National Technology Day: नए तकनीकी युग में हर कुछ आसान हो रहा है। अब स्तन कैंसर (Breast Cancer) का इलाज सस्ता और आसानी से मिल पाएगा।
यूपी में ही बल्कि देश में महिलाएं बड़ी संख्या में ब्रेस्ट कैंसरसे पीड़ित हो रही है। ऐसे में महिलाओं घातक बीमारी के लिए अन्य शहरों में दौड़ना भागना पड़ता है वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर लोग इलाज करा पाने में असमर्थ होते हैं। ऐसे में आईआईटी कानपुर ब्रेस्ट कैंसर की अचूक और प्रभावी दवा खेाजेगा। इसके लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने करार किया गया है। बायोप्सी पीस के सहारे संस्थान के वैज्ञानिक नैनो टेक्नोलॉजी से ब्रेस्ट कैंसर की चार अलग-अलग स्टेज में प्रभावी दवा के मॉलीक्यूल खोजेंगे। बकायदा डोज भी तय होगी।
इस तरह के कैंसर में प्रचलित दवाओं का असर प्रभावी नहीं है, जिसके कारण यह अंदर ही अंदर फैलकर महिला को मौत की दहलीज पर पहुंचा देता है। मेडिकल कॉलेज की एथिक्स कमेटी ने प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इसमें आईसीएमआर ने भी मदद का भरोसा दिया है। मेडिकल कॉलेज की एथिक्स कमेटी के सचिव प्रो. सौरभ अग्रवाल का कहना है कि स्टडी प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई है।
क्यों अप्रभावी दवाएं ये दवाएं
पीड़ित मरीज के कैंसर सेल्स के ऊपर एस्ट्रोजन-प्रोगेस्ट्रान और हर-2 हारमोन्स रिसेप्टर की लेयर जमा हो जाती है इसलिए दवाएं प्रभावी नहीं हो पाती हैं। इन रिसेप्टर पर प्रभावी दवाओं की खोज की जरूरत है। अभी हर-2 में कुछ दवाएं असर दिखाती हैं लेकिन उसमें भी जब हर-2 रिसेप्टर की रिपोर्ट 3 से ज्यादा पॉजिटिव आई हो। जेके कैंसर संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ.एमपी मिश्र के मुताबिक अभी तक ब्रेस्ट कैंसर की स्थिति में कीमोथेरेपी में जितनी दवाएं दी जाती हैं, वह सभी रिसेप्टर की लेयर को भेदने में सफल नहीं हो पा रही हैं इसलिए कैंसर तेजी से फैलता है।
सभी स्टेज में 48 बायोप्सी पीस देंगे
करार के मुताबिक विभाग 48 मरीज के बायोप्सी सैंपल आईआईटी को दिए जाएंगे। इसमें ब्रेस्ट कैंसर के स्टेज 1,2,3 और 4 के मरीजों के आपरेशन के बाद सैंपल लिए जाएंगे। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के हेड प्रो जीडी यादव ने कहा ब्रेस्ट कैंसर तेजी से फैल रहा है। इस समय हर महीने 20-25 ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
तेजी से बढ़ा ब्रेस्ट कैंसर
मेडिकल कॉलेज ने कीं बीते एक साल में 301 सर्जरी ब्रेस्ट कैंसर की। ब्रेस्ट कैंसर दुनिया के लिए गंभीर समस्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 2020 में 23 लाख महिलाओं ने ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कराया जिसमें 6.85 लाख महिलाओं की मौत हो गई।