
Maulana Khalid Rasheed Statement: उत्तर प्रदेश की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने दो बड़े बयान दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि मेडिकल कॉलेजों में धर्म से जुड़े विवादों को खड़ा करना बिल्कुल गलत है, वहां सिर्फ पढ़ाई और इलाज होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के उस फैसले की तारीफ की है, जिसमें मदरसों के शिक्षकों के लिए बायोमेट्रिक (डिजिटल) हाजिरी को जरूरी कर दिया गया है।
आजकल कई मेडिकल कॉलेजों में धर्म से जुड़े मुद्दों पर विवाद हो रहे हैं। इस पर चिंता जताते हुए मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि यह बहुत ही दुखद बात है। मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों का पूरा ध्यान सिर्फ दो ही बातों पर होना चाहिए। पहला, मरीजों का अच्छे से इलाज करना और दूसरा, वहां पढ़ रहे छात्रों को डॉक्टर बनने की बेहतरीन शिक्षा और ट्रेनिंग देना।
एक तरफ जहां मौलाना ने मेडिकल कॉलेजों के विवाद पर नाराजगी जताई, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने योगी सरकार के एक फैसले का खुलकर समर्थन किया है। यूपी सरकार ने मदरसों में शिक्षकों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस (डिजिटल हाजिरी) को अनिवार्य कर दिया है, जिसे मौलाना ने एक सकारात्मक और जरूरी कदम बताया है।
मौलाना फरंगी महली के अनुसार, इस नए नियम के लागू होने से मदरसों के पूरे माहौल और शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। डिजिटल हाजिरी की वजह से सभी शिक्षकों की समय पर उपस्थिति पूरी तरह सुनिश्चित हो सकेगी। जब शिक्षक समय के पाबंद होंगे, तो मदरसों में कक्षाएं भी सही समय पर शुरू होंगी और समय पर ही समाप्त होंगी।
मदरसा शिक्षा बोर्ड की रजिस्ट्रार ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों (DMO) को भेजे गए निर्देश में कहा है कि प्रदेश सरकार ने 23 मई को सभी मदरसों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने का आदेश जारी किया था। हालांकि, अभी तक कई मदरसों में इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।
निर्देश में डीएमओ को कहा गया है कि जिन मदरसों में अभी तक बायोमेट्रिक मशीनें नहीं लगी हैं, वहां उनकी देखरेख में जल्द से जल्द यह व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए।