Ayodhya Terrorist Attack मामले में बरी अभियुक्त Mohammad Aziz के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेगी सरकार, विशेष अदालत के सजा पाये आतंकियों के वकील भी कोर्ट के फैसले को देंगे चुनौती, कड़ी सुरक्षा में जम्मू जाएंगे मोहम्मद अजीज, वकील ने करवाये फ्लाइट के टिकट
लखनऊ. 14 वर्ष पहले अयोध्या में राम जन्मभूमि परिसर में हुए आतंकी हमला (Ayodhya Terrorist Attack) मामले में जम्मू के मोहम्मद अजीज (Mohammad Aziz) शनिवार को जेल से रिहा हो गये। अब उन्हें प्लाइट से जम्मू भेजा जाएगा। पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, मोहम्मद अजीज ने आतंकवादियों को सिम खरीदने में मदद की थी, लेकिन कोर्ट में पुलिस इसके साक्ष्य जुटाने में नाकाम रही। सुबूतों के अभाव में कोर्ट ने मोहम्मद अजीज का बरी कर दिया। हालांकि, यूपी सरकार अजीज की रिहाई को हाईकोर्ट चुनौती देने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विधिक परीक्षण के बाद प्रदेश सरकार बरी अभियुक्त के खिलाफ फिर से अपील करेगी। सीएम योगी के बयान के बाद अभियोजन पक्ष अपील दायर करने की तैयारी में जुट गया है। वहीं, उम्रकैद की सजा पाए चारों आतंकियों के वकीलों ने भी फैसले को चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है।
अयोध्या में हुए आतंकी हमले मामले में प्रयागराज की विशेष अदालत ने पांच में से चार आरोपितों को आजीवन कारावास और अर्धदंड की सजा सुनाई है। गौरतलब है कि 14 वर्ष पहले बाबरी विध्वंस का बदला लेने के लिए आतंकी हमला किया गया था। बीते मंगलवार को स्पेशल जज दिनेश चंद्र ने आसिफ इकबाल, मोहम्मद नसीम, शकील अहमद और डॉ. इरफान को उम्रकैद और अर्थदंड की सजा सुनाई, जबकि पांचवें आरोपित मोहम्मद अजीज को सुबूतों के आधार पर बरी कर दिया।
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कड़ी सुरक्षा में फ्लाइट से भेजा जाएगा
मोहम्मद अजीज की रिहाई के बाद उन्हें जेल से बाहर बने गार्ड रूम में रखा गया है। वहां उनके खाने और रुकने की व्यवस्था की गई है। पुलिस का कहना है कि सिक्योरिटी के बाद उन्हें बम्हरौली एयरपोर्ट के लिए रवाना कर दिया जाएगा, जहां से वह हवाई जहाज से दिल्ली जाएंगे। दिल्ली से जम्मू तक उन्हें दूसरी फ्लाइट से भेजा जाएगा। फ्लाइट के टिकट का इंतजाम उनके वकील शमशुल हसन की ओर से किया गया है। इस दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम रहेंगे।
2005 में हुआ था आतंकी हमला
5 जुलाई 2005 की सुबह करीब नौ बजे आतंकवादियों ने अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर की बैरिकेडिंग के पास और परिसर में अत्याधुनिक हथियारों से ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए बम धमाका किया था। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात कई जवान जख्मी हुए थे। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी पांच आतंकियों को ढेर कर दिया था। बाद में पांच और आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। आतंकियों के इस हमले में दो आम नागरिक भी मारे गए थे और सात अन्य लोग घायल हुए थे।
कब क्या हुआ
- 5 जुलाई 2015 को आतंकियों ने अयोध्या में अधिग्रहित परिसर में हमला किया। रिपोर्ट इसी दिन दर्ज की गई।
- 22 जुलाई 2015 को चार आरोपितों एवं 28 जुलाई को एक और आरोपित की गिरफ्तारी हुई।
- 26 नवंबर 2006 को जिला जज फैजाबाद में आरोप तय किया फिर गवाही शुरू की गई।
- 08 दिसंबर 2006 को मुकदमा हाईकोर्ट ने फैजाबाद से इलाहाबाद जिला न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया।
- 30 नवंबर 2017 को एसएसपी के पत्र पर सुरक्षा दृष्टि से नैनी जेल में सुनवाई शुरू हुई थी। 09 जून 2019 को नैनी सेंट्रल जेल में इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई पूरी हुई और फैसले की तारीख मुकर्रर की गई।
- 18 जून 2019 को नैनी सेंट्रल जेल में विशेष जज दिनेश चंद्र ने चार आरोपितों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
इन चार को हुई सजा
1- आशिक इकबाल उर्फ फारूख- निवासी सखी मैदान थाना मेंड़र जिला पूंछ, कश्मीर
2- मोहम्मद नसीम निवासी डेरा मंडल थाना मेंडर जिला पूंछ, कश्मीर
3- डॉ. इरफान निवासी शेखजाद गानान थाना टीटरो जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश
4 - शकील अहमद निवासी सखी मैदान थाना मेंडके जिला पूंछ, कश्मीर
इन धाराओं में हुई थी एफआईआर
अयोध्या में हुए आतंकी मामले (Ayodhya Terrorist Attack) में आईपीसी की धारा 147, 148 149, 307, 353, 153, 153 ए, 153बी, 295, 7 क्रिमिनल लॉ एमेंडमेंट एक्ट, 4 लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम तथा विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण संशोधन अधिनियम की धारा 16, 18, 19 और 20 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था। मामले में एक अभियुक्त मोहम्मद अजीज (Mohammad Aziz) को बरी कर दिया गया।