
OP Rajbhar Backs Law Against Vande Mataram Opposition:उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सोमवार को दो अहम मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। उन्होंने एक ओर कथित राम मंदिर चंदा गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट को एसआईटी द्वारा स्टेटस रिपोर्ट सौंपे जाने की पुष्टि की, वहीं दूसरी ओर 'वंदे मातरम्' का विरोध करने वालों के खिलाफ कानून बनाए जाने की पहल का खुलकर समर्थन किया। राजभर ने कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत देश की अस्मिता और सम्मान से जुड़े विषय हैं, इसलिए उनका विरोध करने वालों के खिलाफ कानून बनाया जाना एक अच्छी पहल है।
राजधानी लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान राजभर ने कहा कि सरकार और न्यायालय अपने-अपने स्तर पर संवेदनशील मामलों में पूरी गंभीरता से काम कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों ही मामलों में कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई होनी चाहिए और किसी भी तरह की राजनीतिक भावना से ऊपर उठकर निर्णय लिया जाना चाहिए।
पत्रकारों द्वारा जब उनसे 'वंदे मातरम्' का विरोध करने वालों के खिलाफ कानून बनाए जाने की पहल पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के उसका समर्थन किया। राजभर ने कहा, "यह अच्छी पहल है क्योंकि जो लोग वंदे मातरम् का विरोध करते हैं, उनके लिए कानून होना चाहिए।" उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं बल्कि देश की आजादी के संघर्ष की पहचान और करोड़ों भारतीयों की भावनाओं का प्रतीक है। ऐसे राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए। यदि कोई जानबूझकर इसका विरोध करता है तो उस पर कानूनी प्रावधानों के तहत विचार किया जाना उचित है।
राजभर का यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर देशभर में समय-समय पर बहस होती रही है। कई राज्यों में इस विषय को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चा और प्रस्ताव भी सामने आते रहे हैं।
राजभर ने कहा कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अधिकार देता है, लेकिन उसके साथ नागरिकों के कुछ कर्तव्य भी जुड़े हैं। देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना हर भारतीय की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है, जहां सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान किया जाता है। लेकिन जब बात राष्ट्र के सम्मान की आती है तो सभी नागरिकों को एकजुट होकर देशहित में खड़ा होना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसे मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है।
इसी दौरान मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कथित राम मंदिर चंदा गबन मामले पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी और विशेष जांच दल (एसआईटी) अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत कर चुका है।
राजभर ने कहा कि अब पूरा मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसी भी मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता के पक्ष में है तथा जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से अपना कार्य कर रही हैं।
राजभर ने कहा कि यदि किसी भी जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो जांच के माध्यम से सच्चाई भी सामने आ जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी को बचाना या फंसाना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। इसी कारण एसआईटी को स्वतंत्र रूप से जांच करने की जिम्मेदारी दी गई और अब उसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जा चुकी है।
ओम प्रकाश राजभर के दोनों बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। वंदे मातरम् के मुद्दे पर उनका स्पष्ट समर्थन ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक विषयों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिलती रही है। दूसरी ओर राम मंदिर चंदा मामले पर उनका यह बयान भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह मामला पहले से ही न्यायिक प्रक्रिया में है। ऐसे में एसआईटी की रिपोर्ट दाखिल होने के बाद आगे की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
राजनीतिक विश्लेषक अरविंद कांत त्रिपाठी का मानना है कि आने वाले दिनों में इन दोनों मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस और तेज हो सकती है। विशेषकर यदि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कोई महत्वपूर्ण टिप्पणी करता है या वंदे मातरम् से जुड़े प्रस्ताव पर आगे कोई विधायी पहल होती है तो इसका व्यापक राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।
राजभर ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रीय हित और कानून व्यवस्था जैसे विषयों पर उनकी पार्टी का रुख स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि देश के संविधान, न्यायपालिका और कानून का सम्मान सभी को करना चाहिए। चाहे मामला राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान का हो या किसी कथित आर्थिक अनियमितता की जांच का, हर निर्णय कानून के अनुसार ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका सर्वोच्च है और सरकार का दायित्व न्यायालय के निर्देशों का पालन करना है। इसी भावना के तहत राम मंदिर चंदा मामले में एसआईटी ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है।
फिलहाल दोनों मुद्दों पर देश की निगाहें आगे की घटनाओं पर टिकी हुई हैं। एक ओर वंदे मातरम् का विरोध करने वालों के खिलाफ कानून बनाए जाने की मांग को लेकर बहस तेज हो सकती है, वहीं दूसरी ओर राम मंदिर चंदा गबन के कथित मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट पर अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजभर के बयान ने इन दोनों विषयों को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय की अगली प्रक्रिया और सरकार के संभावित कदम इन मामलों को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।