लखनऊ

UP Politics: आजम खान पर शिवपाल के बयान के बाद सियासत तेज, सीएम योगी ने उठाए बड़े सवाल

Yogi Reacts to Shivpal Azam Khan Remark: लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिवपाल यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कानून-व्यवस्था, समाजवादी पार्टी की राजनीति और वर्ष 2027 के चुनावी दावों पर सवाल उठाए।
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Aug 14, 2026
आजम खान को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
आजम खान को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

Yogi Adityanath News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वरिष्ठ समाजवादी नेता आजम खान को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव द्वारा वर्ष 2027 में सपा सरकार बनने पर आजम खान को गृह मंत्री बनाए जाने संबंधी बयान के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। लखनऊ में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी की राजनीति और उसके पुराने कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कई राजनीतिक टिप्पणियां कीं। मुख्यमंत्री के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है और भाजपा तथा समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

शिवपाल यादव के बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने रामपुर जिला जेल में बंद सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में शिवपाल यादव ने कहा कि यदि वर्ष 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो आजम खान को गृह मंत्री बनाया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि आजम खान के साथ अन्याय हुआ है और उनकी पार्टी सत्ता में आने पर इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। शिवपाल ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने का आह्वान करते हुए दावा किया कि आजम खान ने जेल से संगठन को मजबूत करने और पूरे प्रदेश में सक्रिय रहने का संदेश दिया है।

मुख्यमंत्री योगी की प्रतिक्रिया

शिवपाल यादव के इस बयान के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में बिना सीधे नाम लिए समाजवादी पार्टी पर टिप्पणी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल ऐसे व्यक्ति को गृह मंत्री बनाने की बात कर रहे हैं, जबकि वे जानते हैं कि ऐसा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से संबंधित दल की सोच और राजनीतिक दृष्टिकोण का पता चलता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कानून-व्यवस्था, दंगों और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी के पूर्व शासनकाल की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान सरकार कानून व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और प्रदेश में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज

मुख्यमंत्री के बयान के बाद भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान सरकार ने कानून-व्यवस्था में सुधार किया है और प्रदेश को दंगा मुक्त बनाने का प्रयास किया है। वहीं समाजवादी पार्टी लगातार यह आरोप लगाती रही है कि उसके नेताओं के खिलाफ राजनीतिक कारणों से कार्रवाई की गई है।

आजम खान लंबे समय से विभिन्न मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं और रामपुर जिला जेल में बंद हैं। उनके समर्थक लगातार दावा करते रहे हैं कि उनके साथ राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई की गई, जबकि भाजपा इस आरोप को खारिज करती रही है।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में उठे कई मुद्दे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में केवल आजम खान का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि विभाजन, राष्ट्रीय एकता, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचार और देश की आंतरिक सुरक्षा जैसे कई विषयों पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन विश्व इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में से एक था और उससे देश को आज भी सीख लेने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों की जिम्मेदारी है।

कांग्रेस पर भी साधा निशाना

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि देश के विभाजन और उससे जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों पर गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता है। उन्होंने मोहम्मदाबाद के नवाब की संपत्ति का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की पूर्व नीतियों पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास से सीख लेकर ही देश को मजबूत बनाया जा सकता है और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सकता है, जिनसे राष्ट्रीय एकता प्रभावित हो।

आजम खान का राजनीतिक सफर

आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक चर्चित चेहरा रहे हैं। वे कई बार विधायक चुने गए और समाजवादी पार्टी की सरकारों में मंत्री भी रहे। रामपुर से उनका राजनीतिक प्रभाव लंबे समय तक कायम रहा। उनके नेतृत्व में रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना भी हुई, जो समय-समय पर राजनीतिक और कानूनी चर्चाओं का विषय रहा है। पिछले कुछ वर्षों में आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ कई मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई हुई है। इन मामलों को लेकर समाजवादी पार्टी लगातार सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाती रही है, जबकि सरकार का कहना है कि सभी कार्रवाई कानून के दायरे में की गई है।

2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संकेत

राजनीतिक विश्लेषक मनोज  का मानना है कि शिवपाल यादव का बयान केवल आजम खान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाजवादी पार्टी की 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति का भी संकेत माना जा रहा है। पार्टी अपने पुराने नेताओं और समर्थकों को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर भाजपा भी कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों को लेकर लगातार जनता के बीच अपनी राजनीतिक रणनीति को मजबूत कर रही है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

कानून-व्यवस्था फिर बनी राजनीतिक मुद्दा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कानून-व्यवस्था हमेशा से एक बड़ा चुनावी मुद्दा रही है। भाजपा अपने शासनकाल में अपराध और दंगों पर नियंत्रण को बड़ी उपलब्धि बताती है, जबकि समाजवादी पार्टी सरकार की कार्यशैली और विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाती रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ताजा बयान और शिवपाल यादव की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

आने वाले समय में और बढ़ सकती है सियासी गर्मी

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अरविन्द त्रिपाठी  का कहना  है कि जैसे-जैसे वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आएंगे, वैसे-वैसे राजनीतिक बयानबाजी और तेज होगी। आजम खान, कानून-व्यवस्था, सामाजिक न्याय और विकास जैसे मुद्दे चुनावी विमर्श में प्रमुख स्थान ले सकते हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शिवपाल यादव के बयानों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया सियासी अध्याय शुरू हो गया है। दोनों दल अपने-अपने राजनीतिक संदेश जनता तक पहुंचाने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है।