
भाजपा ने पंकज चौधरी (Pankaj Chaudhary BJP UP president) को राजनीतिक रूप से सबसे अहम राज्य, उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष चुन लिया है। किसी नेता के सरकार (केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री) से संगठन में वापसी का भाजपा में यह कोई नया उदाहरण नहीं है। लेकिन, सवाल है कि पंकज चौधरी को यूपी भाजपा की कमान देने के पीछे भाजपा की क्या रणनीति हो सकती है? और क्या पंकज चौधरी को अध्यक्ष बना कर पार्टी सीएम योगी को भी कोई देना चाह रही है? इन सवालों के जवाब आगे समझेंगे। पहले जान लेते हैं इस समय राजनीतिक रूप से यूपी सबसे अहम क्यों है?
उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले 2026 में पंचायत चुनाव भी होंगे। 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रदर्शन खराब हो गया था। भाजपा राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से सिर्फ 33 ही जीत पाई थी। 2019 में बीजेपी के 62 सांसद थे। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन ने एनडीए को कड़ी चपत लगाई थी।
भाजपा को पहले केवल अगड़ों की पार्टी माना जाता था, लेकिन धीरे-धीरे उसने सोशल इंजीनियरिंग मजबूत करके यूपी में अपनी स्थिति मजबूत की थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में उसका जातीय समीकरण बिखर गया। 2019 की तुलना में उसे ज्यादातर जातियों ने कम वोट दिए। दोनों चुनावों में उसे किस जाति से कितने वोट मिले, यह नीचे के टेबल में देखा जा सकता है।
| समूह (Groups) | कांग्रेस (Congress) | बीजेपी+ (BJP+) | एमजीबी (MGB) | अन्य (Others) |
| उच्च जाति (ब्राह्मण, जाट, राजपूत, वैश्य और अन्य) | 6 | 83 | 7 | 4 |
| यादव (Yadav) | 5 | 23 | 60 | 12 |
| कुर्मी-कोयरी (Kurmi-Koeri) | 5 | 80 | 14 | 1 |
| अन्य ओबीसी (Other OBCs) | 5 | 72 | 18 | 5 |
| जाटव (Jatav) | 1 | 17 | 75 | 7 |
| गैर-जाटव (Other SC) | 7 | 48 | 42 | 3 |
| मुस्लिम (Muslims) | 14 | 8 | 73 | 5 |
नीचे का चार्ट देखें और ऊपर वाले चार्ट से तुलना करें तो साफ समझ में आएगा कि पांच साल में उत्तर प्रदेश में बीजेपी का जातीय समीकरण कैसे ध्वस्त हो गया। इन दोनों चार्ट के आंकड़े सीएसडीएस-लोकनीति के चुनाव बाद किए गए सर्वे से लिए गए हैं।
| समूह (Groups) | इंडिया (India) | एनडीए (NDA) | बसपा (BSP) | अन्य (Others) |
| उच्च जाति (Upper Caste) | 16 | 79 | 1 | 4 |
| यादव (Yadav) | 82 | 15 | 2 | 2 |
| कुर्मी-कोयरी (Kurmi-Koeri) | 34 | 61 | 2 | 3 |
| अन्य ओबीसी (Other OBCs) | 34 | 59 | 3 | 4 |
| जाटव (Jatav) | 25 | 24 | 44 | 7 |
| गैर-जाटव (Non-Jatav) | 56 | 29 | 15 | 1 |
| मुस्लिम (Muslims) | 92 | 2 | 5 | 1 |
साफ है, पांच साल बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में कुर्मी-कोयरी मतदाता एनडीए से बुरी तरह छिटक गए थे। चुनाव बाद सीएसडीएस-लोकनीति द्वारा किए गए सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक एनडीए को कुर्मी-कोयरी के 61 फीसदी वोट मिले थे, जबकि 2019 में यह आंकड़ा 80 फीसदी था। अन्य ओबीसी जातियों ने भी 2019 (72 प्रतिशत) की तुलना में 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए को 13 प्रतिशत कम वोट दिया था। ऐसे में एक कुर्मी को प्रदेश में बीजेपी की कमान देने की अहमियत समझी जा सकती है।
बताया जाता है कि भाजपा की हार के कारणों में से एक अंदरूनी खींचतान रही थी। कई नेता सीएम योगी से नाराज थे और कई नेताओं से सीएम।
इन समस्याओं के मद्देनजर अभी उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से बहुत अहम है। अब समझते हैं कि पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बना कर पार्टी कैसे इस समस्याओं से पार पा सकती है?
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को सबसे ज्यादा चोट सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ही पहुंचाई। उनका ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूला काम कर गया। जाटव को छोड़ कर किसी समुदाय ने एनडीए को 2019 की तुलना में ज्यादा वोट नहीं दिया। 2027 के विधानसभा चुनाव में हर हाल में भाजपा को इसकी काट ढूंढनी होगी। पंकज चौधरी के नाम से इसमें भाजपा को मदद मिल सकती है। गैर यादव ओबीसी मतदाताओं को रिझाने में उनके नाम का इस्तेमाल हो सकता है। साथ ही ओबीसी को किनारे करने के विपक्ष के आरोपों की काट के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
ऐसा लगता है कि पंकज चौधरी का चयन कर भाजपा पार्टी और यूपी सरकार को भी एक संदेश देने की मंशा रखती है। लोकसभा चुनाव के समय पार्टी के अंदर नेताओं में जो मनमुटाव की बातें सामने आई थीं, उनके मद्देनजर यह संदेश भी महत्वपूर्ण है। संदेश यह है कि पार्टी का काम केन्द्रीय नेतृत्व की निगरानी में चलेगा और सरकार पर सीएम का पूरा फोकस रहेगा।
राजनीतिक रूप से पंकज चौधरी सीएम योगी से सीनियर हैं। वह 1991 में ही पहली बार सांसद बन गए थे, जबकि योगी आदित्य नाथ करीब आठ साल बाद संसद पहुंचे थे। इस तरह पंकज चौधरी के जरिए पार्टी ने प्रदेश में अंदरूनी सत्ता संतुलन साधने की भी कोशिश की है। सीएम की सत्ता में कोई कटौती किए बिना। इस तरह 2027 में सीएम योगी के नेतृत्व में संगठन से पूरा तालमेल बनाते हुए यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने का संकेत है।
पंकज चौधरी न केवल कुर्मी हैं, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली नेता हैं। यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ से भी उनके संबंध ठीक हैं। राजनीतिक रूप से दोनों एक ही इलाके के हैं। चौधरी का चुनावी सफर 1989 में गोरखपुर से ही शुरू हुआ था। जिस महाराजगंज से वह सातवीं बार सांसद हैं, वह 1989 में गोरखपुर से ही अलग होकर नया जिला बना था। वह पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व के भी करीबी माने जाते हैं। उनकी छवि विवादों या सुर्खियों में आए बिना काम करने वाले नेता की रही है।
चौधरी जमीनी स्तर के नेता हैं। निगम लेवल से संसद तक पहुंचे हैं। इस लिहाज से भी भाजपा को उम्मीद है कि वह सभी को साथ लेकर चल सकते हैं और 2006 व 2027 के चुनावों में अच्छे नतीजे दिला सकते हैं।