Raja Bhaiya wife complaint: राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह की शिकायत पर MLC अक्षय प्रताप सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ लखनऊ में FIR दर्ज हुई है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज और नकली हस्ताक्षरों के जरिए 5 करोड़ रुपये से अधिक की साझेदारी फर्म की संपत्ति हड़पने की कोशिश की गई। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

Bhanvi Singh FIR Akshay Pratap Singh: उत्तर प्रदेश के एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह और उनके कुछ सहयोगियों के खिलाफ लखनऊ में धोखाधड़ी, जालसाजी और दस्तावेजों में हेरफेर का मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई राजा भैया की पत्नी भानवी कुमारी सिंह की शिकायत पर हुई है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज और नकली हस्ताक्षरों के जरिए करोड़ों रुपये की साझेदारी फर्म की संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
लखनऊ के हजरतगंज थाने में उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य अक्षय प्रताप सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला जालसाजी, धोखाधड़ी और साझेदारी फर्म से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेरफेर से जुड़ा है। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है। यह शिकायत पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पत्नी भानवी कुमारी सिंह की ओर से दर्ज कराई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस पार्टनरशिप फर्म में वह शामिल थीं। उसके दस्तावेजों में फर्जी तरीके से बदलाव कर उनकी हिस्सेदारी और संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की गई।
भानवी सिंह का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2014 में अक्षय प्रताप सिंह के साथ मिलकर एक साझेदारी फर्म बनाई थी। जिसमें उन्होंने करोड़ों रुपये का निवेश किया था। आरोप है कि बाद में अक्षय प्रताप सिंह और उनके साथियों ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और नकली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर फर्म के स्वामित्व ढांचे में बदलाव कर दिया।
शिकायत में दावा किया गया है कि फर्म की संपत्तियों की कीमत 5 करोड़ रुपये से अधिक है। भानवी सिंह ने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच सुनियोजित तरीके से फर्म पर कब्जा करने की कोशिश की गई।
एफआईआर में अक्षय प्रताप सिंह के अलावा रोहित कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह, राम देव यादव और कुछ अज्ञात लोगों के नाम भी शामिल हैं। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वहीं, एफआईआर दर्ज होने के बाद अक्षय प्रताप सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि फर्म से जुड़ा कोई भी फैसला दोनों निदेशकों की सहमति के बिना संभव नहीं था। उन्होंने दावा किया कि सभी प्रक्रियाएं कानूनी तरीके से पूरी की गई थीं। किसी प्रकार का फर्जीवाड़ा नहीं हुआ।