
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी (PC: ANI)
Congress MP Imran Pratapgarhi Statement:उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में बड़ा बयान देते हुए कहा था कि, "जो दल उत्तर प्रदेश में BJP की सरकार को तीसरी बार सत्ता में आने से रोकना चाहते हैं, वे AIMIM के साथ गठबंधन के लिए आगे आएं। हम उनकी पार्टी से गठबंधन के लिए तैयार है।" अब असदुद्दीन ओवैसी के गठबंधन प्रस्ताव पर कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने प्रतिक्रिया देते हुए निशाना साधा है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि, आपने 2013 में गठबंधन क्यों छोड़ा था? पहले इस सवाल का जवाब दीजिए।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने असदुद्दीन ओवैसी के गठबंधन के प्रस्ताव पर सवाल उठाया है। ओवैसी ने यूपी में समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन की संभावना जताई है। इसके जवाब में इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि गठबंधन की बात आगे बढ़ाने से पहले ओवैसी को यह बताना चाहिए कि उन्होंने 2013 में गठबंधन क्यों छोड़ा था? इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, "आपने 2013 में गठबंधन क्यों छोड़ा था? पहले इस सवाल का जवाब दीजिए। इसके बाद इस बात पर चर्चा होगी कि आपके दिए गए प्रस्ताव पर विचार करना है या नहीं। पहले बताइए कि 2013 में गठबंधन क्यों छोड़ा था?"
कांग्रेस सांसद ने दिल्ली में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाताओं को जारी किए जा रहे नोटिस पर भी सवाल खड़े किए हैं। SIR नोटिस के मुद्दे पर बोलते हुए कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि इस देश के नागरिकों की गरिमा और सम्मान को नोटिस के जरिए मापने का जो बहाना बनाया जा रहा है, वह बेहद शर्मनाक है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि रेखा गुप्ता जी को कोई नोटिस मिलता है और सब कुछ 1 मिनट या 1 घंटे में हल हो जाता है, तो क्या यह अधिकार इस देश के किसी गरीब व्यक्ति को भी मिल सकता है। बिल्कुल नहीं।
गौरतलब है कि दिल्ली में SIR के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई प्रमुख मतदाताओं को रिकॉर्ड में विसंगतियों के चलते नोटिस जारी किए गए थे। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार रेखा गुप्ता के मामले में दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद उनकी मतदाता सूची की प्रविष्टि को मान्य कर दिया गया है।
इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि देश में इस पूरे मामले की गहराई से समीक्षा और चर्चा की जरूरत है। उनका कहना था कि अगर बड़े नेता और वकील भी निर्वाचन आयोग की जांच के दायरे में आ रहे हैं, तो आम नागरिकों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि SIR को लेकर देश में व्यापक बहस होनी चाहिए और यह देखा जाना चाहिए कि आम मतदाता को अपने रिकॉर्ड और नागरिक अधिकारों से जुड़े मामलों में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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Updated on:
21 Sept 2026 04:49 pm
Published on:
21 Sept 2026 04:02 pm
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