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लखनऊ में ‘पंचवटी’ का भव्य मंचन, रामायण के भावपूर्ण प्रसंगों ने दर्शकों का मन मोहा

Panchvati Drama Staged in Lucknow: लखनऊ के राय उमानाथ बलि प्रेक्षागृह में ‘पंचवटी’ नाटक का भावपूर्ण मंचन हुआ। कलाकारों के जीवंत अभिनय, संगीत और मंच सज्जा ने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभव कराया।
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लखनऊ

•

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Ritesh Singh

•

Sep 28, 2026

कलाकारों के जीवंत अभिनय, संगीत, प्रकाश और मंच सज्जा ने बांधा समां; दर्शकों को भक्ति, त्याग और मर्यादा का संदेश (फोटो सोर्स : Ritesh Singh)

कलाकारों के जीवंत अभिनय, संगीत, प्रकाश और मंच सज्जा ने बांधा समां; दर्शकों को भक्ति, त्याग और मर्यादा का संदेश (फोटो सोर्स : Ritesh Singh)

Panchvati Drama: भक्ति, त्याग, सेवा, कर्तव्य और मर्यादा के भावों से सजी नाट्य प्रस्तुति ‘पंचवटी’ ने राजधानी लखनऊ के राय उमानाथ बलि प्रेक्षागृह में दर्शकों को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभूति से सराबोर कर दिया। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, कैसरबाग स्थित राय उमानाथ बलि प्रेक्षागृह में आयोजित इस नाटक में रामायण के वनवास काल से जुड़े मार्मिक प्रसंगों को रंगमंच की भाषा में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के सशक्त अभिनय और मंच के तकनीकी पक्षों के बेहतर समन्वय ने प्रस्तुति को यादगार बना दिया।

यह आयोजन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के संस्कृति विभाग के वेतन अनुदान वर्ष 2026-27 के अंतर्गत भारतीय नारी सम्मान एवं बाल विकास संस्थान के 25वें स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित किया गया। नाटक ‘पंचवटी’ को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे। प्रस्तुति के दौरान सभागार में कई ऐसे दृश्य आए, जब दर्शक भावनाओं से जुड़ते नजर आए और कलाकारों के अभिनय की सराहना तालियों के साथ की।

वनवास काल की कथा रंगमंच पर साकार

महाकवि तुलसीदास की रामकथा पर आधारित ‘पंचवटी’ का नाट्यलेखन और निर्देशन मुकेश वर्मा ने किया। नाटक में भगवान श्रीराम के वनवास काल के प्रसंगों को केंद्र में रखते हुए जीवन के उन मूल्यों को सामने लाने का प्रयास किया गया, जो आज के समय में भी प्रासंगिक हैं।

नाटक की कथा में भौतिक संसाधनों से दूर वनवास का जीवन जीते भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के माध्यम से त्याग, सेवा, कर्तव्य, सादगी और मर्यादा के आदर्शों को रेखांकित किया गया। प्रस्तुति का संदेश यही रहा कि जीवन की परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, व्यक्ति अपने आदर्शों और मूल्यों को बनाए रखते हुए समाज के सामने उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है।

पांच कुटियों का आध्यात्मिक महत्व

‘पंचवटी’ के मंचन में चित्रकूट और पंचवटी की पांच कुटियों के आध्यात्मिक महत्व को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया। वनवास के प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श आचरण, माता सीता की सादगी, धैर्य और समर्पण तथा लक्ष्मण की अनन्य भ्रातृ-सेवा को कलाकारों ने भावपूर्ण अभिनय से जीवंत किया। नाटक के संवादों में जहां कथा का भावनात्मक पक्ष दिखाई दिया, वहीं संगीत और प्रकाश व्यवस्था ने दृश्यों की प्रभावशीलता को और बढ़ाया। वन के वातावरण को मंच पर साकार करने के लिए सेट, प्रकाश, वेशभूषा और मंच सामग्री का उपयोग किया गया। इससे दर्शकों को ऐसा अनुभव हुआ मानो रामायण का वनवास काल मंच पर उनके सामने जीवंत हो उठा हो।

कलाकारों ने छोड़ी अमिट छाप

कार्यक्रम की शुरुआत तान्या वर्मा की उद्घोषणा से हुई। स्वागताध्यक्ष नवाब मसूद अब्दुल्लाह ने अतिथियों और दर्शकों का स्वागत किया। इसके बाद कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को कथा के साथ जोड़ लिया। भगवान श्रीराम की भूमिका में ऋषभ पाण्डेय ने अपने अभिनय से चरित्र की गंभीरता और मर्यादा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले शशांक पाण्डेय ने भाई के प्रति समर्पण और सेवा भाव को अभिनय में उकेरा।

सूर्पणखा की भूमिका में अनामिका सिंह ने अपनी भूमिका में प्रभाव छोड़ा, जबकि निद्रा और सीता की दोहरी भूमिका में प्रांजल शर्मा ने भावनात्मक दृश्यों को जीवंतता प्रदान की। कलाकारों के संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा और मंच पर उनकी उपस्थिति ने नाटक की गति को बनाए रखा। विशेष रूप से राम, सीता और लक्ष्मण के बीच के प्रसंगों में पारिवारिक संबंधों, त्याग और कर्तव्य की भावना को दर्शकों ने महसूस किया।

सम्मान समारोह ने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा

नाट्य प्रस्तुति के साथ ही कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली हस्तियों और आयोजन से जुड़े सहयोगियों को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, रंगमंचीय और जनसेवा के क्षेत्र से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही।

सम्मानित लोगों में अशोक कुमार गौड़ ‘पं. मंगलू पाधा’, सनातन संस्कृति के विद्वान, नवाब मसूद अब्दुल्लाह, वंशज खानदान-ए-शाही, शीशमहल, सेवानिवृत्त आईजी मोहम्मद हसनैन, पूर्व प्रधानाचार्य नरेन्द्र बाबू, मेराजुद्दीन सिद्दीकी, गनेश चौधरी, सुनील विश्वकर्मा, मुकेश वर्मा, संजय त्रिपाठी और महर्षि कपूर सहित अनेक लोग शामिल रहे। इसके अलावा तान्या वर्मा, अनुप कनौजिया, अजय कुमार कनौजिया, आकाश, विक्की, कमलेश कुमार यादव, दबीर सिद्दीकी, से. अली मीसम नकवी, राजकुमार गुप्ता, संगीता सिंह, राखी चौबे, कविता श्रीवास्तव, अनीता मौर्या तथा बौधमती विमला देवी को भी सम्मानित किया गया।

नेपथ्य टीम की मेहनत भी रही खास

किसी भी रंगमंचीय प्रस्तुति की सफलता केवल कलाकारों के अभिनय पर निर्भर नहीं होती। ‘पंचवटी’ की प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने में नेपथ्य टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राम आसरे ने प्रकाश व्यवस्था, रितेश सिंह ने वेशभूषा, मुकेश वर्मा ने संगीत, राज किशोर गुप्ता ने मुख सज्जा तथा ऐश्वर्या भारती ने मंच सामग्री एवं सेट सहायक की जिम्मेदारी संभाली। शकील ने सेट डिजाइन और आदर्श भारती ने प्रस्तुति नियंत्रण का दायित्व संभाला। मंच पर प्रकाश का सही इस्तेमाल, दृश्यों के अनुरूप संगीत और कलाकारों की वेशभूषा ने कथा को प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाई।

सांस्कृतिक आयोजन में दिखा सामाजिक संदेश

‘पंचवटी’ केवल रामायण के प्रसंगों की रंगमंचीय प्रस्तुति नहीं रही। नाटक ने दर्शकों के सामने यह सवाल भी रखा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच क्या व्यक्ति त्याग, सेवा, कर्तव्य, सादगी और मर्यादा जैसे मूल्यों को अपने जीवन में स्थान दे सकता है। भगवान श्रीराम के चरित्र के माध्यम से कर्तव्यनिष्ठा और मर्यादा, माता सीता के माध्यम से धैर्य और समर्पण तथा लक्ष्मण के चरित्र के माध्यम से सेवा और भ्रातृभाव को सामने रखा गया। इस तरह प्रस्तुति ने धार्मिक कथा के साथ-साथ पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों को भी दर्शकों तक पहुंचाया।

आयोजन में मौजूद रहे प्रमुख पदाधिकारीकार्यक्रम में भारतीय नारी सम्मान एवं बाल विकास संस्थान की महासचिव सभ्यता भारती, मुख्य संरक्षक से. मो. हसनैन तथा अध्यक्ष संजय कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों और अतिथियों ने नाट्य टीम का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने कलाकारों और पूरी टीम का तालियों से स्वागत किया। मंचन समाप्त होने के बाद भी दर्शकों में प्रस्तुति को लेकर चर्चा होती रही। कई दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय, निर्देशन और तकनीकी पक्ष की सराहना की।

दर्शकों को मिला आध्यात्मिक अनुभव

राय उमानाथ बलि प्रेक्षागृह में ‘पंचवटी’ का मंचन दर्शकों के लिए केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभव भी रहा। रामायण के परिचित प्रसंगों को रंगमंच की आधुनिक प्रस्तुति शैली के साथ जोड़कर कलाकारों ने कथा को नए ढंग से दर्शकों के सामने रखा। नाटक के समापन के साथ सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कलाकारों और नेपथ्य टीम ने दर्शकों का अभिवादन स्वीकार किया। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि रंगमंच आज भी भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बना हुआ है। ‘पंचवटी’ की सफल प्रस्तुति ने इसी सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लखनऊ के रंगमंच प्रेमियों के बीच अपनी अलग छाप छोड़ी।