लखनऊ

यूपी चुनाव 2027: अंबेडकरनगर में सपा ने 5 में से 4 सीटों पर दर्ज की थी शानदार जीत, जानिए पूरा चुनावी समीकरण

UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। ऐसे में 2022 के विधानसभा चुनाव के नतीजे एक बार फिर चर्चा में हैं। चुनाव से पहले अंबेडकरनगर जिले के राजनीतिक समीकरण को समझना काफी अहम हैं। पिछली बार यहां 5 में से 4 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की थी। आइए समझते हैं अंबेडकरनगर की पांचों विधानसभा सीटों का चुनावी समीकरण।
3 min read
• •
Updated: 2 Nov 2026, 12:39 PM IST
UP Assembly Election 2027, Ambedkar Nagar, Samajwadi Party, BJP, UP Politics, Ambedkar Nagar Seats, UP News
2022 के नतीजों से समझें अंबेडकरनगर के चुनावी समीकरण (ANI Photo)

UP Ambedkar Nagar Assembly Seats Results 2022: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। ऐसे में अंबेडकरनगर जिले की सियासत काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। पिछले विधानसभा चुनाव 2022 में अंबेडकरनगर जिले में समाजवादी पार्टी ने बेहद शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना दबदबा कायम किया था। जिले की पांच विधानसभा सीटों में से चार पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी जबकि केवल एक सीट पर भाजपा को संतोष करना पड़ा था। अकबरपुर आलापुर जलालपुर और टांडा में सपा प्रत्याशियों ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को करारी शिकस्त दी थी। वहीं, कटेहरी सीट पर भाजपा और निषाद पार्टी के गठबंधन प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी। आइए जानते हैं अंबेडकरनगर की पांचों विधानसभा सीटों पर 2022 के चुनाव में क्या नतीजे रहे और राजनीतिक समीकरण किस तरह बदले।

Akbarpur Assembly Seat: अकबरपुर विधानसभा सीट

अंबेडकरनगर जिले की अकबरपुर विधानसभा सीट राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जाती है। यहां से समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता राम अचल राजभर ने जीत हासिल की थी। उन्होंने भाजपा के धर्मराज निषाद, BSP के चंद्रप्रकाश वर्मा और कांग्रेस की प्रियंका जायसवाल को पीछे छोड़ते हुए बड़ी जीत दर्ज की थी। यहां दलित मतदाताओं की अच्छी संख्या होने के साथ ही ब्राह्मण कुर्मी राजभर और निषाद समुदाय के मतदाता भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। अकबरपुर में बसपा का भी मजबूत जनाधार रहा है और यहां से मायावती भी सांसद चुनी जा चुकी हैं।

Alapur Assembly Seat: आलापुर विधानसभा सीट

आलापुर विधानसभा सीट पर भी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी त्रिभुवन दत्त ने जीत का परचम फहराया था। इस सीट पर भाजपा की ओर से त्रिवेणी राम और BSP से केशरा देवी गौतम चुनावी मैदान में थीं। त्रिभुवन दत्त ने कड़े मुकाबले में भाजपा से यह सीट छीन ली थी। आलापुर क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। यहां दलित और यादव मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है जो चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं। वर्ष 2017 में इस सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की थी लेकिन 2022 में सपा ने वापसी की।

Jalalpur Assembly Seat: जलालपुर विधानसभा सीट

जलालपुर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के राकेश पांडेय ने शानदार जीत दर्ज की थी। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार राजेश सिंह को 13630 मतों के अंतर से पराजित किया था। इस सीट पर सपा और बसपा के बीच ही सीधा मुकाबला देखने को मिला था जबकि भाजपा प्रत्याशी सुभाष चंद्र राय तीसरे स्थान पर रहे थे। इस सीट पर स्थानीय विकास, रोजगार, किसानों की समस्याएं और जातीय समीकरण चुनाव के जरूरी मुद्दे रहते हैं। नतीजों ने जिले में सपा की स्थिति को और मजबूत किया।

Katehari Assembly Seat: कटेहरी विधानसभा सीट

कटेहरी विधानसभा सीट पर मुकाबला जिले की अन्य सीटों से बिल्कुल अलग और बेहद दिलचस्प रहा था। जिले की यही एकमात्र सीट थी जहां सपा को हार का सामना करना पड़ा था। यहां भाजपा और निषाद पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी अवधेश कुमार ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता लालजी वर्मा को हराया था। कटेहरी विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण और स्थानीय राजनीतिक प्रभाव हमेशा से चुनावी परिणामों को प्रभावित करते रहे हैं।

Tanda Assembly Seat: टांडा विधानसभा सीट

अंबेडकरनगर जिले की टांडा विधानसभा सीट पर भी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी राममूर्ति वर्मा ने बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्होंने भाजपा के कपिल देव को 32097 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया था। इस सीट पर BSP की शबाना खातून तीसरे स्थान पर रही थीं। टांडा में स्थानीय विकास रोजगार सड़क बिजली बुनकरों की समस्याएं और जातीय समीकरण चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं। 2027 के चुनाव में भी सभी पार्टियों की नजर इस अहम सीट पर रहेगी।

2027 के चुनाव में अंबेडकरनगर का समीकरण क्यों होगा अहम?

2022 के नतीजों में अंबेडकरनगर की पांच में से चार सीटों पर सपा की जीत ने जिले में पार्टी की मजबूत स्थिति दिखाई थी। वहीं, कटेहरी में भाजपा और निषाद पार्टी गठबंधन की जीत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिले की सभी सीटों पर मुकाबले के समीकरण एक जैसे नहीं थे। अब 2027 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के सामने पिछले प्रदर्शन को दोहराने या उसमें बदलाव करने की चुनौती होगी। हालांकि, 2022 के नतीजों के आधार पर 2027 का परिणाम तय नहीं माना जा सकता। उम्मीदवारों, गठबंधन, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के रुख से चुनावी समीकरण बदल भी सकते हैं।