लखनऊ

मायावती के दिल में कांग्रेस को लेकर इतनी तल्खी क्यों? BSP- कांग्रेस के रिश्तों में ‘दरार’ की वजह क्या है, यहां जानिए इनसाइड स्टोरी

Reason For Rift In BSP Congress: बसपा सुप्रीमो मायावती के दिल में कांग्रेस को लेकर तल्खी क्यों है? जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी।

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May 22, 2026
BSP- कांग्रेस के रिश्तों में 'दरार' की वजह क्या है? फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

Reason For Rift In BSP Congress: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुधवार सुबह एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी। कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और बाराबंकी से सांसद तनुज पुनिया अपने कुछ साथियों के साथ अचानक बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) के लखनऊ स्थित आवास पहुंच गए।

कांग्रेस नेताओं की कोशिश मायावती से मुलाकात करने की थी, लेकिन उन्हें बिना मिले ही वापस लौटना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

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कांग्रेस नेताओं ने क्या दी सफाई?

मामले ने तूल पकड़ा तो कांग्रेस नेताओं की तरफ से तत्काल सफाई सामने आई। सांसद तनुज पुनिया ने वीडियो जारी कर कहा कि कांग्रेस कार्यालय में बैठक खत्म होने के बाद वे मायावती का हालचाल और स्वास्थ्य जानने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि मायावती दलित समाज की वरिष्ठ नेता हैं और उनसे मिलने का कोई पूर्व निर्धारित कार्यक्रम नहीं था। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि यह सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात थी, किसी राजनीतिक गठबंधन या संदेश से इसका संबंध नहीं था।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात की कोशिश ने BSP और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर कई पुराने सवाल फिर जिंदा कर दिए हैं।

आखिर मायावती ने मुलाकात क्यों नहीं की?

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक मायावती फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं देना चाहतीं जिससे यह संदेश जाए कि वह किसी दल के साथ गठबंधन के मूड में हैं। बसपा सुप्रीमो पहले ही कई बार साफ कर चुकी हैं कि पार्टी 2027 का विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। ऐसे में कांग्रेस नेताओं से मुलाकात उनकी रणनीति के विपरीत संदेश दे सकती थी। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेताओं का अचानक पहुंचना BSP नेतृत्व को असहज कर गया, क्योंकि इससे गठबंधन की अटकलों को बल मिल सकता था।

BSP और कांग्रेस के रिश्तों में 'दरार' की वजह?

मायावती और कांग्रेस के रिश्ते हमेशा राजनीतिक जरूरत और आपसी अविश्वास के बीच झूलते रहे हैं। 1995 के गेस्ट हाउस कांड के बाद बसपा ने समाजवादी पार्टी से दूरी बनाई और 1996 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ तालमेल किया। हालांकि यह प्रयोग ज्यादा सफल नहीं रहा। BSP को लगा कि कांग्रेस का वोट बैंक उसके पक्ष में प्रभावी तरीके से ट्रांसफर नहीं हो रहा। 2004 लोकसभा चुनाव के बाद BSP ने कांग्रेस नीत यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दिया था। हालांकि बसपा औपचारिक रूप से गठबंधन में शामिल नहीं हुई। बाद में मायावती ने कांग्रेस से दूरी बना ली। उनका आरोप था कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में बसपा के दलित वोट बैंक को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

2019 में कांग्रेस नहीं, सपा बनी साथी

2019 लोकसभा चुनाव में मायावती ने अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया, लेकिन कांग्रेस को साथ नहीं लिया। उस समय मायावती ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि कांग्रेस और भाजपा की कार्यशैली में ज्यादा फर्क नहीं है। हालांकि बाद में सपा और बसपा का गठबंधन भी टूट गया।

कांग्रेस पर भरोसा क्यों नहीं करतीं मायावती?

बसपा की राजनीति हमेशा दलित वोट बैंक पर आधारित रही है। मायावती को लंबे समय से यह आशंका रही है कि कांग्रेस दलित वोटों को वापस हासिल करने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी की दलित आउटरीच राजनीति के बाद BSP और ज्यादा सतर्क हो गई। बसपा लगातार यह आरोप लगाती रही है कि कांग्रेस ने दशकों तक दलितों का सिर्फ वोट लिया, लेकिन नेतृत्व और सत्ता में बराबरी नहीं दी।

सीट शेयरिंग भी बड़ा विवाद

सूत्रों के मुताबिक, राजनीतिक समीकरणों में सीट बंटवारे का मुद्दा भी दोनों दलों के बीच दूरी की बड़ी वजह रहा है। मायावती हमेशा सम्मानजनक सीट शेयरिंग चाहती हैं, जबकि कांग्रेस यूपी में कमजोर होने के बावजूद बड़ी पार्टी की तरह व्यवहार करती रही है। बसपा का यह भी मानना रहा है कि गठबंधन में उसका वोट दूसरे दलों को ट्रांसफर हो जाता है, लेकिन बदले में उसे उतना फायदा नहीं मिलता।

2027 के लिए क्या है मायावती की रणनीति?

फिलहाल मायावती 2027 विधानसभा चुनाव के लिए ‘सर्व समाज’ मॉडल पर काम कर रही हैं। पार्टी दलित और ब्राह्मण समीकरण को फिर मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। इसी रणनीति के तहत संगठन में बड़े बदलाव भी शुरू हो चुके हैं। बुधवार को ही मायावती ने बुंदेलखंड प्रभारी लालाराम को हटाकर कई मंडलों में नए प्रभारियों की नियुक्ति की।

फिर क्यों उठ रही गठबंधन की चर्चा?

कांग्रेस और BSP के बीच गठबंधन की चर्चा इसलिए भी लगातार बनी हुई है क्योंकि भाजपा के खिलाफ विपक्षी वोटों के बंटने की आशंका विपक्षी दलों को परेशान कर रही है। कांग्रेस को लगता है कि BSP के साथ आने से दलित और मुस्लिम वोटों का बड़ा समीकरण बन सकता है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती दोनों दलों के बीच भरोसे की कमी है। मायावती फिलहाल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों से दूरी बनाकर चल रही हैं, जबकि कांग्रेस चाहती है कि INDIA गठबंधन जैसा मॉडल उत्तर प्रदेश में भी तैयार हो सके।

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