
UP Assembly Monsoon Session 2026: उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार 3 अगस्त से शुरू हो गया है। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने इस छोटे सत्र को लेकर अपनी आशंकाएं जाहिर की हैं। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों को सावधान करते हुए अहम सलाह दी है। बसपा प्रमुख ने कहा है कि यह अति अल्पकालीन सत्र सिर्फ हंगामे की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए बल्कि इसे जनता की भलाई और देश हित के लिए पूरी तरह समर्पित होना चाहिए।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यूपी विधानमंडल का मानसून सत्र 3 अगस्त से शुरू हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार कुल 4 दिन के इस सत्र में अगले दिन 4 अगस्त को राज्य सरकार अपना अनुपूरक बजट पेश करेगी। मायावती ने उम्मीद जताई कि संसद के मौजूदा सत्र की तरह यूपी का यह सत्र भी केवल संकीर्ण दलगत राजनीति, खींचतान, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे की भेंट न चढ़ जाए। उन्होंने कहा कि इस सत्र को ज्वलंत जन समस्याओं पर केंद्रित होना चाहिए।
बसपा सुप्रीमो ने अफसरशाही पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ब्यूरोक्रेसी को संविधान की शपथ के प्रति जवाबदेह बनाने और जनकल्याण के लिए उत्तरदायी बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि, विधायिका का संवैधानिक प्रभाव किसी भी तरह से कम न हो। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि लगातार घटते जा रहे इन सत्रों से क्या विधानसभा अपना असली उद्देश्य हासिल कर पाएगी या यह केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी। मायावती ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती और अफसरशाही पर लगाम कसने के लिए सरकार और विपक्ष दोनों का गंभीर संसदीय आचरण बहुत जरूरी है।
आपको बता दें कि यूपी सरकार इस चार दिन के छोटे सत्र में अपनी उपलब्धियां और विकास कार्य गिनाने की तैयारी में है। वहीं, दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरने की पूरी रणनीति बना ली है। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी जैसे अहम मुद्दों पर विपक्ष सरकार से कड़े सवाल पूछ सकता है। माना जा रहा है कि मंगलवार को सदन में अनुपूरक बजट पेश होने के साथ ही भारी सियासी घमासान शुरू हो जाएगा।
सत्र के पहले दिन दिवंगत नेताओं और प्रमुख हस्तियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। दूसरे दिन सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी। तीसरे दिन विधायी कार्य होंगे। अंतिम दिन अनुपूरक अनुदानों पर चर्चा, मांगों पर मतदान और विनियोग विधेयक पारित कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।बसपा प्रमुख ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की मजबूती के लिए सरकार और विपक्ष दोनों का जिम्मेदार संसदीय आचरण जरूरी है। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है।