लखनऊ

अखिलेश की मीटिंग में नहीं पहुंचे शिवपाल यादव, आजम खान भी रहे नदारद

राष्ट्रपति चुनाव के बाद अब राज्यसभा चुनाव में भी शिवपाल यादव अखिलेश के लिये मुसीबत बन सकते हैं।
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Mar 21, 2018
Shivpal yadav

लखनऊ. राष्ट्रपति चुनाव के बाद अब राज्यसभा चुनाव में भी शिवपाल यादव अखिलेश के लिये मुसीबत बन सकते हैं। सपा और भाजपा की डिनर डिप्लोमैसी के पहले अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यालय पर विधायकों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में सभी एमएलए का आना अनिवार्य था, लेकिन शिवपाल यादव नहीं आये। राज्यसभा चुनाव में वोटिंग का समीकरण देखते हुए मीटिंग में शिवपाल यादव का न पहुंचना सपा के लिये चिंता का विषय है। हालांकि, अभी शिवपाल यादव की तरफ से विधायकों की मीटिंग में उनके न पहुंचने का कोई कारण नहीं बताया गया है। ऐसे में शिवपाल यादव को लेकर तरह-तरह की कयासबाजी शुरू हो गई है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव में भी शिवपाल यादव ने अखिलेश के विरोध के बावजूद भाजपा कैंडिडेट रामनाथ कोविंद का समर्थन किया था।

राज्यसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 23 मार्च को चुनाव होना है। भाजपा की कोशिश राज्यसभा में नौ सांसदों को भेजनी की है, वहीं समाजवादी पार्टी अपनी एकमात्र प्रत्याशी जया बच्चन के साथ बसपा के भीमराव अंबेडकर को जीत दिलाना चाहती है। पहले ये आसान लग रहा था, लेकिन भाजपा ने अपना नौवां प्रत्याशी उतारकर विपक्षी दलों का समीकरण बिगाड़ दिया है। अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ दोनों दलों ने किसी बड़ी टूट-फूट की आशंका से निपटने के लिये डिनर पॉलिटिक्स का सहारा लिया है। दोनों ही पार्टियों ने बुधवार शाम को डिनर पार्टी का आयोजन किया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जहां राजधानी के पांच सितारा होटल में डिनर पार्टी का आयोजन किया है, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सरकारी आवास पर रात्रिभोज का आयोजन रखा है।

अखिलेश की मीटिंग 40 विधायक ही पहुंचे
डिनर पार्टी से पहले अखिलेश यादव ने पार्टी मुख्यालय पर विधायकों की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई थी। इस बैठक में सपा के सभी 47 को विधायकों को आने के निर्देश दिये गये थे, लेकिन बैठक में सपा के सिर्फ 40 विधायक ही पहुंचे। सात विधायक नदारद रहे। अखिलेश की मीटिंग में न पहुंचने वालों में पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव का बड़ा नाम शामिल रहा। बैठक में पूर्व मंत्री आजम खान और उनके विधायक बेटे उमर अब्दुल्ला भी नहीं पहुंचे। राज्यसभा चुनाव को लेकर पार्टी विधायकों में किसी तरह की टूट-फूट न हो, इसके लिये अखिलेश यादव ने आज सुबह ही पार्टी मु्ख्यालय पर मीटिंग बुलाई थी। सूत्रों की मानें तो सपा कार्यालय में जिस वक्त मीटिंग चल रही थी, शिवपाल यादव बाहर से तो गुजरे लेकिन बैठक में नहीं गये।

शाम को अखिलेश की डिनर पार्टी
अखिलेश यादव की ओर से शाम को डिनर पार्टी का आयोजन किया गया है। डिनर पार्टी के लिये अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह यादव , शिवपाल सिंह यादव, रामगोपाल यादव और राज्यसभा प्रत्याशी जया बच्चन के साथ पूर्व मंत्रियों और मौजूदा विधायकों को आमंत्रित किया है। पार्टी के बड़े नेताओं को आशंका है कि राज्यसभा चुनाव को लेकर कुछ विधायक दूसरे दल को वोट दे सकते हैं।

राज्यसभा का गणित
324 विधायकों के साथ भाजपा मजबूत स्थिति है। आठ विधायकों को राज्यसभा में भेजने के बाद भी भाजपा के पास 28 वोट बचेंगे। नौवें उम्मीदवार अनिल अग्रवाल को उतारकर भाजपा विपक्षी दलों का समीकरण बिगाड़ दिया है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के वोट की जरूरत होती है। ऐसे में भाजपा को महज नौ वोटों की जरूरत है। इनमें से नितिन अग्रवाल और विजय मिश्रा के वोट भाजपा को मिलना तय है। ऐसे में भाजपा निर्दलीय विधायकों के समर्थन और सपा-बसपा में क्रास वोटिंग के सहारे राज्यसभा की नौवीं सीट जीतने की जुगत में है।

तो बढ़ जाएंगी बसपा प्रत्याशी की मुश्किलें
सपा के 47 विधायक हैं, मतलब सपा द्वारा एक प्रत्याशी को राज्यसभा भेजने के बाद उसके बास 10 वोट बचेंगे। बसपा के 19 विधायक हैं। हाल हमें यूपी के बदले राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए माना जा रहा है समाजवादी पार्टी बसपा प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर का समर्थन करेगी। ऐसे में बसपा के पास कुल वोट 29 हो जाएंगे। कांग्रेस के सात वोट भी बसपा के फेवर में जाने की उम्मीद है। ऐसे में अगर रालोद के एकमात्र विधायक का वोट अगर बसपा को मिला तो भीमराव अंबेडकर की जीत तय है। लेकिन अगर इसमें सेंधमारी हो गई तो बसपा प्रत्याशी की राह मुश्किल हो जाएगी। ऐसे में अगर शिवपाल यादव ने भी क्रास वोटिंग की तो बसपा प्रत्याशी की राह और मुश्किल हो जाएगी।

Updated on:
21 Mar 2018 01:50 pm
Published on:
21 Mar 2018 01:50 pm