
UP Rain: उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। लखनऊ में सुबह से हुई झमाझम बारिश के चलते कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। जानकीपुरम, जानकीपुरम विस्तार, अलीगंज और सिविल हॉस्पिटल मार्ग समेत कई स्थानों पर सड़कों पर पानी भर गया। कुछ इलाकों में करीब एक घंटे की बारिश के बाद ही घुटनों तक पानी पहुंच गया। वहीं प्रदेश में बारिश से हुई जनहानि, पशु हानि और आर्थिक नुकसान को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड में उतरकर प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर प्रदेश में अगले चार दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश में 19 अगस्त तक बारिश का दौर बने रहने का अनुमान है। लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन और स्थानीय निकायों को जलभराव वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भी बारिश के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मुरादाबाद, रामपुर, बहराइच और पीलीभीत में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा लखीमपुर, सीतापुर, बहराइच और श्रावस्ती में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। वहीं सहारनपुर, बिजनौर, संभल, बदायूं और शाहजहांपुर समेत कई जिलों में येलो अलर्ट जारी है। हरदोई, बांदा, फतेहपुर, चित्रकूट और कुशीनगर में भी मौसम को लेकर सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।
राजधानी में रविवार सुबह से हुई तेज बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी। बारिश के बाद कई प्रमुख मार्गों और रिहायशी इलाकों में पानी भर गया। जानकीपुरम में सड़क पर पानी डिवाइडर के बराबर तक पहुंच गया। जानकीपुरम विस्तार में भी नालों की सफाई को लेकर सवाल खड़े हुए। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब एक घंटे की बारिश में ही कई सड़कों पर घुटनों तक पानी जमा हो गया।
जलभराव के कारण लोगों को घरों से निकलने और अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई। पैदल चलने वालों के साथ दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई जगह सड़क और नाली के बीच का अंतर पानी भरने के कारण दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे में दुर्घटना की आशंका भी बनी रही।
अलीगंज स्थित लोक सेवा आयोग के कंपाउंड में भी बारिश का पानी भर गया। परिसर के आसपास और मार्गों पर जलभराव के कारण आवागमन प्रभावित हुआ। बारिश के दौरान पानी की निकासी पर्याप्त गति से नहीं होने के कारण सड़क पर पानी जमा होता चला गया। लोगों का कहना है कि मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन तेज बारिश के दौरान स्थिति इसके विपरीत नजर आती है।
राजधानी में जलभराव की समस्या हर वर्ष मानसून के दौरान सामने आती है। बारिश से पहले नाला सफाई, सिल्ट हटाने और जल निकासी व्यवस्था को लेकर तैयारियों की बात कही जाती है। इसके बावजूद कुछ ही घंटों की तेज बारिश में शहर के कई हिस्सों में पानी भरने से इन तैयारियों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
देर रात से जारी बारिश के कारण सिविल हॉस्पिटल मार्ग पर भी पानी भर गया। अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों और तीमारदारों को जलभराव के बीच आवागमन करना पड़ा। सड़क पर पानी जमा होने के कारण वाहन धीमी गति से चलते नजर आए। वहीं पैदल राहगीरों को भी पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा।
शहर के कई अन्य इलाकों में भी नाला-नालियों के चोक होने की शिकायत सामने आई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नालियों की सफाई नियमित रूप से नहीं होने के कारण बारिश का पानी तेजी से निकल नहीं पाया। इससे कुछ ही समय में सड़कें जलमग्न हो गईं और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रदेश में बारिश के कारण सामने आ रही जनहानि, पशु हानि और आर्थिक नुकसान की घटनाओं को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड में निकलकर प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने और प्रभावित परिवारों से संवाद स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि बारिश से प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए और राहत कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
मुख्यमंत्री ने अति वर्षा और आकाशीय बिजली से हुई जनहानि, पशु हानि तथा आर्थिक नुकसान का आकलन कराने के निर्देश भी दिए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि नुकसान का आकलन समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए और पात्र प्रभावित परिवारों को नियमानुसार 24 घंटे के भीतर मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। प्रशासनिक स्तर पर प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी और राहत व्यवस्था को सक्रिय रखने पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में जाकर वास्तविक स्थिति का जायजा लें। प्रभावित परिवारों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को समझने और उन्हें तत्काल आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जाए। बारिश के कारण जिन परिवारों को किसी भी प्रकार का नुकसान हुआ है, उनके मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश में लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर जलभराव और जल निकासी की समस्या से निपटना है, वहीं दूसरी ओर अतिवृष्टि, आकाशीय बिजली और नदी-जलाशयों के बढ़ते जलस्तर से संभावित खतरे को रोकना है। ऐसे में जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने की जरूरत है।
आकाशीय बिजली से बचाव को लेकर अपील
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि आकाशीय बिजली के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। बारिश और बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान, पेड़ के नीचे या अन्य असुरक्षित स्थानों पर खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। प्रशासन की ओर से भी लोगों से मौसम की स्थिति पर नज़र रखने और आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने अतिवृष्टि के समय नदियों और जलाशयों में स्नान करते हुए विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। बारिश के दौरान नदियों, तालाबों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में उत्साह या लापरवाही भारी पड़ सकती है। लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने को कहा गया है।
मौसम विभाग की ओर से 19 अगस्त तक बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में जलभराव की स्थिति और गंभीर हो सकती है। खासकर निचले इलाकों, जलभराव वाले मार्गों और नदियों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
लखनऊ में रविवार की बारिश ने जहां मौसम को ठंडा कर दिया, वहीं जलभराव ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। जानकीपुरम से लेकर अलीगंज और सिविल हॉस्पिटल मार्ग तक पानी जमा होने से नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े हुए हैं। अब आने वाले दिनों में प्रशासन के सामने चुनौती यह होगी कि लगातार बारिश के बीच जलनिकासी व्यवस्था को प्रभावी रखा जाए और किसी भी आपदा की स्थिति में प्रभावित लोगों तक समय पर राहत पहुंचाई जाए। मुख्यमंत्री के 24 घंटे में मुआवजे के निर्देश के बाद अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और राहत व्यवस्था पर टिकी हैं।