
Chhattisgarh News: महासमुंद में सरकार ने श्रमिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पूरी व्यवस्था डिजिटल कर दी है, लेकिन यही व्यवस्था अब हजारों जरूरतमंद परिवारों के लिए सबसे बड़ी रुकावट बन गई है। श्रमेव जयते पोर्टल में तकनीकी मेंटेनेंस के चलते जिले में ई-केवाईसी की प्रक्रिया कई दिनों से ठप है। नतीजतन करीब 42 हजार पंजीकृत श्रमिक छात्रवृत्ति, आवास और शिक्षा सहायता जैसी योजनाओं से फिलहाल दूर हैं।
पोर्टल शुरू होने की उम्मीद में श्रमिक रोज विभाग और च्वाइस सेंटरों के चक्कर लगा रहे हैं, जबकि विभाग भी तकनीकी समस्या दूर होने का इंतजार कर रहा है। जिले में श्रमिकों के पंजीकरण और कल्याणकारी योजनाओं का पूरा संचालन अब ऑनलाइन माध्यम से किया जा रहा है। योजना का लाभ लेने के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य है, लेकिन पोर्टल बंद होने से यह प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो गई है। इससे बड़ी संख्या में पात्र हितग्राहियों के आवेदन लंबित पड़े हैं और नए प्रकरणों का भी निराकरण नहीं हो पा रहा है। श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 1 लाख 72 हजार 614 संगठित तथा 34 हजार 999 असंगठित श्रमिक पंजीकृत हैं।
इनमें अब तक 1 लाख 29 हजार 695 श्रमिकों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है, जबकि लगभग 42 हजार श्रमिकों का सत्यापन अभी बाकी है। विभागीय जानकारी के मुताबिक ई-केवाईसी के लिए पोर्टल 15 जून को दोबारा शुरू किया गया था, लेकिन अब मेंटेनेंस के कारण पूरी प्रक्रिया फिर से बाधित हो गई है। ई-केवाईसी लंबित रहने से श्रमिक परिवारों को मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना, विशेष शिक्षा सहायता योजना, अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना, श्रमिक आवास योजना सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका असर सीधे उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो इन योजनाओं पर निर्भर हैं। अब पोर्टल खुलने का इंतजार है। श्रम विभाग के अधिकारी डीएन पात्रा ने बताया कि पोर्टल में तकनीकी मेंटेनेंस चल रहा है। इसके कारण ई-केवाईसी की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। पोर्टल सामान्य होते ही लंबित सत्यापन का कार्य फिर से शुरू कर दिया जाएगा।
पिछले चार दिनों से श्रमिक लगातार च्वाइस सेंटर, लोक सेवा केंद्र और श्रम विभाग के कार्यालय पहुंच रहे हैं। अधिकांश लोगों को हर बार यही जानकारी मिल रही है कि पोर्टल चालू होने के बाद ही ई-केवाईसी संभव होगी। कई श्रमिकों को उम्मीद थी कि बुधवार तक समस्या दूर हो जाएगी, लेकिन तकनीकी कार्य पूरा नहीं होने से इंतजार बढ़ गया है। पोर्टल चालू होने के बाद निर्धारित शुल्क जमा कर ई-केवाईसी कराई जाएगी, जिसके बाद ही लंबित योजनाओं की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
श्रम विभाग की अधिकांश योजनाओं का लाभ केवल पंजीकरण से नहीं, बल्कि ई-केवाईसी पूर्ण होने के बाद ही स्वीकृत होता है। मुख्य श्रमिक का सत्यापन होने पर ही उसके आश्रितों को छात्रवृत्ति, शिक्षा सहायता, आवास और अन्य आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। यही कारण है कि हजारों परिवार आवश्यक दस्तावेज होने के बावजूद योजनाओं से वंचित हैं। विभाग का कहना है कि तकनीकी बाधा समाप्त होते ही लंबित मामलों का तेजी से निराकरण किया जाएगा ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर सहायता मिल सके। वर्तमान में श्रमिक च्वाइस सेंटरों के चक्कर लगा रहे हैं।
पोर्टल बंद होना ही श्रमिकों की एकमात्र समस्या नहीं है। बड़ी संख्या में ऐसे पंजीकृत श्रमिक भी हैं। जिनके आधार कार्ड में नाम, जन्मतिथि या अन्य विवरण दर्ज होने में त्रुटियां हैं। कई मामलों में आधार प्रमाणीकरण के दौरान बायोमैट्रिक मिलान नहीं हो पाता, जिससे ई-केवाईसी अधूरी रह जाती है। दूसरी ओर काम की तलाश में दूसरे राज्यों में गए श्रमिक भी समय पर सत्यापन नहीं करा सके हैं। इन सभी कारणों से हजारों आवेदन लंबे समय से लंबित हैं। विभाग समय-समय पर शिविर लगाकर दस्तावेज सुधार और सत्यापन की सुविधा उपलब्ध करा रहा है, लेकिन पोर्टल बंद होने से यह प्रयास भी फिलहाल असरदार साबित नहीं हो पा रहे हैं।