
BSP Chief Mayawati: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बेरोजगारी पेपर लीक और निजीकरण जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधा है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर युवाओं के ऐतिहासिक आंदोलन के कारण ही शिक्षा मंत्री को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है। उन्होंने सख्त लहजे में मांग की है कि सरकारें राष्ट्रीय संपत्तियों का निजीकरण तत्काल प्रभाव से रोकें और खाली पड़े लाखों सरकारी पदों पर बिना किसी भ्रष्टाचार के भर्तियां शुरू करें ताकि हर परिवार को कम से कम एक सरकारी नौकरी मिल सके।
मायावती ने उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार के कामों का जिक्र करते हुए कहा कि यह बात सर्वविदित है कि बसपा ने अपने शासनकाल में पुलिस और पंचायती राज विभागों में लगभग 2 लाख नए सरकारी पद सृजित किए थे। उस दौरान नौकरियों पर लगी रोक को हटाकर समाज के सभी वर्गों के लाखों लोगों को सरकारी नौकरियां दी गई थीं। सत्ता से बाहर रहने के बावजूद बसपा लगातार महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, महिलाओं की असुरक्षा और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर आवाज उठाती रही है। लेकिन बेहद दुख की बात है कि पिछली कांग्रेस सरकारों की तरह ही मौजूदा सरकारें भी इन समस्याओं के प्रति पूरी तरह लापरवाह बनी हुई हैं।
बसपा सुप्रीमो ने CJP और शिक्षित बेरोजगार युवाओं के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले इनके व्यापक आंदोलन ने बेरोजगारी और युवाओं के अंधकारमय भविष्य को राष्ट्रीय स्तर की चर्चा का विषय बना दिया है। इसी कड़े विरोध का नतीजा है कि देश के शिक्षा मंत्री को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें बाकी सब कुछ भुलाकर देश के 125 करोड़ गरीबों, मजदूरों और खासकर बेरोजगारी की मार झेल रहे लाखों परिवारों के लिए गंभीरता से काम करें।
सरकारी नौकरियों पर विशेष जोर देते हुए मायावती ने कहा कि राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी हाथों में बेचना तुरंत बंद किया जाना चाहिए। सभी सरकारी विभागों में खाली पड़े लाखों पदों के लिए समयबद्ध और भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती प्रक्रिया शुरू करना ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि एक परिवार में एक व्यक्ति को भी सरकारी नौकरी मिल जाती है तो इससे लाखों परिवारों का सीधा भला होगा।
मायावती ने कहा कि सरकारी नौकरियों से अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के समुदायों को भी वह सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी जिसके वे हकदार हैं। वर्तमान में आरक्षण व्यवस्था के काफी हद तक अप्रभावी और निष्क्रिय हो जाने के कारण ये वर्ग संविधान द्वारा दिए गए आत्मसम्मान के जीवन के बजाय गरीबी और बेबसी का जीवन जीने को मजबूर हैं।
मायावती ने सरकारों को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें व्यापारिक और मुनाफा कमाने वाली मानसिकता को छोड़कर संविधान की सच्ची कल्याणकारी नीतियों को लागू करना चाहिए। हर हाथ को रोजगार देना ही देश की लाखों समस्याओं का अचूक इलाज है। इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं द्वारा उठाए गए मुद्दों को लेकर संसद के वर्तमान सत्र में जारी गतिरोध को जल्द खत्म किया जाना चाहिए ताकि कोई भी सरकारी विधेयक बिना उचित बहस और चर्चा के कानून न बन सके।