
Lucknow Coaching Fire Tragedy: 15 Students Dead, Safety Lapses Under Investigation: राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार की शाम हुआ भीषण अग्निकांड पूरे प्रदेश को झकझोर गया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों से भरी एक लाइब्रेरी और कोचिंग परिसर में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया।
धुएं और आग की लपटों में फंसे छात्र अपनी जान बचाने के लिए चीखते रहे, कोई खिड़की की ओर भागा तो कोई बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरने की कोशिश करता दिखाई दिया। लेकिन कई छात्रों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला और देखते ही देखते 15 जिंदगियां हमेशा के लिए बुझ गईं।
इस हृदयविदारक हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर उस समय सामने आई जब एक छात्र ने अपने पिता को फोन कर रोते हुए कहा, "पापा, आग लग गई है... मुझे बचा लो।" लेकिन कुछ ही मिनटों बाद फोन की घंटी हमेशा के लिए खामोश हो गई। यह शब्द अब पूरे शहर के दिलों में गूंज रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम के समय लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर में सैकड़ों छात्र पढ़ाई कर रहे थे। अचानक इमारत से धुआं उठना शुरू हुआ और कुछ ही देर में आग ने पूरी मंजिल को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि छात्रों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय ही नहीं मिल सका।
कुछ छात्रों ने खिड़कियों से कूदकर अपनी जान बचाई, जबकि कई छात्र बिजली के तारों और पाइप के सहारे नीचे उतरने की कोशिश करते रहे। आसपास के लोगों ने भी जान जोखिम में डालकर कई छात्रों को बाहर निकाला, लेकिन धुएं और आग की तीव्रता के सामने बचाव के प्रयास सीमित पड़ गए।\घटनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि कई छात्र मदद के लिए लगातार चिल्ला रहे थे। कुछ अपने परिजनों को फोन कर आखिरी बार बात कर रहे थे, तो कुछ भगवान का नाम लेकर बचने की गुहार लगा रहे थे।
इस दर्दनाक हादसे में अब तक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मृतकों में सागर, नीलेश, सूरज शाह, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, सुखमनी, अनामिका, संयम, भविष्य, भाहजान, मोहम्मद अम्मार, सुमल्या, अनुच्छा, अब्दुल रहमान और जयनिल चक्रवर्ती सहित अन्य छात्र शामिल हैं।
इसके अलावा नौ से अधिक छात्र गंभीर रूप से झुलस गए हैं और विभिन्न अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है। घायलों में जयंत, लवप्रीत, आसिफ, पंकज, भुवन श्रीवास्तव, शैलेंद्र, अभिषेक, पंकज जोशी और गौरव कुमार शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार कई घायलों की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
हादसे के बाद अस्पतालों और घटनास्थल पर जो दृश्य देखने को मिले, उन्हें शब्दों में बयां करना मुश्किल है। कोई अपने बेटे का नाम लेकर रो रहा था तो कोई बेटी की एक झलक पाने के लिए अस्पताल के बाहर घंटों खड़ा रहा। एक पिता बार-बार यही कहते रहे, "मेरा बेटा कह रहा था कि पापा बचा लो… मैं पहुंच नहीं पाया।"
एक मां अपने बेटे की तस्वीर हाथ में लिए बेहोश हो गई। कई परिवारों की उम्मीदें एक ही पल में खत्म हो गईं। जिन बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए माता-पिता ने गांव और छोटे शहरों से लखनऊ भेजा था, उनकी अर्थियां अब उन्हीं घरों में पहुंचेंगी।
इस हादसे के बाद इमारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि भवन में फायर एनओसी नहीं थी या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था। बताया जा रहा है कि इमारत में बाहर निकलने के लिए केवल एक ही रास्ता था, जिससे आग लगने के बाद भगदड़ की स्थिति बन गई।
इसके अलावा, जिस भवन में लाइब्रेरी और कोचिंग संचालित हो रही थी, उसी परिसर में पेट शॉप और क्लिनिक भी चल रहे थे। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भवन की क्षमता से अधिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं और क्या प्रशासन ने समय रहते सुरक्षा मानकों की जांच की थी।
घटना की सूचना मिलते ही भारत सरकार के रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद Rajnath Singh ने अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम तत्काल स्थगित कर दिए और रात 9:35 बजे लखनऊ पहुंचे।
एयरपोर्ट से सीधे घटनास्थल पर पहुंचकर उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी प्राप्त की। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। मैं मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं और यदि किसी की जिम्मेदारी बनती है तो उसे तय किया जाएगा तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।" इसके बाद रक्षा मंत्री ने किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और चिकित्सकों को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
राज्य सरकार ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि आग लगने की असली वजह क्या थी और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई। अधिकारियों का कहना है कि यदि फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही शहर के अन्य कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरियों की भी सुरक्षा जांच कराए जाने की संभावना है।
लखनऊ का यह अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों के सपनों के टूटने की कहानी बन गया है। जो छात्र प्रशासनिक अधिकारी, इंजीनियर, शिक्षक और देश का भविष्य बनने का सपना लेकर लखनऊ आए थे, उनमें से कई अब इस दुनिया में नहीं रहे।
घटनास्थल पर बिखरी किताबें, जले हुए बैग, पिघले हुए मोबाइल फोन और धुएं से काली पड़ी दीवारें इस बात की गवाही दे रही हैं कि आग ने केवल एक इमारत को नहीं, बल्कि कई परिवारों की उम्मीदों को भी राख कर दिया।
आज पूरा लखनऊ शोक में डूबा है। हर किसी के मन में एक ही सवाल है-अगर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होते, अगर समय रहते आग पर काबू पा लिया जाता, अगर बाहर निकलने के पर्याप्त रास्ते होते, तो क्या इन 18 जिंदगियों को बचाया जा सकता था? इन सवालों के जवाब जांच में मिलेंगे, लेकिन उन परिवारों के आंसू शायद कभी नहीं सूखेंगे, जिनके घरों के चिराग इस अग्निकांड में हमेशा के लिए बुझ गए।