
Ex- ARTO Lalit Kumar: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। आगरा में तत्कालीन सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO ) रहे ललित कुमार के लखनऊ स्थित आवास पर दो दिनों तक चली सघन तलाशी में करोड़ों रुपये की कथित आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ है।
तलाशी के दौरान करीब 1 करोड़ 62 लाख रुपये नकद, लगभग 13 किलो सोना, करीब 9 किलो चांदी, करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियों के दस्तावेज, बैंक निवेश, लग्जरी वाहन और अन्य बहुमूल्य सामान बरामद हुए हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार कुल बरामद संपत्ति का मूल्य करीब 35 करोड़ रुपये आंका गया है। इस बड़ी कार्रवाई से प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति एक बार फिर स्पष्ट हुई है।
उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान द्वारा लंबे समय से ललित कुमार की संपत्तियों की जांच की जा रही थी। जांच के दौरान यह पाया गया कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है। इसके बाद वर्ष 2024 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) के तहत एंटी करप्शन थाना, कानपुर मंडल में मुकदमा दर्ज कराया गया। शासन के निर्देश पर इस मामले की विवेचना लखनऊ सेक्टर की विजिलेंस टीम को सौंपी गई।
जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर विवेचक ने न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त किया। न्यायालय की अनुमति मिलने के बाद 7 और 8 जुलाई 2026 को लखनऊ के अलीगंज स्थित आरोपी के आवास पर विशेष टीम ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया।
विजिलेंस टीम जब आरोपी के आवास पर पहुंची तो किसी को अंदाजा नहीं था कि अंदर से इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और बहुमूल्य संपत्ति बरामद होगी। तलाशी के दौरान टीम ने घर के अलग-अलग कमरों, अलमारियों, फर्नीचर और अन्य स्थानों की बारीकी से जांच की। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर पैकेट बनाकर छिपाकर रखे गए करीब 1 करोड़ 62 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार नकदी को बेहद सुनियोजित तरीके से अलग-अलग स्थानों पर छिपाया गया था। टीम ने पूरी सतर्कता और तकनीकी सहायता के साथ घर की गहन तलाशी ली, जिसके बाद यह नकदी बरामद हो सकी।
तलाशी अभियान के दौरान सबसे चौंकाने वाली बरामदगी सोने और चांदी के रूप में सामने आई। घर से लगभग 13 किलोग्राम सोने के बिस्किट, ईंटें और बहुमूल्य आभूषण बरामद किए गए। इसके साथ ही करीब 9 किलोग्राम चांदी के बिस्किट, ईंटें और आभूषण भी मिले।
इन सभी बहुमूल्य धातुओं का मूल्यांकन सरकार से मान्यता प्राप्त वैल्यूवर द्वारा कराया गया। प्रारंभिक मूल्यांकन के अनुसार केवल सोना और चांदी की कीमत ही करीब 20 करोड़ रुपये आंकी गई है। इतनी बड़ी मात्रा में कीमती धातुओं की बरामदगी ने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया।
तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में रजिस्ट्रियां, भूमि संबंधी दस्तावेज और निवेश के रिकॉर्ड भी मिले। जांच में सामने आया कि आरोपी ने लखनऊ, रायबरेली, बाराबंकी और नोएडा सहित कई स्थानों पर आवासीय भवन, भूखंड, कृषि भूमि और फ्लैटों में निवेश किया था।
लखनऊ के अलीगंज में दो प्रमुख संपत्तियां, बालागंज क्षेत्र में आवासीय भवन, मोहनलालगंज में कई भूखंड और कृषि भूमि, इस्माइलगंज एवं वृंदावन योजना में प्लॉट, नोएडा की प्रतिष्ठित परियोजनाओं में फ्लैट बुकिंग तथा बाराबंकी और रायबरेली में कृषि भूमि के दस्तावेज भी बरामद हुए। विजिलेंस के अनुसार इन अचल संपत्तियों का अनुमानित मूल्य करीब 13 करोड़ रुपये है। जांच एजेंसियां अब इन सभी संपत्तियों की खरीद के स्रोत, भुगतान के तरीके और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं।
तलाशी के दौरान दो कारें, जिनमें एक टोयोटा इनोवा और दूसरी हुंडई आई-20, बरामद की गईं। इसके अलावा एक लाइसेंसी रिवॉल्वर भी मिली। अधिकारियों को विभिन्न बैंकों, डाकघरों, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट में एक करोड़ रुपये से अधिक के निवेश संबंधी दस्तावेज भी मिले हैं।
टीम ने घर के भीतर मौजूद महंगे फर्नीचर, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, इंटीरियर और सजावट का भी विस्तृत विवरण तैयार किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मकान की साज-सज्जा पर भी भारी धनराशि खर्च की गई थी। इन सभी खर्चों और संपत्तियों को विवेचना का हिस्सा बनाया जा रहा है।
विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार तलाशी के दौरान बरामद नकदी, सोना, चांदी, चल एवं अचल संपत्तियों, बैंक निवेश, वाहनों और अन्य कीमती सामान का संयुक्त मूल्य करीब 35 करोड़ रुपये आंका गया है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह प्रारंभिक आकलन है। दस्तावेजों के सत्यापन, बाजार मूल्यांकन और वित्तीय जांच के बाद संपत्ति का वास्तविक मूल्य इससे अधिक भी हो सकता है।
विजिलेंस विभाग अब बरामद सभी दस्तावेजों, बैंक खातों, निवेश योजनाओं और संपत्तियों के स्रोत की विस्तृत जांच करेगा। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि संपत्ति अवैध आय से अर्जित की गई है या इसमें अन्य व्यक्तियों की भी भूमिका रही है, तो उनके खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।
जांच एजेंसियां आयकर रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, संपत्ति खरीद-बिक्री के दस्तावेज और अन्य वित्तीय लेनदेन का मिलान कर रही हैं। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं बेनामी निवेश या अन्य माध्यमों से संपत्ति अर्जित तो नहीं की गई।
इस बड़ी कार्रवाई की सफलता पर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एवं निदेशक, सतर्कता अधिष्ठान ने लखनऊ सेक्टर की पूरी विजिलेंस टीम की सराहना करते हुए एक लाख रुपये के पुरस्कार की घोषणा की है। अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी कार्रवाई को पूरी पारदर्शिता, कानूनी प्रक्रिया और पेशेवर तरीके से अंजाम देने में टीम ने उल्लेखनीय कार्य किया है। पुरस्कार का उद्देश्य ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों का मनोबल बढ़ाना और भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान को और प्रभावी बनाना है।