लखनऊ

UP Business Park Policy: निजी कंपनियां भी बनाएंगी बिजनेस पार्क, 45 साल की लीज पर मिलेगी जमीन, युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते

UP Business Park Policy के तहत निजी कंपनियां यूपी में बिजनेस पार्क विकसित कर सकेंगी। 45 साल की लीज पर जमीन, 100% स्टांप ड्यूटी छूट और IT-GCC के लिए 50% क्षेत्र आरक्षित रखने का प्रावधान है।
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Aug 12, 2026
UP Business Park Policy
कंपनियां यूपी में बिजनेस पार्क विकसित कर सकेंगी सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

Uttar Pradesh Business Park Policy:उत्तर प्रदेश में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने निजी क्षेत्र को बड़ा मौका दिया है। अब निजी कंपनियां और निवेशक प्रदेश में बिजनेस पार्क विकसित कर सकेंगे। इसके लिए सरकार ने निजी बिजनेस पार्क नीति जारी की है, जिसमें जमीन से लेकर मंजूरी तक कई तरह की सुविधाओं का प्रावधान किया गया है।

इस नीति का मकसद सिर्फ बड़े कॉरपोरेट प्रोजेक्ट खड़े करना नहीं, बल्कि एक ही जगह पर आईटी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), नॉलेज बेस्ड कंपनियों, रिटेल और स्किल डेवलपमेंट से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

45 साल की लीज पर मिलेगी जमीन

नई नीति के तहत पात्र निजी डेवलपर्स को बिजनेस पार्क विकसित करने के लिए जमीन 45 साल के पट्टे पर दी जाएगी। जरूरत और पात्रता के आधार पर इसे अगले 45 साल के लिए बढ़ाया भी जा सकेगा। सरकार का मानना है कि लंबी लीज अवधि से निजी निवेशकों को बड़े प्रोजेक्ट लगाने और उन्हें लंबे समय तक संचालित करने में सुविधा मिलेगी।

कौन-कौन विकसित कर सकेगा बिजनेस पार्क?

नीति के तहत बिजनेस कंसोर्टियम, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) और सूचीबद्ध कंपनियां बिजनेस पार्क विकसित कर सकेंगी। हालांकि, इसके लिए कुछ वित्तीय और अनुभव संबंधी शर्तें भी रखी गई हैं। संबंधित कंपनी या कंसोर्टियम की न्यूनतम नेटवर्थ 1000 करोड़ रुपये होनी चाहिए। इसके अलावा पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसत सालाना टर्नओवर कम से कम 500 करोड़ रुपये होना जरूरी है। रियल एस्टेट डेवलपमेंट या कमर्शियल बिजनेस के क्षेत्र में कम से कम सात साल का अनुभव रखने वाले समूहों को भी पात्रता दी गई है।

कम से कम 10 एकड़ में बनेगा पार्क

बिजनेस पार्क का न्यूनतम क्षेत्रफल 10 एकड़ रखा गया है। जरूरत के अनुसार इसे 20 से 30 एकड़ तक विकसित किया जा सकता है। नीति में पार्क के अंदर जमीन के इस्तेमाल को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। कम से कम 50 फीसदी क्षेत्र आईटी कंपनियों, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और नॉलेज बेस्ड सर्विस यूनिट्स के लिए रखना होगा। वहीं अधिकतम 10 फीसदी हिस्से में फूड कोर्ट, रिटेल आउटलेट और कर्मचारियों व आगंतुकों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।

सिर्फ ऑफिस नहीं, स्किल सेंटर भी होंगे

बिजनेस पार्क में केवल कंपनियों के कार्यालय बनाने पर जोर नहीं दिया गया है। शेष हिस्से में ट्रेनिंग सेंटर और स्किल डेवलपमेंट सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसका सीधा फायदा युवाओं को मिल सकता है। कंपनियों की जरूरत के हिसाब से युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार के लिए तैयार किया जा सकेगा।

सरकार देगी जमीन, मंजूरी के लिए सिंगल विंडो

सरकार निजी बिजनेस पार्क के लिए उपयुक्त जमीन चिन्हित करेगी। औद्योगिक विकास प्राधिकरण के माध्यम से निजी डेवलपर्स को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी और इसके लिए नीलामी की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए जरूरी अनुमोदन और स्वीकृतियां देने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा जमीन के रजिस्ट्रेशन पर डेवलपर कंपनी को स्टांप ड्यूटी में 100 फीसदी छूट का प्रावधान भी किया गया है।

तीन साल में करना होगा विकास

10 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित बिजनेस पार्क को अधिकतम तीन साल में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। डेवलपर को भवन निर्माण से जुड़ी उपविधियों के अनुसार लेआउट, आर्किटेक्चर और डिजाइन तैयार करना होगा। साथ ही संबंधित परियोजना के लिए जरूरी एनओसी, परमिट और अन्य स्वीकृतियां लेना भी डेवलपर की जिम्मेदारी होगी।

यूपी में निवेश और रोजगार को मिल सकता है बढ़ावा

महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बिजनेस पार्क मॉडल पहले से देखने को मिला है। अब उत्तर प्रदेश में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। अगर नीति के तहत प्रस्तावित पार्क जमीन पर तेजी से उतरते हैं, तो इससे आईटी और कॉरपोरेट निवेश के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार, स्किल डेवलपमेंट और नई कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

Updated on:
12 Aug 2026 04:28 pm
Published on:
12 Aug 2026 04:24 pm