
UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में बहुजन समाज पार्टी ने तेजी लानी शुरू कर दी है। पार्टी अब तक करीब 10 संभावित प्रत्याशियों के नाम सार्वजनिक कर चुकी है और संगठनात्मक गतिविधियां भी बढ़ाई जा रही हैं। हालांकि इन तैयारियों के बीच पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की गैरमौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि आगामी चुनाव में आकाश आनंद की क्या भूमिका होगी। यही वजह है कि संगठन के भीतर कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में आकाश आनंद की सक्रिय भागीदारी ना होना बसपा के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। भले ही आकाश आनंद ने अब तक कोई चुनाव नहीं लड़ा हो, लेकिन युवा मतदाताओं के बीच उनकी पहचान लगातार बढ़ी है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद जैसे युवा नेता के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए बसपा को भी एक मजबूत युवा चेहरा मैदान में उतारना होगा।
पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी से बाहर किए जाने और बाद में वापसी के बाद आकाश आनंद की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया था। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति से दूरी बनाए रखने की रणनीति अपनाई थी, लेकिन अब जब विधानसभा चुनाव की तैयारियां निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही हैं, तब भी उनकी भूमिका स्पष्ट न होने से संगठन के भीतर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हिंदी पट्टी के जिन राज्यों में कभी BSP का मजबूत जनाधार रहा है, वहां युवा नेतृत्व को सक्रिय न करना भविष्य की राजनीति पर असर डाल सकता है।
दूसरी ओर BSP एक बार फिर सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी नेतृत्व ब्राह्मण वोट बैंक को अपने साथ जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक किसी बड़े ब्राह्मण चेहरे का पार्टी में शामिल होना संभव नहीं हो सका है। हाल के दिनों में BSP में शामिल होने वाले अधिकांश नेता मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से जुड़े रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बसपा वर्ष 2007 के सफल सोशल इंजीनियरिंग मॉडल को दोहराने की कोशिश कर रही है। उस समय पार्टी में ब्राह्मण नेताओं की मजबूत मौजूदगी थी और राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा की भूमिका काफी प्रभावशाली मानी जाती थी। समय के साथ अधिकांश प्रमुख ब्राह्मण नेता पार्टी से अलग हो चुके हैं और अब सतीश चंद्र मिश्रा ही इस वर्ग का सबसे प्रमुख चेहरा माने जाते हैं।
ब्राह्मण समाज को संदेश देने के उद्देश्य से BSP ने विधानसभा चुनाव के लिए जालौन की माधोगढ़ सीट से आशीष पांडेय को पहला प्रत्याशी घोषित किया है। इसके साथ ही पार्टी नेतृत्व ने यह भी संकेत दिया है कि आगामी चुनाव में ब्राह्मण समुदाय को बड़ी संख्या में टिकट दिए जाएंगे। माना जा रहा है कि बसपा सामाजिक संतुलन और नए समीकरणों के जरिए अपने पारंपरिक वोट बैंक को फिर से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में BSP के लिए दो बड़े सवाल सबसे अहम रहेंगे। पहला, आकाश आनंद को चुनावी रणनीति में कितनी जिम्मेदारी मिलती है और दूसरा, पार्टी ब्राह्मण समेत अन्य सामाजिक वर्गों के बीच अपनी स्वीकार्यता कितनी बढ़ा पाती है। इन दोनों पहलुओं पर ही आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा की रणनीति और संभावित प्रदर्शन काफी हद तक निर्भर करेगा।