
UP Athletes In CWG 2026: "खेल के मैदान पर जब कोई खिलाड़ी देश का झंडा ऊंचा करता है तो, उसके पीछे बरसों की मेहनत और कड़ा संघर्ष होता है।" आगामी ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए क्वालीफाई करने वाले उत्तर प्रदेश के 3 युवा खिलाड़ियों रोहित यादव, कुलदीप कुमार और आदित्य प्रताप सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। गरीबी, सीमित संसाधनों और मुश्किलों को मात देकर इन तीनों ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अपनी जगह पक्की की है। आइए जानते हैं इन तीनों खिलाड़ियों का कॉमनवेल्थ तक पहुंचने का सफर और अनुभव कैसा रहा।
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले रोहित यादव जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) के बेहतरीन खिलाड़ी हैं। उनकी सफलता के पीछे उनके पिता सभाजीत यादव का बड़ा हाथ है जो खुद एक मैराथन धावक रहे हैं। आर्थिक तंगी के कारण जब असली भाला खरीदना संभव नहीं था तो पिता ने साल 2013 में लकड़ी का भाला बनाकर दिया था जिससे रोहित ने अभ्यास शुरू किया। उनका पहला थ्रो केवल 23 मीटर था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। तीन भाइयों में दूसरे नंबर के रोहित को उनकी मां पुष्पा देवी और परिवार का पूरा साथ मिला।
अभी रोहित का पूरा ध्यान कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को सुधारने पर है। रोहित का कहना है कि वह पटियाला में अभ्यास के दौरान खुद को तनाव मुक्त रखने पर जोर दे रहे हैं। प्रतियोगिता में चोट से बचे रहने के लिए रोहित रिहैब के साथ-साथ अपनी शारीरिक मजबूती पर भी पसीना बहा रहे हैं। उनकी मेहनत बता रही है कि वह ग्लासगो में अपना पर्सनल बेस्ट तोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
प्रयागराज के युवा पोल वॉल्टर कुलदीप कुमार की कहानी भी बेहद संघर्षपूर्ण रही है। आठवीं कक्षा में वह अपने भाइयों के साथ प्रयागराज आ गए थे। उनके किसान पिता हर महीने उन्हें 4000 रुपये और गाय का दूध भेजते थे। पांचों भाई एक ही कमरे में रहते थे। कुलदीप का सफर बहुत ही दिलचस्प है क्योंकि उनके परिवार में खेलों की एक लंबी परंपरा रही है। वह अपने भाइयों के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। उनके बड़े भाई धीरेन्द्र जो खुद 4.90 मीटर की छलांग लगाने वाले बेहतरीन जम्पर थे उन्होंने अपना करियर छोड़कर कुलदीप का पूरा समर्थन किया। बतादें कुलदीप पहले ही पोल वॉल्ट में नेशनल चैंपियन रह चुके हैं।
कुलदीप इस समय भोपाल स्थित डीएसवाईडब्ल्यू (DSYW) एकेडमी में अपनी ट्रेनिंग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है और वह ग्लासगो में तिरंगा लहराकर अपने परिवार की इस शानदार विरासत को और आगे बढ़ाना चाहते हैं।
आगरा के रहने वाले 24 साल के युवा मुक्केबाज आदित्य प्रताप सिंह यादव ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप और कड़े चयन ट्रायल में शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए भारतीय बॉक्सिंग टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है। साल 2015 में महज 13 साल की उम्र में खेल विभाग द्वारा चुने जाने के बाद उन्होंने मेरठ के कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम के बॉक्सिंग हॉस्टल में कोच भूपेंद्र यादव की देखरेख में अपनी ट्रेनिंग शुरू की थी।
आदित्य ने एलीट मेन्स नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और 65 किलोग्राम भार वर्ग के राष्ट्रीय चैंपियन बनकर टीम में अपनी जगह मजबूत की। इसके बाद उन्होंने एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भी हिस्सा लिया और उज्बेकिस्तान तथा मंगोलिया के कड़े मुक्केबाजों के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन किया। इन्हीं शानदार प्रदर्शनों के आधार पर उनका चयन कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए 22 सदस्यीय भारतीय दल में हुआ है। आदित्य का साफ कहना है कि उनका एकमात्र लक्ष्य देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।
आपको बता दें कि कॉमनवेल्थ गेम्स का 23वां संस्करण 23 जुलाई से 2 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में खेला जाएगा। इन खेलों की शुरुआत साल 1930 में हुई थी। भारत अब तक आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स के पिछले कुल 22 एडिशन्स में से सिर्फ 4 (1930, 1950, 1962 और 1986) एडिशन्स का हिस्सा नहीं रहा है। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने दूसरे एडिशन (1934) में डेब्यू किया था। तब भारत की तरफ से 6 सदस्यों का दल गया था जिसने 10 ट्रैक एंड फील्ड और एक रेसलिंग कॉम्पिटीशन में हिस्सा लिया था। अपने डेब्यू एडिशन में ही भारत ने 1 पदक जीता था। यह कांस्य पदक पहलवान राशिद अनवर ने 74 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में देश को दिलाया था। राशिद अनवर कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत के पहले पदक विजेता हैं। खेलों के इस इतिहास में भारत हमेशा से काफी लोकप्रिय रहा है।