
Uttar Pradesh News: बसपा प्रमुख मायावती ने सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बीएसपी के नीले रंग को अपनाने से इन दलों की सोच नहीं बदल जाएगी। मायावती ने कहा कि केवल नीला गमछा पहनने या मंच पर नीला कपड़ा लगाने से कोई दल बहुजन हितैषी या अंबेडकरवादी नहीं बन सकता। उन्होंने सपा के PDA को लेकर भी सवाल उठाए और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे 'डूबता जहाज' बताया। इसके साथ ही मायावती ने अपने समधी अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के मामले पर भी कई सवाल उठाए हैं।
मायावती ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि सपा, कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियों के नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा बी.एस.पी. का शुरु से ही चला आ रहा नीला रंग अब यह इनके गले का गमछा व कपड़े पहनने से तथा स्टेज आदि में भी नीला कपड़ा इस्तेमाल करने से इनकी सर्वसमाज में से ख़ासकर ग़रीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े व अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति सालों से चली आ रही इनकी जातिवादी, संकीर्ण, सामन्तवादी एवं पूंजीवादी सोच नहीं बदल सकती है तथा ना ही ये लोग दिल से अम्बेडकरवादी होने एवं कहलाने वाले हैं। इसीलिये बहुजन समाज के वास्तविक हित व कल्याण के प्रति पहले वे अपना दिल व दिमाग़ तो पाक-साफ करें।
मायावती ने कहा कि विपक्षी दल इन वर्गों के मुद्दों पर बार-बार अपना रंग बदलते हैं। वैसे भी ये लोग इन वर्गों के मामले में आए दिन गिरगिट की तरह ही रंग बदलते रहते हैं अर्थात् ये कहते कुछ हैं और करते उसके ठीक विपरीत हैं। खासकर इनके सपा के PDA के मामले में तो इनकी सोच, चाल, चरित्र व चेहरा आदि हमेशा दोग़ला व बईमान ही रहा है, जिसके अनेकों उदाहरण हैं, ये सभी जानते हैं। इसलिए इन वर्गों की एकमात्र हितैषी व अम्बेडकरवादी पार्टी केवल बी.एस.पी. ही है, जो सर्वविदित है।
मायावती ने कांग्रेस पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ऐसी छोटी पार्टियां बिना गठबंधन के चुनाव नहीं लड़ सकतीं और सरकार बनने पर उसमें शामिल हुए बिना भी नहीं रह सकतीं। उन्होंने कांग्रेस से जुड़े लोगों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिन लोगों को बीएसपी से निकाले जाने के बाद अपने साथ लेने की बात कर रही है, उसे पहले अपने बारे में भी सोचना चाहिए। मायावती ने कांग्रेस को डूबते जहाज की तरह बताया और कहा कि कोई व्यक्ति उसमें शामिल होकर अपना भविष्य अंधकार में क्यों डालेगा।
मायावती ने बीएसपी से निकाले गए नेताओं को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता आदि कारणों से पार्टी से निकाले गए कई लोग अब तक कई दल बदल चुके हैं। उन्होंने ऐसे नेताओं को स्वार्थी और अवसरवादी बताया। मायावती ने कहा कि इनमें से कुछ लोग दूसरी पार्टियों के सहारे छोटी पार्टियां और संगठन भी बना लेते हैं। उनके मुताबिक इससे बहुजन समाज का सामूहिक हित पूरा नहीं हो सकता।
मायावती ने अपने समधी अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के मामले पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बीएसपी ने जब उन्हें राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी, तब दबाव के बावजूद उन्होंने तत्काल इसकी घोषणा नहीं की। मायावती ने कहा कि इसके बाद पूरी रात इसे रोकने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए गए। कामयाबी नहीं मिलने पर अगले दिन करीब सुबह 6:30 बजे अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास की घोषणा करनी पड़ी।