Prateek Yadav Asthi Visarjan Haridwar : हरिद्वार के VIP घाट पर दिवंगत प्रतीक यादव की अस्थियां गंगा में विसर्जित की गईं। इस दौरान पत्नी अपर्णा यादव फूट-फूटकर रोईं, वहीं मासूम बेटी ने 'I Love You Papa' का कार्ड बनाकर पिता को अंतिम विदाई दी।
लखनऊ : गंगा की धारा आज कुछ और ही गवाह बन रही थी। VIP घाट पर वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की अस्थियों का विसर्जन हो रहा था। मात्र 38 साल की उम्र में अचानक दुनिया से चले गए प्रतीक की विदाई परिवार के लिए असहनीय थी।
पत्नी अपर्णा यादव (उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष और भाजपा नेता) पूरे समय फूट-फूटकर रो रही थीं। परिवार के सदस्य उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन दर्द इतना गहरा था कि कोई भी शब्द काम नहीं आ रहा था। अपर्णा ने पति की अस्थियों के कलश को देखा और आंसू थम ही नहीं रहे थे।
दोनों बेटियां प्रथमा और पद्मजा अपने पिता की अस्थियों के साथ खड़ी थीं। सबसे छोटी बेटी ने एक खास कार्ड बनाया था। उस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था I Love You Papa। उस मासूम ने कलश को सीने से लगाया, प्यार से चूमा और फिर गंगा में वह कार्ड प्रवाहित कर दिया। गंगा की लहरों ने जैसे उस बच्ची का प्यार और दर्द दोनों को अपने आगोश में ले लिया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
सांसद आदित्य यादव (शिवपाल सिंह यादव के बेटे) ने कलश को गंगा में प्रवाहित करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने और बेटी ने अस्थियों से भरे घड़े को माथे से लगाकर अंतिम प्रणाम किया। परिवार के अन्य सदस्य तेज प्रताप यादव, अक्षय यादव और ससुर अरविंद सिंह बिष्ट भी मौजूद थे।
चार्टर्ड प्लेन से लखनऊ से हरिद्वार पहुंचे इस परिवार के लिए यह सफर सिर्फ अस्थि विसर्जन का नहीं, बल्कि एक अपूर्ण कहानी को समाप्त करने का था। प्रतीक यादव फेफड़ों में खून के थक्के (पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म) के कारण अचानक चले गए थे। कुछ दिन पहले तक सामान्य जिंदगी जी रहे युवा की यह अकाल विदाई पूरे परिवार को झकझोर गई थी।
बाबा रामदेव भी सांत्वना देने घाट पर पहुंचे। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया। लेकिन मां गंगा के किनारे खड़े होकर अपर्णा का रोना, छोटी बेटी का पिता को अंतिम प्यार देना और पूरे परिवार का सन्नाटा ये दृश्य शब्दों से परे थे।
प्रतीक जानवरों के बहुत शौकीन थे। उनकी अंतिम यात्रा में भी पत्नी अपर्णा ने उनके प्यारे कुत्तों और बंदर की तस्वीरें रखी थीं। आज गंगा में विलीन होते वक्त शायद वे भी कहीं ऊपर से अपनी बेटियों को, अपनी पत्नी को और पूरे परिवार को देख रहे होंगे।