UP Budget State Employees: उत्तर प्रदेश बजट 2026-27 से पहले राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने कर्मचारियों और शिक्षकों से जुड़ी 14 मांगों का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। आठवें वेतन आयोग, पेंशन सुधार, संविदा कर्मियों के नियमितीकरण और महिला कर्मचारियों की सुविधाओं जैसे मुद्दों को बजट में शामिल करने की अपेक्षा जताई गई है।
UP Budget: लखनऊ में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने उत्तर प्रदेश सरकार के आगामी बजट 2026–27 को लेकर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। परिषद के अध्यक्ष जे. एन. तिवारी ने मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री को कर्मचारियों, शिक्षकों तथा संविदा कर्मियों से जुड़ी 14 महत्वपूर्ण मांगों का प्रस्ताव भेजा है। 12 फरवरी को प्रस्तुत होने वाले बजट से पहले यह पहल राज्य भर के लाखों कर्मचारियों की अपेक्षाओं को नई दिशा देती नजर आ रही है।
तिवारी ने कहा कि वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में यह बजट चुनाव पूर्व बजट की श्रेणी में आएगा। स्वाभाविक रूप से इससे आम जनता, कर्मचारियों, शिक्षकों, मजदूरों और वंचित वर्गों की उम्मीदें बढ़ी हुई हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि बजट में लोक कल्याण की स्पष्ट भावना झलकनी चाहिए। सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में कर्मचारियों की भूमिका को देखते हुए उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता में होना चाहिए।
परिषद का मानना है कि प्रदेश के कर्मचारी ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को विकसित राज्य बनाने के लक्ष्य में कर्मचारियों की भूमिका बेहद अहम होगी। इसलिए बजट में उनकी आर्थिक, सामाजिक और कार्य संबंधी समस्याओं का समाधान जरूरी है।
संयुक्त परिषद द्वारा भेजे गए प्रस्तावों में कई अहम मुद्दे शामिल हैं:
1. आठवें वेतन आयोग के लिए धन प्रावधान
राज्य कर्मचारियों के वेतन ढांचे में सुधार के लिए आठवें वेतन आयोग से संबंधित व्यय का बजट में प्रावधान करने की मांग की गई है।
2. पेंशन सुधार
राज्य स्तर पर पेंशन व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने के लिए सुधार लागू करने का प्रस्ताव।
3. नगर प्रतिकर भत्ता बहाली
कोविड काल में रोके गए नगर प्रतिकर भत्ते को पुनः बहाल करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है।
4. रोजगार सृजन
युवाओं के लिए अधिक सरकारी नौकरियों के सृजन और रिक्त पदों को शीघ्र भरने का आग्रह।
5. संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण
वर्ष 2001 के बाद नियुक्त संविदा कर्मियों के नियमितीकरण हेतु स्पष्ट नियमावली बनाने की मांग।
6. आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए निगम
आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा हेतु गठित निगम को प्रभावी ढंग से लागू करने का सुझाव।
7. आशा बहुओं के लिए फिक्स मानदेय
आशा कार्यकर्ताओं को निश्चित मासिक मानदेय देने की मांग, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
8. महिला कर्मियों की सुरक्षा
महिला कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके अधिकारों की रक्षा हेतु ठोस उपाय।
9. कर्मचारी कल्याण आयोग
कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य स्तर पर कर्मचारी कल्याण आयोग गठित करने का प्रस्ताव।
10. निजीकरण पर रोक
विभिन्न विभागों में बढ़ते निजीकरण पर नियंत्रण लगाने की मांग।
11. नगरीय परिवहन सुदृढ़ीकरण
नई बसों की खरीद, संविदा चालकों-परिचालकों का समायोजन और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाने की पहल।
संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुणा शुक्ला ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल नीतियों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे व्यवहार में उतारा जाए। उन्होंने महिला संविदा कर्मियों के लिए चाइल्ड केयर लीव, वार्षिक वेतन वृद्धि और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की मांग उठाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव पूर्व बजट होने के कारण सरकार कर्मचारी हितों को प्राथमिकता दे सकती है। यदि इन मांगों को आंशिक या पूर्ण रूप से शामिल किया जाता है, तो इससे कर्मचारियों के मनोबल में वृद्धि होगी और प्रशासनिक व्यवस्था और मजबूत हो सकेगी। अध्यक्ष जे. एन. तिवारी ने आशा जताई कि सरकार कर्मचारियों की न्यायोचित समस्याओं पर गंभीरता से विचार करेगी। उनका कहना है कि कर्मचारियों को सशक्त बनाए बिना प्रदेश को विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य अधूरा रहेगा।