लखनऊ

Padma Awards 2026: पद्मश्री से चमकेगा लखनऊ, आज राष्ट्रपति भवन में सम्मानित हुए शहर के दो बड़े डॉक्टर

Padma Awards 2026 News:  लखनऊ के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेंद्र प्रसाद और डॉ. केके ठकराल को चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पद्मश्री सम्मान से सम्मानित करेंगी।

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May 26, 2026
डॉ. राजेंद्र प्रसाद और डॉ. केके ठकराल को पद्मश्री सम्मान (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Padma Awards Lucknow Doctors: लखनऊ के प्रतिष्ठित चिकित्सकों और रंगमंच की दुनिया से जुड़े एक बड़े नाम के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक बनने जा रहा है। राजधानी लखनऊ के दो वरिष्ठ डॉक्टरों डॉ. राजेंद्र प्रसाद और डॉ. केके ठकराल को चिकित्सा क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया । राष्ट्रपति Droupadi Murmu नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में दोनों विभूतियों को यह सम्मान प्रदान किया । इनके नामों की घोषणा इसी वर्ष 26 जनवरी को पद्म पुरस्कारों की सूची में की गई थी। वहीं, कला और रंगमंच की दुनिया में छह दशक से अपनी अलग पहचान बनाने वाले वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनिल रस्तोगी को भी पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है। उन्हें दूसरे चरण में सम्मानित किया जाएगा।

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चिकित्सा जगत के दो सितारों को राष्ट्रीय सम्मान

लखनऊ के लिए यह गर्व का अवसर है कि चिकित्सा क्षेत्र में सेवा और शोध के लिए समर्पित दो नाम देश के सर्वोच्च सम्मानों में शामिल हुए हैं। केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद और दुड़ियागंज स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य एवं पूर्व निदेशक आयुर्वेद डॉ. केके ठकराल को उनकी दीर्घकालिक सेवाओं के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है।

इन दोनों चिकित्सकों ने न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए, बल्कि हजारों मरीजों को नई जिंदगी देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही वजह है कि पद्मश्री के रूप में उनकी सेवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद : पल्मोनोलॉजी का बड़ा नाम

प्रसिद्ध पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म 17 फरवरी 1950 को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के मुंडेवा गांव में हुआ था। बेहद साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने चिकित्सा जगत में जो मुकाम हासिल किया, वह प्रेरणादायक है। उन्होंने वर्ष 1974 में केजीएमयू से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और वर्ष 1979 में टीबी एवं चेस्ट रोगों में एमडी की उपाधि हासिल की।

इसके बाद उन्होंने पल्मोनरी मेडिसिन के क्षेत्र में लगातार शोध और चिकित्सा सेवा के माध्यम से नई पहचान बनाई। वह किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष रहे। इसके अतिरिक्त उन्होंने नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित पटेल चेस्ट संस्थान के निदेशक के रूप में भी सेवाएं दीं। वर्तमान समय में वह एरा मेडिकल कॉलेज, लखनऊ में प्रोफेसर एवं चिकित्सा शिक्षा निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपने लंबे चिकित्सकीय जीवन में पांच लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया है। टीबी, अस्थमा और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के उपचार में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके 400 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। चिकित्सा शोध के क्षेत्र में उनके कार्यों को दुनिया भर में सराहा गया है।

शोध और चिकित्सा सेवा का अद्भुत संगम

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केवल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि एक सफल शोधकर्ता और शिक्षक भी रहे हैं। उन्होंने 12 से अधिक चिकित्सा विषयक पुस्तकें लिखीं, जो मेडिकल छात्रों और चिकित्सकों के लिए उपयोगी मानी जाती हैं। उनके शोध कार्यों को देश-विदेश में हजारों विशेषज्ञों ने पढ़ा और सराहा।

उन्हें अब तक 60 से अधिक प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें चिकित्सा क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान माने जाने वाला डॉ. बीसी रॉय राष्ट्रीय पुरस्कार भी शामिल है। उनके सहयोगियों का कहना है कि उन्होंने हमेशा मरीजों की सेवा को सर्वोपरि रखा और चिकित्सा को केवल पेशा नहीं बल्कि मानवता की सेवा माना।

आयुर्वेद को नई पहचान देने वाले डॉ. केके ठकराल

पद्मश्री से सम्मानित होने जा रहे डॉ. केके ठकराल ने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने लंबे समय तक राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, दुड़ियागंज में प्रधानाचार्य के रूप में सेवाएं दीं और बाद में उत्तर प्रदेश में आयुर्वेद विभाग के निदेशक भी रहे।

आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध, शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण पहल कीं। उनके नेतृत्व में आयुर्वेदिक चिकित्सा संस्थानों में आधुनिक तकनीकों और शोध आधारित अध्ययन को बढ़ावा मिला। उन्होंने पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ जोड़ने की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य किए।

डॉ. ठकराल की पहचान ऐसे चिकित्सक के रूप में रही है जिन्होंने ग्रामीण और गरीब मरीजों तक आयुर्वेदिक चिकित्सा को पहुंचाने का प्रयास किया। उनके कार्यकाल में कई नई योजनाएं शुरू हुईं, जिनसे आयुर्वेद चिकित्सा के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ।

राष्ट्रपति भवन में  सम्मान समारोह

नई दिल्ली में आयोजित होने वाला पद्म पुरस्कार समारोह बेहद भव्य और प्रतिष्ठित माना जाता है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर की विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियों को सम्मानित किया गया। लखनऊ के इन दोनों चिकित्सकों को पद्मश्री मिलने की खबर से चिकित्सा जगत में खुशी का माहौल है। केजीएमयू, एरा मेडिकल कॉलेज और आयुर्वेद संस्थानों के चिकित्सकों तथा छात्रों ने इसे पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया है। लोगों का कहना है कि यह सम्मान युवा चिकित्सकों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

रंगमंच की दुनिया में भी लखनऊ का मान बढ़ा

चिकित्सा क्षेत्र के साथ-साथ कला और रंगमंच की दुनिया में भी लखनऊ का नाम रोशन हुआ है। वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनिल रस्तोगी को कला एवं रंगमंच में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान दिए जाने की घोषणा हुई है। हालांकि उन्हें दूसरे चरण में सम्मानित किया जाएगा, लेकिन इस घोषणा से उनके प्रशंसकों और रंगमंच से जुड़े कलाकारों में उत्साह है।

डॉ. अनिल रस्तोगी पिछले छह दशकों से रंगमंच, फिल्म, टीवी और ओटीटी की दुनिया में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने अभिनय और सशक्त प्रस्तुति के जरिए देशभर में विशेष पहचान बनाई। अब तक वह 100 से अधिक नाटकों में अभिनय कर चुके हैं और लगभग एक हजार मंच प्रस्तुतियां दे चुके हैं। उनकी अभिनय शैली और रंगमंच के प्रति समर्पण ने नई पीढ़ी के कलाकारों को भी प्रेरित किया है। लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

लखनऊ के लिए गर्व का क्षण

एक ही वर्ष में चिकित्सा और कला के क्षेत्र से जुड़े तीन प्रतिष्ठित नामों को पद्मश्री सम्मान मिलना लखनऊ के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं है। यह सम्मान न केवल इन विभूतियों की व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और खासतौर पर लखनऊ की प्रतिभा, संस्कृति और सेवा भावना का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी है। इन महान हस्तियों की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि समर्पण, मेहनत और समाज सेवा के जरिए किसी भी क्षेत्र में सर्वोच्च पहचान हासिल की जा सकती है। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में जब इन नामों को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा, तब पूरा लखनऊ गर्व और सम्मान की भावना से भर उठेगा।

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