प्रतियोगी बच्चों को यूपी वापस लाने के लिए हमने 560 बसें भेजी थी। हमारा अनुमान था कि वहां 10 से 12 हजार बच्चे होंगे, लेकिन वहां अनुमान से अधिक बच्चे थे, जिसके चलते राजस्थान सरकार से बसें ली गईं, जिसका डीजल का भुगतान तत्काल किया गया। राजस्थान सरकार ने 94 बसों के किराया के लिए रिमांडर भेजा। कोरोना की लड़ाई में कांग्रेस राजनीति कर रही है।
बीजेपी नेता मांगे माफी- राजस्थान परिवहन मंत्री
इस प्रेसवार्ता के दौरान राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी यूपी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्विट करके इसकी जानकारी दी और उसके बाद ही बसों को रवाना किया गया, लेकिन यूपी सरकार ने ओछी राजनीति दिखाई और प्रियंका गांधी पर भी निशाना साधा, जो गलत है। कोटा में बसें भेजी गई उनको रोका नहीं गया। उस समय हमने परमिट का हवाला नहीं दिया। बसों की जांच को लेकर छूट दी गई। बीजेपी नेताओं को इस पूरे मामले पर माफी मांगनी चाहिए।
बसों पर राजनीति करना ठीक नहीं- सचिन पायलट
राजस्थान डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी मजदूरों के लिए बसें और खाने का इंतजाम कर रही है, तो अन्य सरकारों को इसका स्वागत करना चाहिए। बॉर्डर पर बसों को परमिशन न देना, नेताओं को गिरफ्तार करना और राजनीति करना कहां तक ठीक है। उन्होंने आगे कहा कि मदद लेने से कोई छोटा नहीं हो जाता। यूपी सरकार का जो रवैया रहा है, उसकी भर्त्सना करते हैं। उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा की श्रमिकों के लिए बसें एआईसीसी और प्रदेश कांग्रेस की ओर से भेजी गई थी और इससे सरकार का कोई लेना देना नहीं है।
पैसे की मांग सरकार की कंगाली व अमानवीयता को प्रदर्शित करता है- मायावती
बसपा प्रमुख ने ट्वीट कर कहा कि राजस्थान की कांग्रेसी सरकार द्वारा कोटा से करीब 12000 युवा-युवतियों को वापस उनके घर भेजने पर हुए खर्च के रूप में यूपी सरकार से 36.36 लाख रुपए और देने की जो माँग की है वह उसकी कंगाली व अमानवीयता को प्रदर्शित करता है। दो पड़ोसी राज्यों के बीच ऐसी घिनौनी राजनीति अति-दुखःद। लेकिन कांग्रेसी राजस्थान सरकार एक तरफ कोटा से यूपी के छात्रों को अपनी कुछ बसों से वापस भेजने के लिए मनमाना किराया वसूल रही है तो दूसरी तरफ अब प्रवासी मजदूरों को यूपी में उनके घर भेजने के लिए बसों की बात करके जो राजनीतिक खेल खेल कर रही है यह कितना उचित व कितना मानवीय?