लखनऊ

ओपी राजभर बोले- उस दिन ट्रैफिक इंस्पेक्टर ने थप्पड़ न मारा होता तो आज मैं मंत्री न होता

OP Rajbhar News : यूपी के मंत्री ओपी राजभर ने साझा किया अपना प्रेरक किस्सा, बताया कैसे एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर के थप्पड़ और कांशीराम जी के साथ ने बदल दी उनकी जिंदगी और ऑटो चालक से बनाया मंत्री।
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May 28, 2026
OP Rajbhar
ओ पी राजभर ने बताया TI ने जब उन्हें मारा थप्पड़, कहा मन में ठाना और किया, PC- X(OP rajbhar)

लखनऊ : ओपी राजभर का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह ऑटो चलाते हुए नजर आ रहे थे। समाजवादी पार्टी ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया था। इसके बाद ओपी राजभर ने ऑटो चलाकर दिखाया और कहा कि हां मैं राजनीति में आने से पहले ऑटो चलाता था। इसके बाद ऑटो चलाने के बाद वह कैसे राजनीति में आए इसका किस्सा भी सुनाया।

ओम प्रकाश राजभर एक वीडियो में कहते नजर आ रहे हैं कि मेरी आर्थिक स्थिति कुछ ऐसी थी कि मैं रात में ऑटो रिक्शा चलाता था और दिन में पढ़ाई करता था। बनारस की एक जगह मुझे आज भी बराबर याद है। मैं सवारी लेकर आ रहा था। मेरे ऑटो में 3 की जगह 5 सवारी बैठी थीं। मेरा ऑटो ओवरलोड था। ट्रैफिक इंस्पेक्टर महोदय ने मुझे रोका। मैं नहीं रुका सोचा निकल जाऊंगा। लेकिन TI महोदय ने मुझे दौड़ाकर पकड़ लिया और दिए मुझे दो-तीन थप्पड़।

मैंने उन TI महोदय से कहा कि मेरी मजबूरी है, जिस वजह से मैं ओवरलोड चल रहा हूं। कुछ पैसे कमा लेता हूं फिर पढ़ाई करता हूं। ट्रैफिक इंस्पेक्टर ने मुझे पुलिस लाइन चलने को कहा, मैं उनके साथ पुलिस लाइन गया। फिर वहां जाकर उन्होंने मुझे छोड़ दिया। लेकिन, लौटते टाइम मैंने मन बना लिया कि आज इन्होंने मुझे मारा है लेकिन कल मैं इन ट्रैफिक इंस्पेक्टर से सैल्यूट जरूर करवाउंगा।

उसी दिन मैंने यह मन में ठाना और सोच लिया कि अब करना है। बस उसी के कुछ दिन बाद मेरी भेंट हो गई कांशीराम जी से। उन्होंने मुझे पढ़ाया सिखाया और राजनीति के गुर बताए। उन्होंने ही मुझे राजनीतिक ज्ञान दिया। उसी ज्ञान के बदौलत मैं 2017 में मंत्री बना। फिर मैं बनारस गया और वहां के जिलाधिकारी महोदय से पूछा कि वह ट्रैफिक इंस्पेक्टर महोदय कहां हैं। मुझे उनसे मिलना है। मुझे वहां पता चला कि वह तो अब रिटायर हो गए हैं।

वह इलाहाबाद के रहने वाले थे। मैंने उनका पता निकलवाकर प्रोटोकॉल भिजवाया। वह बहुत परेशान कि मुझसे मंत्री क्यूं मिलना चाह रहे हैं। आखिर क्या वजह है। जान न पहचान बड़े मियां सलाम। मैंने वहां के अधिकारियों को बताया कि सिर्फ इतना बताना कि मंत्री जी आ रहे हैं। उनका नाम ओमप्रकाश राजभर है। वह मेरा नाम भूल गए थे। उनको मेरा नाम नहीं याद था।

मैं वहां पहुंचा…उनसे मेरी दुआ बंदगी हुई मैंने हाल चाल पूछा दोनों में बात हुई। फिर मैंने उन्हें सैल्यूट किया…उन्होंने भी किया। इसके बाद उन्होंने पूछा कि आप हमारे दरवाजे पर हमें सैल्यूट करने क्यों आए। हमने उनसे कहा कि अगर आपने उस दिन मुझे वो थप्पड़ मारा न होता तो मैं मिनिस्टर न बनता और आपके दरवाजे सैल्यूट करने नहीं आता।

Updated on:
28 May 2026 03:00 pm
Published on:
28 May 2026 03:00 pm