
Muharram Boosts Silver Religious Items Demand as Lucknow Jewellers Announce New Rates: मोहर्रम के पवित्र महीने के आगमन के साथ ही राजधानी लखनऊ के सर्राफा बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। विशेष रूप से चांदी से बने धार्मिक प्रतीकों, जैसे आलम, झूला ताजिया, हथकड़ी और अन्य धार्मिक सामग्री की मांग में तेजी देखी जा रही है। पुराने लखनऊ के बाजारों में इन दिनों खरीदारों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है। श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के अनुरूप मोहर्रम की तैयारियों में जुट गए हैं और इसी के चलते चांदी के कारोबार में भी उत्साह का माहौल है।
मोहर्रम के अवसर पर चांदी के आलम, झूला ताजिया और विशेष हथकड़ी की खरीदारी को शुभ माना जाता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में लोग इन धार्मिक प्रतीकों को खरीदने के लिए सर्राफा बाजार पहुंच रहे हैं। कारीगर भी कई दिनों से इन विशेष वस्तुओं को तैयार करने में लगे हुए हैं ताकि श्रद्धालुओं को उनकी पसंद और परंपरा के अनुसार सामान उपलब्ध कराया जा सके।
लखनऊ की पहचान गंगा-जमुनी तहजीब से रही है और मोहर्रम के अवसर पर यहां का बाजार धार्मिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। शहर के कई परिवार पीढ़ियों से चांदी के धार्मिक प्रतीकों का निर्माण कर रहे हैं और उनकी कलाकारी देशभर में प्रसिद्ध है।
राजधानी के प्रतिष्ठित सर्राफा कारोबारी और विनोद ज्वैलर्स के संचालक विनोद माहेश्वरी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद स्थानीय बाजार में खरीदारी का उत्साह बना हुआ है। उन्होंने बताया कि मोहर्रम को देखते हुए चांदी की धार्मिक वस्तुओं की मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने सर्राफा एसोसिएशन द्वारा जारी ताजा खुदरा दरों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में सोने और चांदी के दाम इस प्रकार हैं—
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन दरों में जीएसटी, मेकिंग चार्ज और हॉलमार्क शुल्क शामिल नहीं हैं। अंतिम कीमत खरीदारी के समय इन अतिरिक्त शुल्कों के अनुसार निर्धारित होगी।
विनोद माहेश्वरी के अनुसार, मोहर्रम के दौरान विशेष धार्मिक वस्तुओं की मांग बढ़ने से सर्राफा कारोबार में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। कई लोग चांदी के छोटे-बड़े आलम, ताजिया और अन्य धार्मिक सामग्री की बुकिंग पहले से ही करा रहे हैं। दुकानों पर ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कारोबारी आने वाले दिनों में बिक्री और बढ़ने की उम्मीद जता रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मोहर्रम केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक भी है। इस अवसर पर लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार धार्मिक प्रतीकों की खरीदारी करते हैं, जिससे स्थानीय कारोबारियों और कारीगरों को भी रोजगार मिलता है।
मोहर्रम के अवसर पर चांदी के धार्मिक प्रतीकों का निर्माण करने वाले कारीगरों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कई कारीगर महीनों पहले से तैयारी शुरू कर देते हैं। हाथों से तैयार किए जाने वाले आलम, झूला ताजिया और अन्य धार्मिक सामग्री में विशेष नक्काशी और डिजाइन का उपयोग किया जाता है, जिससे इनकी सुंदरता और धार्मिक महत्व दोनों बढ़ जाते हैं। व्यापारी का मानना है कि लखनऊ का सर्राफा बाजार केवल व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि यहां की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। मोहर्रम के दौरान इस विरासत की झलक बाजारों में स्पष्ट दिखाई देती है।
मोहर्रम के मद्देनजर चांदी के धार्मिक प्रतीकों की बढ़ती मांग ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि धार्मिक परंपराएं स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति देती हैं। श्रद्धा, परंपरा और कारोबार के इस अनूठे संगम ने राजधानी लखनऊ के सर्राफा बाजार में विशेष उत्साह का माहौल बना दिया है।
आने वाले दिनों में मोहर्रम की तैयारियां और तेज होने के साथ ही चांदी के आलम, झूला ताजिया और अन्य धार्मिक सामग्री की मांग में और वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। कारोबारियों को उम्मीद है कि इस वर्ष मोहर्रम का सीजन सर्राफा बाजार के लिए बेहद उत्साहजनक साबित होगा।