
Lucknow Fire Tragedy: Four Officials Suspended, Building Owner Among Three Arrested: राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित कॉम्प्लेक्स में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं और विभिन्न अस्पतालों में उनका उपचार चल रहा है। घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश देते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि पुलिस ने बिल्डिंग मालिक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
अग्निकांड की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि इस हादसे के लिए जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया। इनमें जानकीपुरम क्षेत्र के अधिशासी अभियंता (XEN) गौरव कुमार, इंदिरा नगर के फायर सेफ्टी ऑफिसर (FSSO) कमलेन्द्र कुमार सिंह, सहायक अभियंता (AE) अनिल कुमार और जूनियर इंजीनियर (JE) प्रमोद पांडे शामिल हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में भवन की सुरक्षा व्यवस्था और निरीक्षण प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आई है। इसी के आधार पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।
हादसे के बाद यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी इमारत में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि भवन में आग से बचाव के लिए जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था। इमारत में आपातकालीन निकास की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी और फायर सुरक्षा उपकरण भी पर्याप्त संख्या में मौजूद नहीं थे।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग लगने के बाद धुआं इतनी तेजी से फैला कि लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला। कई लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों और बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरने की कोशिश करते दिखाई दिए, लेकिन कई लोगों की जिंदगी आग की लपटों में ही खत्म हो गई।
घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी बिल्डिंग मालिक रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुषार कृष्ण जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में इनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है और भवन संचालन में गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं।
अलीगंज थाना पुलिस ने तीनों आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
इस भीषण अग्निकांड में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। हालांकि कई घायल अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कुछ घायलों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है, ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अस्पतालों में भर्ती घायलों के परिजन लगातार अपने प्रियजनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। वहीं जिन परिवारों ने अपने बच्चों और परिजनों को खो दिया है, उनके घरों में मातम पसरा हुआ है।
जिस कॉम्प्लेक्स में कुछ घंटे पहले तक लोगों की आवाजाही और चहल-पहल थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। जली हुई दीवारें, टूटे हुए शीशे, बिखरे बैग और राख में तब्दील सामान इस दर्दनाक हादसे की भयावह कहानी बयां कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा मानकों की जांच की जाती और आवश्यक इंतजाम किए जाते तो शायद इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती।
प्रदेश सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। शासन स्तर पर गठित टीम यह पता लगाएगी कि आग लगने की वास्तविक वजह क्या थी, भवन में सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया और प्रशासनिक स्तर पर कहां चूक हुई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के अन्य कोचिंग सेंटरों, लाइब्रेरियों और व्यावसायिक भवनों की भी फायर सेफ्टी जांच कराई जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।