
LDA Seeks Urban Challenge Lucknow: राजधानी लखनऊ के सुनियोजित और आधुनिक विकास को नई गति देने की दिशा में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकारके आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) के माध्यम से शहर की पांच महत्वपूर्ण परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दिलाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने दिल्ली से आई यूसीएफ की विशेषज्ञ टीम के साथ विस्तृत बैठक कर इन परियोजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया और उन्हें शीघ्र धरातल पर उतारने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में शहर के भविष्य से जुड़ी उन परियोजनाओं पर विशेष मंथन हुआ, जो न केवल यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएंगी, बल्कि आवास, शिक्षा, पार्किंग और शहरी आधारभूत संरचना को भी नई दिशा देंगी। एलडीए ने इन सभी योजनाओं के लिए अर्बन चैलेंज फंड से वित्तीय अनुदान का अनुरोध किया है।
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक संचालित की जा रही अर्बन चैलेंज फंड योजना का उद्देश्य देश के तेजी से विकसित हो रहे शहरों में आधुनिक और टिकाऊ शहरी परियोजनाओं को वित्तीय सहयोग प्रदान करना है। इस योजना के तहत किसी भी स्वीकृत परियोजना की कुल लागत का 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सहयोग उपलब्ध कराया जाता है, जिससे स्थानीय विकास प्राधिकरणों और नगर निकायों पर आर्थिक बोझ कम हो सके।
इसी योजना का लाभ उठाने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने राजधानी की पांच प्रमुख परियोजनाओं को यूसीएफ के समक्ष प्रस्तुत किया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि इन परियोजनाओं को समय पर वित्तीय सहायता मिल जाती है तो आने वाले वर्षों में लखनऊ की शहरी तस्वीर काफी हद तक बदल जाएगी।
बैठक में सबसे अधिक चर्चा LDA की महत्वाकांक्षी वरुण विहार आवासीय योजना को लेकर हुई। इस परियोजना के प्रथम चरण में लगभग एक हजार करोड़ रुपये की लागत से आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाना प्रस्तावित है। इसमें आधुनिक सड़कें, सीवरेज नेटवर्क, पेयजल व्यवस्था, हरित क्षेत्र, विद्युत व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
एलडीए ने इस परियोजना के लिए कुल लागत का 25 प्रतिशत वित्तीय सहयोग यूसीएफ से मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय सहायता मिलने के बाद इस परियोजना का कार्य तेजी से शुरू किया जाएगा और राजधानी को एक नया आधुनिक आवासीय क्षेत्र मिलेगा।
राजधानी में लगातार बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए एलडीए ने 1090 चौराहे से बैकुंठ धाम होते हुए लामार्टीनियर ग्राउंड तक लगभग 2.3 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का प्रस्ताव भी यूसीएफ के समक्ष रखा है। करीब 330 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना शहर की सबसे महत्वपूर्ण यातायात योजनाओं में शामिल मानी जा रही है। इस फ्लाईओवर के बनने से गोमती नगर, हजरतगंज, निशातगंज और आसपास के क्षेत्रों में लगने वाले जाम से काफी राहत मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना का सीधा लाभ लगभग 10 लाख शहरी आबादी को मिलेगा।
बैठक में शहर की पार्किंग समस्या को दूर करने के उद्देश्य से पत्रकारपुरम क्षेत्र में प्रस्तावित मल्टीलेवल पार्किंग परियोजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस पार्किंग से गोमती नगर और आसपास के व्यावसायिक क्षेत्रों में वाहन पार्किंग की समस्या काफी हद तक समाप्त होने की संभावना है।
शहर में लगातार बढ़ते निजी वाहनों के कारण पार्किंग एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। ऐसे में आधुनिक मल्टीलेवल पार्किंग सुविधा विकसित होने से यातायात व्यवस्था भी अधिक सुगम होगी।
LDA ने हनुमान सेतु के निकट लगभग 2,592 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बहुमंजिला आधुनिक लाइब्रेरी के निर्माण का प्रस्ताव भी यूसीएफ के समक्ष रखा है। इस परियोजना पर लगभग 58.78 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
लखनऊ विश्वविद्यालय और आसपास स्थित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के हजारों छात्र-छात्राओं को इस लाइब्रेरी का सीधा लाभ मिलेगा। आधुनिक तकनीक से सुसज्जित इस लाइब्रेरी में डिजिटल अध्ययन सुविधाएं, ई-लाइब्रेरी, शोध कक्ष, रीडिंग हॉल और अन्य आधुनिक संसाधन विकसित किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी में इस प्रकार की अत्याधुनिक सार्वजनिक लाइब्रेरी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए एक बड़ी सौगात साबित होगी।
बैठक में कैलाश कुंज कॉम्पलेक्स के पुनर्विकास (री-डेवलपमेंट) की योजना भी प्रमुख रूप से शामिल रही। लगभग 195 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के माध्यम से पुराने कॉम्पलेक्स को आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा। पुनर्विकास के बाद यहां बेहतर नागरिक सुविधाएं, आधुनिक भवन, सुव्यवस्थित सार्वजनिक स्थान और उन्नत आधारभूत ढांचा विकसित किया जाएगा। एलडीए ने इस परियोजना के लिए भी यूसीएफ से वित्तीय सहायता का अनुरोध किया है।
LDA मुख्यालय स्थित पारिजात सभागार में आयोजित बैठक के दौरान सभी परियोजनाओं का तकनीकी और वित्तीय प्रस्तुतीकरण विशेषज्ञ टीम के समक्ष किया गया। यूसीएफ की टीम ने प्रत्येक परियोजना की व्यवहार्यता, वित्तीय संरचना, सामाजिक प्रभाव और दीर्घकालिक उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समय-सीमा, संभावित चुनौतियों और वित्तीय मॉडल पर भी विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने कई तकनीकी सुझाव भी दिए, जिनके आधार पर परियोजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
लखनऊ विकास प्राधिकरण का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राजधानी की आधारभूत संरचना पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी। बेहतर सड़क नेटवर्क, आधुनिक आवासीय क्षेत्र, सुगम यातायात, पर्याप्त पार्किंग और उच्च स्तरीय शैक्षणिक सुविधाएं लखनऊ को देश के अग्रणी स्मार्ट शहरों की श्रेणी में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बैठक के दौरान कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि ऐसी शहरी परियोजनाओं का विकास करना है जो आने वाले कई दशकों तक नागरिकों की जरूरतों को पूरा कर सकें। उन्होंने विश्वास जताया कि यूसीएफ से वित्तीय सहयोग मिलने के बाद इन योजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारा जाएगा।