लखनऊ

UP IAS Transfer: यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कई आईएएस अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारियां

UP Government Reshuffles IAS Officers:  उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आईएएस अधिकारियों का बड़ा फेरबदल किया है। कई वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां देकर विभागीय कार्यों में तेजी लाने की पहल की गई।

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Feb 28, 2026
यूपी में आईएएस अफसरों का बड़ा फेरबदल, अहम विभागों में नई तैनाती (फोटो सोर्स : Government WhatsApp News Group)

UP IAS Transfer News: उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में महत्वपूर्ण फेरबदल किया है। शासन स्तर पर जारी आदेश के अनुसार कई अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिससे विभिन्न विभागों के कार्यों में समन्वय और गति लाने की उम्मीद जताई जा रही है।

राज्य सरकार द्वारा किए गए इस प्रशासनिक बदलाव को आगामी विकास योजनाओं, कल्याणकारी कार्यक्रमों तथा विभागीय कार्यों की बेहतर निगरानी से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण, पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांगजन सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई प्रशासनिक सक्रियता देखने को मिल सकती है।

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बाबू लाल मीना को अतिरिक्त प्रभार

शासन के आदेश के तहत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बाबू लाल मीना को खाद्य प्रसंस्करण विभागाध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इससे पहले भी वे विभिन्न प्रशासनिक पदों पर अपनी दक्षता और कार्यशैली के लिए जाने जाते रहे हैं। खाद्य प्रसंस्करण विभाग प्रदेश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाता है।

प्रदेश सरकार की प्राथमिकता किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन तथा खाद्य उद्योगों को प्रोत्साहन देने पर केंद्रित है। ऐसे में मीना को यह जिम्मेदारी सौंपना सरकार की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत कृषि और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके अनुभव का लाभ लेते हुए प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन को नई गति मिल सकती है।

राजेश कुमार सिंह को अहम जिम्मेदारी

आईएएस अधिकारी राजेश कुमार सिंह को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग तथा दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग का अतिरिक्त जिम्मा दिया गया है। दोनों ही विभाग सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग राज्य में शिक्षा, छात्रवृत्ति, प्रशिक्षण एवं आर्थिक सहायता से जुड़ी योजनाओं को संचालित करता है, जबकि दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग विशेष जरूरतों वाले नागरिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और पुनर्वास कार्यक्रमों को लागू करता है।

सरकार की मंशा है कि इन योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुंचाया जाए। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सिंह को इन विभागों का अतिरिक्त प्रभार देने का उद्देश्य योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, समयबद्धता और निगरानी को मजबूत करना है।

राजकमल यादव बने विशेष सचिव

इसी क्रम में आईएएस अधिकारी राजकमल यादव को उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग में विशेष सचिव नियुक्त किया गया है। उद्यान विभाग प्रदेश में फल, सब्जी, पुष्प एवं बागवानी उत्पादन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उत्तर प्रदेश में बागवानी क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और सरकार निर्यात क्षमता बढ़ाने, कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क विकसित करने तथा प्रसंस्करण उद्योगों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है। यादव की नियुक्ति को विभागीय योजनाओं के प्रभावी संचालन और नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रशासनिक सुधार की व्यापक रणनीति

राज्य सरकार समय-समय पर अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव कर प्रशासनिक ऊर्जा बनाए रखने की नीति अपनाती रही है। शासन का मानना है कि जिम्मेदारियों में बदलाव से नई सोच, कार्यकुशलता और जवाबदेही बढ़ती है। इसके साथ ही विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिलती है। हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश में निवेश, बुनियादी ढांचा विकास, कृषि आधुनिकीकरण तथा सामाजिक कल्याण योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे में अनुभवी अधिकारियों को प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी देकर सरकार योजनाओं की गति तेज करना चाहती है।

विकास योजनाओं पर रहेगा फोकस

प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि यह फेरबदल केवल औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि विकास योजनाओं को धरातल पर तेजी से लागू करने की रणनीतिक पहल है। खाद्य प्रसंस्करण, उद्यानिकी और सामाजिक कल्याण से जुड़े विभाग सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े हुए हैं। नई जिम्मेदारियों के साथ अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे विभागीय योजनाओं की नियमित समीक्षा करेंगे, लंबित परियोजनाओं को समय सीमा में पूरा करेंगे और जनता तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करेंगे।

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