लखनऊ

76 साल में यूपी की गद्दी पर दिखा इस जाति का दबदबा, राजपूत या ब्राह्मण कौन आगे?

UP Day 2026 : आज यूपी दिवस है। 24 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश 76 साल का हो चुका है। यूपी की राजनीति में सत्ता के कई चेहरे बदले, लेकिन सियासत में ब्राह्मण और राजपूत दबदबा भारी रहा है।

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Jan 24, 2026
आज यूपी दिवस है! 24 जनवरी 2026 ,फोटो सोर्स -X

UP Day 2026 : आज यूपी दिवस है! 24 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश 76 साल का हो गया है। वहीं आज यूपी की गद्दी को लेकर बात करने जा रहे हैं और देखेंगे कि कैसे ब्राह्मण और राजपूत समाज का दबदबा यूपी की सियासत में देखने को मिला। प्रदेश को कुल 21 मुख्यमंत्री मिले हैं। इन मुख्यमंत्रियों के इतिहास पर नजर डालें तो साफ दिखता है कि सबसे लंबे समय तक सत्ता पर ब्राह्मण समाज का वर्चस्व रहा है। इसके बाद ठाकुर समाज सत्ता में आया, फिर यादव और वैश्य समाज ने भी सरकार चलाई। बीते 3 दशकों में ब्राह्मण समाज सत्ता से लगभग बाहर हो गया और राजनीतिक दलों के लिए वह एक मजबूत वोट बैंक भर बनकर रह गया है।

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ब्राह्मण विधायकों की बैठक से बढ़ी सियासी हलचल

विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान 23 दिसंबर को लखनऊ में कुशीनगर से बीजेपी विधायक पंचानंद पाठक के सरकारी आवास पर ब्राह्मण समाज से जुड़े विधायकों की बैठक हुई। इस बैठक में 40 से ज्यादा बीजेपी ब्राह्मण विधायक की मौजूदगी रही। बैठक के बाद यूपी की राजनीति में ब्राह्मण को लेकर चर्चा तेज हो गई। बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इस तरह की बैठक पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्टी के संविधान में जातीय आधार पर बैठक करने का कोई नियम नहीं है।
वहीं जवाब में पंचानंद पाठक ने ट्वीट कर के कहा कि ब्राह्मण समाज हमेशा से समाज और सनातन धर्म का नेतृत्व करता आया है। इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहस और तेज हो गई।

आजादी के बाद कितने मुख्यमंत्री बने?

आजादी के बाद से अब तक यूपी में कुल 21 मुख्यमंत्री बने हैं। इनमें सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री ब्राह्मण समाज के रहे हैं। ब्राह्मणों के बाद ठाकुर समाज के मुख्यमंत्री सबसे अधिक बने हैं। वहीं यादव और वैश्य समाज से भी 3-3 मुख्यमंत्री बने, जबकि जाट, लोध, दलित और कायस्थ समाज से 1 -1 मुख्यमंत्री बने हैं।

ब्राह्मण का राज कितना रहा?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 1950 से 1989 तक का समय ब्राह्मण समाज के वर्चस्व का दौर माना जाता है। इस दौरान ब्राह्मण समाज से 6 मुख्यमंत्री बने। गोविंद बल्लभ पंत, सुचेता कृपलानी, कमलापति त्रिपाठी, हेमवती नंदन बहुगुणा, श्रीपति मिश्र और नारायण दत्त तिवारी ने प्रदेश की कमान संभाली। इनमें नारायण दत्त तिवारी तीन बार मुख्यमंत्री बने, जबकि गोविंद बल्लभ पंत दो बार मुख्यमंत्री रहे। करीब 23 साल तक यूपी की सत्ता ब्राह्मण समाज के हाथ में रही। इतना लंबे समय तक किसी दूसरे समाज के सीएम सत्ता में नहीं रहे, जिसके चलते 1950 से 1989 तक के समय को ब्राह्मण काल भी कहा जाता रहा है।

ठाकुर समाज का सियासी राज

ब्राह्मणों के बाद उत्तर प्रदेश की सत्ता पर सबसे ज्यादा समय तक ठाकुर समाज का राज रहा। ठाकुर समाज से त्रिभुवन नारायण सिंह, विश्वनाथ प्रताप सिंह और वीर बहादुर सिंह कांग्रेस की सरकार में मुख्यमंत्री बने। बाद में बीजेपी से राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। योगी आदित्यनाथ दूसरी बार मुख्यमंत्री हैं, जबकि बाकी नेता एक-एक बार CM रहे। करीब 17 साल तक प्रदेश की सत्ता ठाकुर समाज के हाथों में रही।

राजनीति और बड़ा सवाल

यूपी की राजनीति में जातीय समीकरणों के दौर चलता ही आ रहा है। ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आने वाले समय में ब्राह्मण समाज अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश करेगा। यूपी की सियासत में सत्ता का चेहरा बदला सकता है क्या ? लेकिन जाति का असर अब भी उतना ही मजबूत दिख रहा है।

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Published on:
24 Jan 2026 05:59 pm
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