
Lucknow Fire Tragedy: CM Yogi Forms SIT, Seeks Report in Seven Days After 15: राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर और लाइब्रेरी में लगी भीषण आग में अब तक 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं और विभिन्न अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इस दर्दनाक हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। मुख्यमंत्री ने एसआईटी को सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात अपने सरकारी आवास पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में अग्निकांड की परिस्थितियों, राहत एवं बचाव कार्यों, घायलों के उपचार और प्रशासनिक जवाबदेही पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि घटना के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच की जाए। उन्होंने कहा कि इस हादसे में यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। बैठक के बाद सरकार ने दो सदस्यीय एसआईटी के गठन का ऐलान किया। इस जांच दल में अपर मुख्य सचिव (पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति विभाग) अमृत अभिजात और अपर पुलिस महानिदेशक (लखनऊ जोन) प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री ने एसआईटी को निर्देश दिए हैं कि वह सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपे। जांच रिपोर्ट में आग लगने के वास्तविक कारण, भवन की सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका का विस्तृत विवरण शामिल होगा। सरकारी सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर संस्थान संचालकों, भवन मालिकों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ बड़ा प्रशासनिक और कानूनी एक्शन लिया जा सकता है।
हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली और आग बुझाने के अभियान की समीक्षा की।
घटनास्थल पर मुख्यमंत्री ने मीडिया से कहा कि यह अत्यंत दुखद और पीड़ादायक घटना है। सरकार प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) पहुंचे, जहां उन्होंने घायलों का हालचाल जाना और चिकित्सकों को बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
प्रदेश सरकार ने मृतकों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता का भी ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सहायता राशि जल्द से जल्द पीड़ित परिवारों तक पहुंचाई जाए और किसी भी प्रकार की प्रशासनिक देरी न हो।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की है।
इस हादसे के बाद भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि भवन में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। आपातकालीन निकास की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग लगने के बाद धुआं इतनी तेजी से फैला कि लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। कई लोगों ने खिड़कियों और संकरे रास्तों के जरिए जान बचाने की कोशिश की, लेकिन कई लोग आग और धुएं की चपेट में आ गए। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि भवन में अग्नि सुरक्षा संबंधी उपकरण मौजूद थे या नहीं और यदि थे तो उनका इस्तेमाल क्यों नहीं हो सका।
गठित एसआईटी केवल आग लगने के कारणों की ही जांच नहीं करेगी, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि संबंधित विभागों ने भवन का निरीक्षण कब और कैसे किया था। यदि भवन में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हो रहा था तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
जांच दल यह भी देखेगा कि भवन को संचालन की अनुमति किन परिस्थितियों में मिली और क्या विभिन्न विभागों की ओर से आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किए गए थे या नहीं। सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।
इस बीच अलीगंज थाने में घटना को लेकर तहरीर दिए जाने के बाद मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। पुलिस विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, यदि जांच में किसी भी अधिकारी, संस्थान संचालक या भवन मालिक की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या समेत गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।
लखनऊ का यह अग्निकांड प्रदेश के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। जिन परिवारों ने अपने बच्चों और प्रियजनों को बेहतर भविष्य के सपनों के साथ इस संस्थान में भेजा था, उनके लिए यह हादसा कभी न भरने वाला जख्म बन गया है।
अस्पतालों के बाहर रोते-बिलखते परिजन, घटनास्थल पर बिखरा सामान और जली हुई इमारत इस बात की गवाही दे रही है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कई परिवारों की उम्मीदों के टूटने की कहानी है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें सात दिन बाद आने वाली एसआईटी रिपोर्ट पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि जांच रिपोर्ट से इस भीषण त्रासदी के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार लोगों का खुलासा होगा और दोषियों को उनके किए की सजा मिलेगी।