
लखनऊ. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पंडित नेहरू की घनिष्ठता से हर कोई परिचित है लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि गांधी जी से नेहरू की पहली मुलाकात लखनऊ में हुई थी। महज कुछ मिनट की इस मुलाकात में पण्डित नेहरू बापू के विचारों से काफी प्रभावित हुए। दरअसल पूरा मामला ये है कि महात्मा गांधी 26 दिसम्बर 1916 को पहली बार लखनऊ आए थे। वे कांग्रेस का अधिवेशन अटैंड करने आए थे। इस दौरान व पांच दिनों तक शहर में रहे।
इस अधिवेशन के दौरान नेहरू की मुलाकात महात्मा गांधी से हुई। चारबाग स्टेशन पर सबसे पहले उनकी मुलाकात हुई। जवाहर लाल नेहरू अपने पिता मोती लाल नेहरू के साथ थे जब उन्होंने पहली बार बापू को नजदीक से देखा। इन दो महान विभूतियों की मुलाकात बिल्कुल साधारण रही। बापू कांग्रेस के अधिवेशन में हिस्सा लेने पहुंचे थे उसी दौरान मोती लाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू व सैय्यद महमूद ने एक साथ लोगों को सम्बोधित किया। यही वह अवसर था जब पण्डित नेहरू ने बापू के साथ मिलकर देश की आजादी के लिए संघर्ष का निर्णय लिया। लखनऊ से मिल रहे समर्थन के चलते 1916 व 1936 के बीच बापू ने दस बार शहर की यात्रा की। हर बार उनके समर्थकों की समर्थकों की संख्या बढ़ती चली गयी।
इसके बाद साल 1936 में पण्डित नेहरू की अध्यक्षता में हुए कांग्रेस अधिवेशन में महात्मा गांधी आए। कहा जाता है कि बापू जब भी शहर में आते थे लोगों को एक नयी सोच एक नयी धारण दे जाते थे वर्ष 1919 में जब बापू ने शहर की जमीन पर कदम रखा तो उन्होंने लोगों को सत्याग्रह की राह दिखायी। 15 अक्टूबर 1920 को रिफा-ए-आम क्लब में आयोजित एक बैठक के दौरान बापू ने लोगों को असहयोग आन्दोलन व विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का मंत्र दिया जिसका असर पूरे शहर में देखने को मिला
-गांधी-नेहरू जिस जगह पर मिले थे आज वहां लगती है पार्किंग।
-दोनों के मिलन की निशानी के तौर पर स्टेशन के बाहर लगा है पत्थर।
-बताया जाता है कि साल 1925 में भी बापू लखनऊ आए तो लोगों ने नगर निगम के अहाते में उनका स्वागत किया, जिसका शिलालेख आज भी उस स्वागत समारोह की गवाही देता है। इस बीच महात्मा लखनऊवासियों के अपने हो चुके थे जिसके बाद वह रात-रात भर ग्रामीणों के साथ बैठकर देश की आजादी पर चर्चा करते थे तो कभी महिलाओं की सभा बुलाकर उन्हें देश की आजादी में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करते।