
लखनऊ. राम नगरी योगी सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर है। उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बने महज आठ महीने ही हुए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब तक आधा दर्जन बार फैजाबाद के दौरे पर आ चुके हैं, जबकि वह चार बार अयोध्या पहुंचे हैं। पांचवीं बार यानी 14 नवंबर को भी उनका अयोध्या आना प्रस्तावित था, लेकिन वो फैजाबाद से वापस लौट लौट गए। यूपी में भाजपा सरकार बनने के बाद से सीएम योगी रामनगरी को करोड़ों की सौगात दे चुके हैं। यूपी सरकार ने हाल ही में रामनगरी में देव-दीपावली पर भव्य आयोजन कर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया था।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मंगलवार को फैजाबाद के जीआईसी मैदान में चुनावी जनसभा को संबोधित किया। पहली जनसभा राम की धरती से ही क्यों? राजनीतिक गलियारों में उठ रहे इन सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, 'अयोध्या की अपनी पहचान है। अयोध्या में पहली बार Nagar Nigam Chunav हो रहा है। इसलिए पहली सभा भी अयोध्या की धरती पर ही हो रही है। भगवान राम के बगैर भारत में कोई काम नहीं हो सकता है। राम हमारी आस्था के प्रतीक हैं।' राजनीतिक जानकार मानते हैं कि Ayodhya Nagar Nigam से पहला मेयर भाजपा का ही बने।
सीएम योगी के लिए प्रतिष्ठा का विषय बना नगर निगम चुनाव
राजनीतिक विश्लेषक अयोध्या और गोरखपुर नगर सीट को मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रहे हैं। अयोध्या नगर निगम में चुनाव दिलचस्प बना हुआ है। यहां से समाजवादी पार्टी ने किन्नर नेता गुलशन बिंदू को मेयर प्रत्याशी बनाया है, जबकि सीताराम जायसवाल यहां से भाजपा के मेयर प्रत्याशी हैं। इससे पहले गोरखपुर नगर निगम सीट पर एक बार योगी आदित्यनाथ समर्थित प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा था, तब एक निर्दलीय किन्नर प्रत्याशी आशा देवी ने गोरखपुर नगर निगम चुनाव में योगी समर्थित प्रत्याशी को मात दी थी।
अयोध्या के लिए नया नाम नहीं है किन्नर गुलशन
सपा प्रत्याशी किन्नर गुलशन बिंदू को Ayodhya Municipal Corporation में मजबूत दावेदार माना जा रहा है। गुलशन ने वर्ष 2012 में अयोध्या से निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा था, तब उन्हें 6 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद नगर पालिका परिषद के चेयरमैन के चुनाव में उन्हें महज 200 वोटों से शिकस्त मिली थी। इस बार उन्हें उन्हें यहां से एक मजबूत दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है।
निकाय चुनाव में सीएम योगी की अग्नि परीक्षा
प्रचंड बहुमत लेकर सत्ता में आई योगी सरकार के सामने पहली अग्नि परीक्षा निकाय चुनाव के रूप में सामने है। भाजपा की कोशिश 2019 के लोकसभा चुनाव निकाय चुनाव जीतकर विरोधी दलों को एहसास कराना है कि अब भी पब्लिक भारतीय जनता पार्टी के साथ है। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब यूपी के किसी सीएम ने निकाय चुनाव के लिए जी जान लगा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में होने वाले तीन चरणों के निकाय चुनाव में कुल 40 जनसभाओं को संबोधित करेंगे।
नरेश अग्रवाल बोले- मुख्यमंत्री को सता रहा हार का डर
यूपी के नगर निकाय चुनाव में योगी आदित्यनाथ के दौरे को लेकर समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद वह सपा महासचिवनरेश अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा फेल हो गई है, जिसके चलते निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री योगी को निकलना पड़ रहा है। उन्हें हार का डर सता रहा है। सपा नेता ने कहा कि योगी जी भाजपा के स्टार प्रचारक हैं। वह नगरपालिका के चुनाव प्रचार में निकल पड़े हैं तो इसका मतलब साफ है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की स्थिति बहुत खराब है।