
एक लाख का इनामी शूटर सचिन कुमार गिरफ्तार (Source: Police Media Cell)
Lucknow Sandeep Singh Murder: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को राजधानी लखनऊ के चर्चित प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह हत्याकांड में बड़ी सफलता हाथ लगी है। करीब डेढ़ महीने से फरार चल रहे और एक लाख रुपये के इनामी आरोपी सचिन कुमार को STF और पीजीआई थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को किसान पथ ओवरब्रिज के नीचे डलौना के पास से उस समय दबोचा गया, जब वह किसी से मिलने पहुंचा था।
गिरफ्तारी के दौरान उसके कब्जे से हत्या में प्रयुक्त .32 बोर की अवैध पिस्टल, तीन जिंदा कारतूस, बिना नंबर प्लेट की घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल तथा नकदी बरामद की गई है। STF के अनुसार गिरफ्तार आरोपी ने पूछताछ में हत्या की पूरी साजिश का खुलासा किया है। उसने बताया कि प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह की हत्या सुनियोजित तरीके से की गई थी और इसके लिए कई दिनों तक रेकी की गई थी।
गौरतलब है कि 27 मई 2026 को पीजीआई थाना क्षेत्र में प्रॉपर्टी कारोबारी संदीप सिंह की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात उस समय हुई जब संदीप सिंह अपने कार्यालय पहुंचे थे। बाइक सवार बदमाशों ने उनके वाहन के पास पहुंचकर बेहद करीब से ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। गोली लगने से संदीप सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पूरे लखनऊ में हड़कंप मच गया था। मामले में पीजीआई थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ की विभिन्न इकाइयों को आरोपियों की तलाश में लगाया गया था।
एसटीएफ ने जांच के दौरान तेजी से कार्रवाई करते हुए 31 मई को मामले के मुख्य साजिशकर्ता समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 15 जून को शूटरों की व्यवस्था कराने वाले आरोपी गंगाराम यादव को भी गिरफ्तार कर लिया गया। घटना में शामिल मुख्य शूटर संजय उर्फ संजीव 27 जून को पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ था और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद से फरार आरोपी सचिन कुमार की तलाश लगातार जारी थी। उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
एसटीएफ की टीम लगातार लखनऊ, अयोध्या, अंबेडकर नगर, बस्ती, आजमगढ़ सहित महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के संभावित ठिकानों पर आरोपी की तलाश कर रही थी। इसी बीच 8 जुलाई को मुखबिर से सूचना मिली कि फरार आरोपी सचिन कुमार किसी व्यक्ति से मिलने के लिए पीजीआई क्षेत्र के डलौना इलाके में आने वाला है। सूचना मिलते ही एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर इलाके की घेराबंदी कर दी। देर रात करीब 11:15 बजे आरोपी को किसान पथ ओवरब्रिज के नीचे से गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में सचिन कुमार ने हत्या की पूरी साजिश का खुलासा किया। उसने बताया कि हत्या के समय वह मोटरसाइकिल चला रहा था, जबकि पीछे बैठे शूटर संजय ने संदीप सिंह पर गोलियां चलाई थीं। उसके मुताबिक संदीप सिंह की हत्या का कारण दिनेश यादव और संदीप सिंह के बीच पुरानी दुश्मनी थी। दिनेश यादव किसी भी कीमत पर संदीप सिंह की हत्या करवाना चाहता था। इसी दौरान उसके ड्राइवर मुकर्रबीन ने उसकी मुलाकात गंगाराम यादव से कराई, जिसके अपराध जगत के कई लोगों से संपर्क थे।
सचिन ने बताया कि गंगाराम यादव ने उसकी और शूटर संजय की मुलाकात दिनेश यादव से कराई। मुलाकात के दौरान संजय को हत्या के लिए एक लाख रुपये एडवांस दिए गए थे, जबकि बाकी रकम काम पूरा होने के बाद देने की बात तय हुई थी। पूछताछ में यह भी सामने आया कि अयोध्या के हिस्ट्रीशीटर दिलीप कुमार वर्मा ने शूटर संजय को हत्या के लिए हथियार उपलब्ध कराए थे। दिलीप ने हत्या के बाद बाकी रकम दिलाने का भी भरोसा दिया था। सचिन ने बताया कि उसे भी इस काम के लिए दो लाख रुपये मिलने वाले थे।
एसटीएफ के अनुसार आरोपियों ने हत्या से पहले कई बार लखनऊ आकर संदीप सिंह की गतिविधियों पर नजर रखी। दिनेश यादव ने उन्हें संदीप सिंह का घर, कार्यालय, आने-जाने का रास्ता, गाड़ियों के नंबर और रंग तक की जानकारी दी थी। रेकी के लिए आरोपियों ने अमीनाबाद स्थित एक ऑटोमोबाइल शोरूम से सफेद रंग की अपाचे मोटरसाइकिल खरीदी थी। घटना से पहले ही मोटरसाइकिल की नंबर प्लेट हटा दी गई थी ताकि पहचान न हो सके।
सचिन ने बताया कि 20 मई को दोनों लखनऊ पहुंचे थे, लेकिन कई दिनों तक उन्हें हत्या का सही मौका नहीं मिला। आखिरकार 27 मई को संजय ने कहा कि अब और इंतजार नहीं किया जा सकता। दोनों दीनदयाल पार्क के पास से संदीप सिंह की कार का पीछा करने लगे। जैसे ही संदीप सिंह अपने कार्यालय के बाहर कार से उतरे, सचिन ने मोटरसाइकिल उनकी कार के पास रोक दी। पीछे बैठे संजय ने उतरते ही बेहद करीब से संदीप सिंह के सीने और सिर पर तीन गोलियां दाग दीं। वारदात के बाद दोनों आरोपी तेजी से मौके से फरार हो गए।
हत्या के बाद दोनों आरोपियों को अंदेशा था कि पुलिस पूरे शहर में सघन चेकिंग करेगी। इसलिए रास्ते में एक सुनसान स्थान पर गड्ढा खोदकर हत्या में प्रयुक्त पिस्टल को पन्नी में लपेटकर जमीन में दबा दिया गया। गिरफ्तारी के बाद सचिन पुलिस टीम को उसी स्थान पर ले गया, जहां से हत्या में प्रयुक्त .32 बोर की पिस्टल बरामद कर ली गई। इसके साथ तीन जिंदा कारतूस और घटना में प्रयुक्त बिना नंबर प्लेट की मोटरसाइकिल भी बरामद हुई।
पूछताछ में सचिन ने बताया कि मुख्य शूटर संजय की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद वह बेहद घबरा गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह अंबेडकरनगर, बस्ती, अयोध्या, आजमगढ़ और मुंबई सहित कई स्थानों पर छिपता रहा। बाद में उसने अदालत में आत्मसमर्पण करने का मन बना लिया था और इसी सिलसिले में वकील की तलाश के लिए लखनऊ आया था, लेकिन उससे पहले ही एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
एसटीएफ ने आरोपी को पीजीआई थाने में दर्ज हत्या के मुकदमे में दाखिल कर दिया है। अब स्थानीय पुलिस उससे आगे की पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में जुटाए गए सभी साक्ष्यों और आरोपियों के बयानों के आधार पर विवेचना आगे बढ़ाई जाएगी। संदीप सिंह हत्याकांड में यह गिरफ्तारी एसटीएफ की बड़ी सफलता मानी जा रही है, जिससे इस बहुचर्चित हत्या की पूरी साजिश लगभग बेनकाब हो चुकी है।
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Updated on:
09 Jul 2026 02:34 pm
Published on:
09 Jul 2026 02:33 pm
